अगर हम भारत में मुग़ल इतिहास की बात करें तो भारत में मुग़ल इतिहास 1526 से बाबर के आगमन से शुरू हुआ। बाबर से लेकर औरंगज़ेब तक भारत में मुग़लों का राज रहा। राज तो उससे बाद भी क्या था पर भारत में औरंगज़ेब के बाद लगभग मुगलों की शता का अंत हो गया था। भारत में मुग़लों ने कितने वर्ष राज किया ?
ये भी आपके दिमाग में सवाल आते होंगे तो हम बता दें कि भारत पर मुगलों ने 332 साल तक राज किया और मुग़ल साम्राज्य का पूर्ण अंत तब हुआ जब 1858 में अंग्रेजों ने मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फर को अपराधी के तौर पर सजा सुनाई थी।
भारत में मुगलों में सबसे ज्यादा राज करने वालों में अकबर थे अकबर ने भारत पर कितने साल राज किया तो अकबर ने भारत में उसका शासन 1556 से 1605 तक रहा जो लगभग 49 साल बनता है। उनके बाद औरंगज़ेब मुगलों में ऐसे शासक थे जिन्होंने भारत पर सबसे ज्यादा शासन किया। औरंगज़ेब ने अपनी शासन अवधि में क्या अच्छा किया और क्या बुरा किया आईये नज़र डालते हैं औरंगज़ेब के इतिहास और जीवनी पर।
| औरंगज़ेब का इतिहास |
औरंगज़ेब परिचय | जीवनी | जन्म | परिवार | शिक्षा | शासन | साम्राज्य विस्तार | धार्मिक नीतियां | मृत्यु
मुग़ल शासक औरंगज़ेब का जीवन परिचय | Biography of Mughal Emperor Aurangzeb
- औरंगज़ेब का जन्म स्थान ---- गुजरात, दाहोद
- जन्म तारीख ---- 3 नवम्बर 1618
- औरंगज़ेब का पूरा नाम (फुल नेम )---- अब्दुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब आलमगीर
- पिता जी का नाम ---- शाहजहाँ
- माता जी का नाम ---- मुमताज
- दादा का नाम ---- जहांगीर
- दादी का नाम नूरजहां
- कुल पत्नियां ---- पांच
- पत्नियों के नाम ---- औरंगाबादी महल, झैना महल, बेगम नबाव बाई और उदैपुरी महल
- औरंगज़ेब के कुल बेटे ---- 6
- औरंगज़ेब के बेटों का नाम ---- बहादुर शाह, आज़म शाह, मोह्हमद काम बख्श मोह्हमद सुल्तान, सुल्तान मोह्हमद अकबर
- औरंगज़ेब का राज्यभिषेक ---- दो बार
- पहला राज्यभिषेक ---- जुलाई 1658 ई (दिल्ली में )
- दूसरा राज्यभिषेक ---- 15 जून 1659 ई (दिल्ली में)
- औरंगज़ेब की शासन अवधि ---- 1658 से1707 तक 49 साल
- औरंगज़ेब की उपाधि ---- आलमगीर (विश्व विजेता) जो उसने खुद हासिल
- मृत्यु ---- 3 मार्च सन 1707 ई.में
औरंगज़ेब का जन्म, परिवार और शिक्षा | Aurangzeb's Birth, Family and Education)
औरंगज़ेब का
जन्म
भारत
के
पश्चमी
राज्य
गुजरात
में
हुआ
था
जिस
जगह
का
नाम
दाहोद
है
उनका
जन्म 3
नवम्बर 1618 को हुआ था। वे
शाहजहाँ और
मुमताज
महल
के
तीसरे
बेटे
और
छठे
बच्चे
थे।
उनके
पिता
का
नाम
शाहजहां था।
जब
औरंगज़ेब का
जन्म
हुआ
तब
उनके
पिता
गुजरात
प्रान्त के
सूबेदार के
पद
पर
काम
करते
थे।
उनकी
माता
जी
का
नाम
मुमताज
था
जिन्हे
एक
हसीन
औरत
के
रूप
में
सभी
जानते
हैं।
औरंगज़ेब के
दादा
जी
का
नाम
जहाँगीर और
दादी
जी
का
नाम
नूरजहाँ था।
औरंगजेब का
पूरा
नाम
अब्दुल
मुजफ्फर मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब आलमगीर
था।
औरंगज़ेब की
कुल
पांच
पत्नियां थी
जिनके
नाम
औरंगाबादी महल,
झैना
महल,
बेगम
नबाव
बाई
और
उदैपुरी महल
था।
इन
पांच
पत्नियों में
नबाव
बाई
और
उदैपुरी महल
हिन्दू
धर्म
से
और
बाकी
मुसलमान धर्म
से
संबंध
रखती
थी।
अगर
औरंगज़ेब के
बेटों
की
बात
करें
तो
उनके
6 बेटे
थे
जिनका
नाम
बहादुर
शाह,
आज़म
शाह,
मोह्हमद काम
बख्श
, मोह्हमद सुल्तान, सुल्तान मोह्हमद अकबर
था।
औरंगज़ेब के बेटी का नाम जैबुनिसा था जो छत्र साल राजा के साथ प्यार मुहबत के चक्र में पद गई थी और छत्रसाल को औरंगज़ेब अपना दुश्मन मानता था औरंगज़ेब ने अपनी बेटी को समझाया पर वह नहीं समझी उसके बाद उसने छत्रपति शिवाजी की बीरता पर कायल होकर उनसे प्यार मुहब्बत के चक्र में पद गई पर औरंगज़ेब ने कटटरता से निपटते हुए उसे कैद कर दिया जो 20 साल तक कैद रहने के बाद उसकी मृत्यु
औरंगज़ेब का शासन | Aurangzeb's rule
औरंगज़ेब ने
अपनी
सूझबूझ
से
अपने
पिता
का
विश्वास जीता
और
इसके
पिता
ने
उसे
1634 में
शहज़ादे औरंगज़ेब को
दक्कन
का
सूबेदार नियुक्त करने
की
घोसना
कर
डाली।
औरंगज़ेब ने
महाराष्ट्र की
तरफ
रुख
किया
और
उसका
नाम
बदल
कर
औरंगाबाद रख
दिया
था।
औरंगज़ेब के
काम
काज
में
व्यस्त
होने
के
बाद
उनके
पिता
ने
अपना
शासन
का
भार
काम
करने
के
लिए
सारा
कार्यभार अपने
बेटे
दारा
सिकोह
को
देना
शुरू
कर
दिया।
शाहजहाँ के परिवार में एक घटना हुई थी कि उनकी एक बेटी थी जिसका देहांत हो गया था और उसकी मौत के बाद शाहजहाँ ने औरंगज़ेब को बुलाया पर लगभग 22 दिन बाद आगरा वापिस आये। जिससे क्रोधित होकर शाहजहाँ ने उन्हें गुजरात के सूबेदार के पद से हटा दिया। औरंगज़ेब ने अपना काम अच्छी तरह से किया इसलिए उन्हें मुल्तान और सिंध का सूबेदार बना दिया गया।
औरंगज़ेब के मन में अपने पिता के खिलाफ घृणा कब पैदा हुई जब मुल्तान और सिंध का सूबेदार बनने के बाद उन्हें दुबारा दक्क्न का सूबेदार बनाया गया तब उन्होंने अपना काम अच्छी तरह से किया और दक्क्न में गोलकोंडा और बीजापुर के ख़िलाफ़ दो लड़ाइयां लड़ी और औरंगज़ेब को पता था ये लड़ाइयां वे जीत जायेंगे पर अंतिम समय में उनके पिता जी ने उन्हें लड़ाई से हटने के लिए कह दिया इससे औरंगज़ेब को यह लगा कि उनके पिता जी ऐसा उनके बड़े भाई द्वारा सिकोह के कहने कर कर रहे हैं इसलिए उनके दिल में बहुत बड़ा आघात पंहुचा।
इनके बारे में भी जानिए :--
👉👉 मुग़ल शासक बाबर का इतिहास और जीवन परिचय
👉👉 शेरशाह सूरी का जीवन परिचय और इतिहास
👉👉 टीपू सुल्तान के बारे में जानकारी और इतिहास
👉👉 मुग़ल शासक अकबर का इतिहास और बायोग्राफी
औरंगज़ेब के पिता जी शाहजहाँ 1657 में बुरी तरह बीमार पड़ गए और शाहजहाँ के तीन पुत्रों को जिनका नाम दारा शिकोह, शाह शुजा और औरंगज़ेब को ऐसा लगा कि अब उनके पिता का अंत सामने है। इसलिए सत्ता का भूखा कौन नहीं होता है तीनों में सत्ता के लिए लड़ाई आरम्भ हो गई। तीनों भाइयों में औरंगज़ेब सबसे ज्यादा चालाक और बलवान था इसलिए उसने अपने भाइयों को सत्ता की भूख में मरवा डाला।
औरंगज़ेब के इस अत्याचार के चलते सभी धर्म के लोग उनसे नफरत करने लगे पर औरंगज़ेब ने इसकी कोई भी परवाह नहीं मारी और अपने पिता शाहजहाँ को भी कैद कर लिया। शाहजहाँ को औरंगज़ेब पहले मरना चाहता था पर शाहजहां के कुछ वफादार साथी थे जिन्होंने उनपर दवाब बनाया और उन्हें औरंगज़ेब से बचा लिया। दारा सिकोहा को औरंगज़ेब ने गद्दारी का तगमा दिया और उन्हें फांसी दे दी। औरंगज़ेब मुगलों में एक ऐसा शासक था जिसने अपने आप को 1658 में शासक घोषित किया।
औरंगज़ेब के शासनकाल में सत्ता के लिए लड़ाई जोरों पर थी उनकी कट्टर मुस्लिम सोच करके वे चारों तरफ से घिर गए थे वे भारत में एक मुस्लिम राज्य की स्थापना करना चाहते थे और इस कार्य के लिया उसने हमेशा अत्याचार और दमन का रास्ता अपनाया था। अपने शासन के विस्तार के लिए वे हिन्दू धर्म के लिए कट्टर नहीं थे पर इसके साथ उन्होंने सिखों और मराठों के साथ भी अच्छे संबंध नहीं बनाये थे और इसका परिणाम ये निकला कि वे चारों तरफ से घिर गए थे और पश्चिम में सिक्खों की संख्या और शक्ति में बढ़ोत्तरी हो रही थी तो दूसरी ओर दक्षिण में बीजापुर और गोलकुंडा के जितने के बाद भी बीच शिवजी ने उनके नाक में दम कर दिया था। औरंगज़ेब ने मरते हुए अपने आप कहा था कि शिवाजी एक ऐसा मराठा था जिसने मेरे नाक में दम कर रखा था।
1657 में शिवाजी और औरंगज़ेब के बीच युद्ध हुआ और मराठों ने औरंगज़ेब को हरा दिया ,इसके बाद औरंगज़ेब ने शिवाजी को संधि के लिए आगरा बुलाया औरंगज़ेब ने उन्हें विश्वास दिलाकर आगरा बुलाया पर आगरा में औरंगज़ेब ने उन्हें कैद कर लिया। पर शिवाजी फलों की टोकरी में चिप कर भागने में सफल रहे।
मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब ने इस्लाम धर्म के विस्तार के लिए लोगों पर बहुत ज्यादा अत्याचार किये थे। उसने कुरान को अपना आधार बनाया था। हिन्दू धर्म के त्योहारों जैसे नवरात्रे, ब्रत रखना और अन्य हिन्दू परम्परा पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। उस वक्त राजपूतों में सती प्रथा का प्रचलन था उस पर भी उसने 1663 में प्रतिबंध लगा दिया था। अकबर ने हिन्दुओं पर जो जजिया कर लगता था उसको ख़तम किया था पर इसके उल्ट औरंगज़ेब ने जजिया कर दुबारा फिर से लागु कर दिया था। अकबर के शासनकाल में हिन्दुओं की संख्या शासन व्यवस्था में मुस्लिमों की तुलना में ज्यादा थी इसके उल्ट औरंगज़ेब ने अपने प्रशासन में हिंदू सामंतों की संख्या नहीं के बराबर राखी हुई थी।
1608 में औरंगज़ेब ने हिन्दुओं के जितने भी त्यौहार थे उन सभी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। वे हिन्दू ,सिख धर्म को ख़तम कर के एक मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना करना चाहते थे इसलिए उन्होंने 1699 में सभी हिंदू मंदिरों को तुड़वाने के आदेश दिए थे। बनारस में जो मंदिर बना जिसका नाम ‘विश्वनाथ मंदिर उसे पहले मुहमंद गोरी ने 1194 में मुहम्मद गौरी ने तुड़वाया था और उसके बाद औरंगज़ेब ने इसे तोड़ने के आदेश दिए थे। इसके बाद उन्होंने राजस्थान में जो केशवनाथ मंदिर जो बूंदी जिले में स्थित है उसका भी विध्वंश करवाया था।
औरंगज़ेब के साम्रज्य का अंत और औरंगज़ेब की मौत | Aurangzeb's empire ended and Aurangzeb's Death
ओरंगजेब के अत्याचारों से सभी परेशान थे एक तरफ मराठों में शिवाजी जिनको औरंगज़ेब ने धोखे से बुलाकर कैद किया हुआ था दूसरी तरफ, सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेगबहादुर को उन्होंने सूली पर चढ़ाया था वे भी उन्होंने धोखे से किया था। 1686 ईसवी में ब्रिटिश इष्ट इण्डिया कंपनी ने भी उसके खिलाफ विगुल बजाया और उसके साम्रज्य को ख़तम करने की सोची। औरंगज़ेब का साम्राज्य चारों तरफ से घिर चूका था। उसकी गलत नीतियों के चलते उसके साम्राज्य का अंत होना निश्चित था 18 सदी की शुरुआत में लगभग एक क्रूर साम्राज्य का अंत हो गया।
औरंगज़ेब की
मृत्यु
को
लेकर
इतिहासकारो के
अलग
- अलग
मत
हैं
कुछ
ये
मानते
हैं
कि
छत्रसाल ने
औरंगज़ेब पर
अपने
खंज़र
से
बड़ी
बुरा
तरह
से
हमला
किया
था।
और
वह
जख्म
इतना
खरनाक
था
की
भर
न
सका
छत्रसाल ने
एक
योजना
के
तहत
औरंगज़ेब ने
एक
ऐसा
खंजर
तैयार
किया
था
जो
विशेष
केमिकल
का
बना
हुआ
था।
समूर्ण
मराठा
वर्ग
औरंगज़ेब के
उन
कर्मों
से
परेशान
थे
जब
औरंगज़ेब ने
शम्भा
जी
की
हत्या
बड़ी
बुरी
तरह
से
की
थी
उसके
अंग
अंग
काट
दिए
थे।
उस
समय
औरंगज़ेब के
पास
उनकी
एक
बेटी
रहती
थी
जसका
नाम
जीनत
था।
मराठों
ने
औरंगज़ेब के
खिलाफ
गोरिला
युद्ध
प्रणाली अपना
रखी
थी
छत्रसाल ने
औरंगज़ेब के
तंबू
में
जाकर
उनके
शरीर
पर
चीरा
मार
दिया
उसे
पूरी
तरह
से
नहीं
मारा
गया।
इस
खंजर
के
जखम
से
3 महीने
बाद
औरंगज़ेब की
मौत
दक्षिण
के
अहमदनगर में
3 मार्च
सन
1707 ई.
में
हो
गई।
औरंगज़ेब को
दौलताबाद में
स्थित
फ़कीर
बुरुहानुद्दीन की
क़ब्र
के
पास
में
दिया
गया।
इस
तरह
से
एक
कट्टर
मुसलमान शासक
और
मुग़ल
साम्राज्य का
अंत
हो
गया।