मुग़ल सम्राट अकबर जीवन परिचय, राज्यभिषेक, इतिहास, रोचक तथ्य | Mughal Emperor Akbar Biography, History, Interesting Facts in Hindi

अकबर के बारे में विस्तृत जानकारी ? :- हेलो दोस्तों, हम सभी जानते हैं कि बाबर 1526 में भारत आया और भारत आने के बाद मुगलों ने भारत पर आप जानते मुगलों ने भारत पर कितने साल शासन किया 1526 से 1707 औरंगज़ेब के शासन काल तक मुगलों का शासन माना जाता है। 

ऐसा को सा मुग़ल शासक था जैसे मुग़लों में ग्रेट कहा जाता था जी हाँ उनका नाम था अकबर। आइये नज़र डालते हैं हिंदी पुकार के माध्यम से हम अकबर की जीवनी के और इतिहास के बारे में कुछ पहलु आपके सामने लाएंगे जो अकबर की के परिवार, शासन व्यवस्था और उनके द्वारा किये गए कामों के ऊपर नज़र डालते हैं तो आइये शुरू करते हैं।

Akbar The Great


मुग़ल सम्राट अकबर जीवन परिचय | इतिहास | जन्म | परिवार | राज्याभिषेक | दिल्ली सत्ता विस्तार | अनमोल रतन | दीन-ए-इलाही धर्म का विस्तार | रोचक तथ्य | मृत्यु

अकबर के बारे में पहले एक छोटा सा परिचय | Brief Detail about Akbar Biography in Hindi


अकबर का जन्म

14 अक्टूबर 1542 अमरकोट सिंध में

मृत्यु

27 अक्टूबर 1605 फतेहपुर सीकरी में आगरा दिल्ली भारत

अकबर पूरा नाम

अबुल-फतह जलाल-उद्दीन मोहम्मद अकबर

उपनाम

अकबर महान, अकबर दी ग्रेट

शासक

मुग़ल

शासनकाल की कब से कब तक

11 फरवरी 1556 से 27 अक्टूबर 1605

मृत्यु के बाद मकबरा

सिकंदराबाद आगरा में

अकबर का धर्म

इस्लाम और दीन-ए इलाही जो उन्होंने चलाया था

सम्राट के रूप में राजतिलक कब हुआ

14 फरवरी 1556 को

अकबर का राजभिषेक कहां हुआ

कलानौर, पंजाब राज्य

जब अकबर का राज्यभिषेक हुआ तब उम्र

14 साल

वश का नाम

तैमूरी वंश

दादा का नाम

बाबर

दादी का नाम

महम बेगम

पिता जी का नाम

हुमाऊं

माता जी का नाम

हमीदा बानो बेगम

मुख्य पत्नी का नाम

रूकैया सुल्तान बेगम

बच्चों का नाम

जहाँगीर, दानियाल, सुल्तान मुराद मिर्जा, हवर्ष, हुसैन

और पत्नियाँ

हीरा कुँवारी, हरका बाई, जोधा बाई, सलीमा सुल्तान बेगम

मौत के बाद उत्तराधिकारी

जहांगीर

अकबर की मृत्यु के समय उम्र कितनी थी

63 वर्ष 13 दिन


अकबर का का जन्म और परिवार | Akbar's Birth and Family


अकबर का जन्म मुगल वंश के तैमूरी वंशावली में 15 अक्टूबर 1542 में हुआ था। अकबर के पिता जी का नाम नासिरुद्दीन हुमायूं था और नासिरुद्दीन हुमायूं बाबर के पुत्र थे तो बाबर जो पहली बार भारत में आये उनके रिश्ते में दादा जी लगते थे। तो ये बात तो साफ हो गई कि अकबर मुगल शासकों में तीसरे शासक थे जिन्होंने दिल्ली पर अपना अधिपत्य जमाया। उनका बचपन का नाम जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर था। उनकी माता जी का नाम हमीदा बानो था। उन्हें तैमूर खानदान से इस लिए कहा जाता था किउंकि उनके दादा जिनका नाम बाबर था वे तैमूर और मंगोल नेता चंगेज खां से संबंधित थे।



क्या आप जानते हैं कि अकबर का नाम अकबर किउं रखा गया था तो उनका नाम अकबर इसलिए रखा गया था क्यूंकि उनका जन्म 15 अक्टूबर को जब हुआ उस दिन पूर्णिमा का दिन था। अकबर का अर्थ होता है बद्र और बद्र का अर्थ होता है पूर्ण चंद्रमा। अकबर के नाना उन्हें प्यार से शेख अली अकबर जामी के नाम के नाम से पुकारा करते थे। ऐसा बी माना जाता है कि उन्होंने महान कार्य किये थे इसलिए लोग उन्हें अकबर के नाम ही पुकारा करते थे। अकबर एक अरबी शब्द है और इसका अर्थ हिंदी में "महान" होता है इसलिए उन्हें "अकबर महान" या "अकबर दी ग्रेट" के नाम से जाना जाता था।


अकबर की दादी जो बाबर की पत्नी थी उनका नाम महम बेगम था। सबसे पहले उन्होंने अपनी चचेरी बहन रुकैया सुल्तान बेगम से शादी से शादी की जो काबुल की रहने वाली थी। और इतिहास में रुकैया सुल्तान बेगम को अकबर की मुख्य पत्नी के रूप में जाना जाता है। हालाँकि उसके बाद उन्होंने बाद में सलीमा सुल्तान बेगम, हीर कुँवारी, हरका बाई, जोधा बाई से भी शादी की थी। और जोधाबाई और अकबर पर एक फिल्म भी बनाई गई है। 

 

अकबर के बच्चों का नाम सुल्तान मुराद मिर्जा, हवर्ष, हुसैन, जहाँगीर और दानियाल था। ऐसा भी माना जाता है की जब उनके पिता जी ने काबुल पर विजय प्राप्त की उसके बाद वे वेहम भरम में गए थे इसलिए उन्होंने उनका नाम उनके जन्म दिन पर बदल दिया था।


अकबर का राज्याभिषेक का इतिहास | Akbar's coronation


अकबर की मौत के बाद अकबर को राजसिहासन संभालने की जिमेवारी पद गए पर वे आयु में बहुत छोटे थे जब उनकी मृत्यु हुई तब वे 14 साल के थे। अकबर का राज्याभिषेक 14 फरवरी 1556 को पंजाब के गुरदासपुर जिले के कलानौर तहसील में हुआ था जो पाकिस्तान की सीमा के साथ लगता है। उसके राजयभिषेक का सारा काम उनके मंत्री थे। बैरम खान ने अकबर के जीवन में एक मार्ग दर्शक का काम किया और उन्हें सक्षम रह दिखाई। 

 

बैरम खान अकबर के सिहांसन संभालने के बाद 1556 से 1560 तक मार्ग दर्शक और संरक्षक रहे। बैरम खान ने अकबर से उनके पिता की मोत को छुपाये रखा और उनका शान से राजयभिषेक किया उनके पिता की मौत अचानक हुई थी जो दिल्ली में सीढ़ियॉं से गिर कर मरे थे ऐसा भी माना जाता है कि उनकी मौत नशे की हालत में हुई थी इसलिए बैरम खान उसे राज ही रखना चाहते थे। 



अकबर का राज्य विस्तार | Akbar's expansion


 

अकबर के राज्य सँभालने के बाद अकबर और उसके मंत्री पर शासन को चलाना एक चुनौती भरा काम था किउंकि एक तरफ शम्सुद्दीन अतका खान की हत्या से सभी जगह जान आक्रोश था और दूसरी तरफ सूरी साम्राज्य का बहुत जल्दी परस्सर हो रहा था। एक कारण और भी था कि अकबर के पिता ने दिल्ली काबुल तक अपना साम्राज्य स्थपित किया था। 

 

 

अफगान भी उनके लिए चेतावनी का विषय था किउंकि वह हेमू के साथ मिलकर अकबर को दबाना चाहते थे। जब हेमूं के और अफगान के संगठित होने की खबर उनको लगी तो उन्होंने ये अपने मन मनीं सोच लिया कि जब तक वे सूरी वंश का सामना कर उसे नहीं मिटाएगा तब तक वह चेन की साँस नहीं ले सकता है। सबसे पहले उन्होंने अपने साम्राज्य में सामंतों की संख्या बढ़ाई और उन्हें संगठित रहने के लिए कहा। अपनी सेना संगठित कर उन्होंने सूरी वंश को खत्म करने के लिए पुंजाब की और रुख किया।

 


दिल्ली की सता निकली अकबर के हाथ से | Delhi's haunting came out of Akbar's hand


विक्रमादित्य हेमू और सिकंदर शाह सूरी अकबर के लिए दिल्ली पर अपना अधिपत्य जमाने के लिए सबसे बड़े विरोघी साबित हुए। पर उनमे से सिकंदर शाह सूरी अकबर के लिए बहुत बड़ा विरोधी साबित नहीं हुआ क्योकि जब भी उसने अकबर के राज्यों में घुसने की कोशिश की उसको हार का सामना करना पड़ा। पर दूसरी तरफ अकबर के लिए विक्रमादित्य हेमू एक बड़ी चुनौती थी और वह भारत में हिन्दू साम्राज्य स्थापित करना चाहता था। अकबर की गैरहाजरी में हेमू ने दिल्ली और आगरा पर जबरदस्त आक्रमण कर दिया फिर क्या था हेमूं ने 1556 में भारत में हिन्दू राष्ट्र की घोषणा कर दी।

 


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अकबर का दिल्ली पर पुनः सत्ता स्थापित करना | Akbar's re-establishment of power over Delhi



अगर हम "अकबर का इतिहास" देखें तो ये एक अकबर के इतिहास में एक दिलचस्प किस्सा है कि जब दिल्ली में हिन्दू साम्राज्य की स्थापना का समाचार अकबर को मिला तो उन्होंने बैरम खान के साथ इस बात की चर्चा की और उसी वक्त दिल्ली के लिए कूच कर दिया। कुछ सलाहकारों ने उन्हें ये लड़ाई नहीं लड़ने की सलाह भी दी थी पर अकबर दिल्ली की और रवाना हुए। 


एक तरफ अकबर की सेना और दूसरी तरफ विक्रमादित्य हेमू और सिकंदर शाह सूरी का साथ था। दोनों में एक घमासान युद्ध हुआ जिसे इतिहास में पानीपत की दूसरी लड़ाई के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध में हेमू की हार हुई और अकबर ने अपना दिल्ली साम्राज्य दुबारा वापिस ले लिया। और इस युद्ध में हेमू युद्ध में मारा गया और सिकंदर शाह सूरी ने इस युद्ध में आत्म समर्पण किया पर बाद में अकबर ने उसे मौत की सजा दे दी।



अकबर का राजधानी स्थानांतरित करने का सिलसिला या इतिहास | Akbar's process of shifting the capital


पानीपत की लड़ाई के बाद अकबर ने अपना सम्राज्य का विस्तार करना शुरू किया और उन्होंने मालवा, गुजरात जो पश्चिम में था, बंगाल जो पूर्व में था, महाराष्ट्र जो मध्य भारत में था,और कश्मीर जो उत्तर में था अपने राज्य का विस्तार किया। इस साम्राज्य को सँभालने के लिए उन्होंने राजयपालों की नियुक्तियां भी की थी।  

 

साम्राज्य के विस्तार के कारण शासन व्यवस्था को चलने के लिए उन्हें दिल्ली का रास्ता दूर लगने लगा इसलिए उन्होंने अपनी राजधानी बदलने का फैसला किया और एक मध्य स्थान चुनने की सोची। उन्होंने आगरा के निकट फतेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी के रूप में चुना और उसे अपनी राजधानी बनाया।



इसे अकबर ने अपनी जीत की ख़ुशी की वजह से फतेहाबाद या फतेहपुर नाम भी दिया था। पर फतेहपुर सीकरी को भी उन्होंने बाद में बदल डाला और अपनी रक्धानी 1585 में अपनी राजधानी लाहौर बना डाली इतिहास कार कहते हैं इसके पीछे पानी की समस्या बताया जाता है कि पानी की कमी के कारण अकबर ने अपनी राजधानी फतेहपुर सिकरी से लाहौर बदली थी। 

 

पर लाहौर में वे कुछ ज्यादा दिन काम राजा के रूप में नहीं कर सके और फिर से अपनी राजधानी को आगरा स्थापित किया और अपनी मौत तक आगरा से अपना सम्राज्य का विस्तार किया राज किया।


अकबर के दरबार में नौ अनमोल रत्न | Nine Jewels in Akbar Dynasty

अकबर का साम्राज्य बहुत फैला हुआ था उसने अपने साम्रज्य का प्रशासन व्यवस्था को चलाने के लिए बहुत सारे राजयपालों और लोगों को नियुक्त किया हुआ था पर उनके दरबार में नौ ऐसे हीरे थे जिनके बारे में सभी पूछते हैं आईये जानते हैं उनके बारे में कौन थे अकबर के दरबार में वे 9 रत्न।


  • अकबर के दरबार में पहला रत्न अबुल फजल - ये अकबर के दरबार में एक लेखक और कवी थे जिन्होंने अकबर के शासनकाल को अपनी कलम से लिखा था और उन्होंने आइन-ए-अकबरी जो अकबर के नाम पर किताब थी उसे लिखा था।

  • अकबर के दरबार में पहला रत्न अबुल फजल - ये अकबर के दरबार में एक लेखक और कवी थे जिन्होंने अकबर के शासनकाल को अपनी कलम से लिखा था और उन्होंने आइन-ए-अकबरी जो अकबर के नाम पर किताब थी उसे लिखा था।

  • अकबर के दरबार में दूसरा रत्न फैजी -- ये अबुल फजल का भाई था। वः फ़ारसी भाषा में निपुण था और अकबर ने उसे अपने बेटे की शिक्षा के लिए नियुक्त किया था।

  • अकबर के दरबार में तीसरा रत्न फकीर अजिओं-दिन -- ये अकबर के सलाह कार थे।

  • अकबर के दरबार में चौथा रत्न मिंया तानसेन -- तानसेन अकबर के दरबार में एक गायिक और कवी था जो अनमोल कविताएँ लिखा करता था।

  • अकबर के दरबार में पांचवा रत्न मिंया राजा बीरबल -- बीरबल अकबर के प्रमुख सलाहकार और एक चतुर व्यक्ति थे जीके ऊपर अकबर सबसे ज्यादा विश्वास करता था।

  • अकबर के दरबार में छठा रत्न राजा टोडरमल -- टोडरमल अकबर के बितमंत्री के रूप में काम करते थे। राजस्व का जितना भी लेखा जोखा होता था उन्ही के पास होता था।

  • अकबर के दरबार में सातवां रत्न राजा मान सिंह आम्बेर -- ये एक राजपूत घराने के अकबर के प्रधान सेनापति थे। और अकबर की राजपूत पत्नी जोधाबाई राजा मान सिंह की बुआ थी।

  • अकबर के साम्राज्य में आठवां रत्न अब्दुल रहीम खान-ऐ-खाना -- ये अकबर के दरबार में एक राजयपाल के रूप में काम करते थे और अकबर के सरक्षक बैरम खान के पुत्र थे।

  • अकबर के साम्राज्य में नौवें रत्न मुल्लाह दो पिअज़ा थे जो अकबर के सलाहकार के रूप में काम करते थे।



अकबर द्वारा दीन-ए-इलाही धर्म का विस्तार | Din-i-Ila -hi religion spread by Akbar




अकबर ने एक नए धर्म चलाया था जिसका नाम था दीन--इलाही और इसका आरंम्भ अकबर ने 1582 में किया था। ये एक ऐसा धारण था जिसमें हिन्दू, मुस्लिम, बौद्ध, जैन, पारसी तथा ईसाई धर्म के सभी पहलुओं को जोड़ा गया था। ईशवर एक है इस बात की झलक इस धर्म में मिलती थी पर सभी धर्मों के साथ होने के कारण बहुदेववाद की झलक की झलक भी इसमें कहीं कहीं मिलती थी इसलिए इस धर्म का किसी किसी जगह विरोध हुआ। 

 

अकबर ने इस धर्म को भगवान का धर्म के नाम से पुकारा था। इस धर्म को उनके दरबारी केवल बीरबल ने स्वीकार किया और सभी ने इसका विरोध किया था। अकबर की जितनी भी रानियां थी उन्होंने इस धर्म को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था। उनकी जीवन तक ये धर्म चला उनके बाद ये धर्म धीरे धीरे ख़त्म हो गया।



अकबर की मृत्यु (Death of Akbar)



दोैस्तों मौत तो सभी को आती है चाहे वह राजा हो या फकीर इंसान हो या जानवर मौत जिंदगी का सत्य है पर अकबर की मौत के बारे में अलग अलग विचार हैं पर हम आपको बता दें अकबर की मृत्यु तब हुई जब 63 साल के थे रथत 27 October 1605 को उनकी मृत्यु हुई थी। अकबर पेट की बिमारी की वजह से परेशान थे इसलिए वे बीमारी उनकी ठीक नहीं हो सकीय और उनकी मौत हो गई। उनका अंतिम संस्कार फतेहपुर सीकरी आगरा में किया गया था।



Interesting, Unknown,  Facts about Akbar in Hindi | अकबर के बारे में रोचक और अज्ञात तथ्य


  • मुगल शासकों में अकबर एक ऐसे सम्राट थे जिनको सभी धर्मों का बराबर प्यार मिला ज्यादादर हिन्दुओ का।

  • अकबर ने सभी धर्मों के समावेश से एक धर्म का निर्माण किया जिसका नाम दिन - ए - इलाही था।

  • अकबर के दिन - ए - इलाही धर्म को उनकी किसी भी रानी ने स्वीकार करने  से इंकार कर दिया था और अकबर की मौत के बाद ख़तम हो गया।

  • क्या आप जानते है कि अकबर के दरबार में मुस्लिम धर्म से ज्यादा हिन्दू धर्म के सरदार और सामंत थे।

  • अकबर ने हिन्दुओं पर लगने वाला जजिया कर समाप्त कर दिया था जिससे हिन्दुओं में अकबर के प्रति विश्वास जगा।

  • ये भी आप कम ही जानते होंगे कि अतने बड़े सम्राट की जब मौत हुई तो उनका संस्कार इतने अच्छी तरह से नहीं हुआ और उनके शव को दुर्ग की दीवार तोड़कर एक मार्ग बनाया गया और चुपचाप उन्हें दफनाया गया।

  • क्या आप जानते हैं कि जब अकबर का राजभिषेक हुआ उस वक्त कौन सा वंश उनका सबसे बड़ा दुशमन था तो वह था सूरी वंश।

  • इतने बड़े सम्राट के शासन काल में एक बार हिन्दू शासन की स्थापना भी हुई थी और इसकी स्थान हेमूं ने की थी जिसे अकबर ने पानीपत की लड़ाई में हराकर फिर से मुग़ल साम्राज्य की स्थापना की।

  • ये भी आप कम ही जानते होंगे कि अकबर ने अपने ही सरंक्षक बैरम खान को 1560 में बहार का रास्ता दिखाया था।

  • अकबर ने अपने शासनकाल में ताँबें, चाँदी और सोनें की मुद्राएँ प्रचलित की थी।

  • ये भी बहुत दिलचस्प बात है कि अकबर ने पहली बार अपने शासन काल में मनी ट्रांसफर सिस्टम का प्रचलन किया था अर्थात मुद्रा विनियम बिधि।

  • अकबर ने अपनी राजधानी तीन बार बदली उनमे तीन राजधानियां है आगरा, फतेहपुर सिकरी, लाहौर।

  • अकबर सती प्रथा के खिलाफ था और जब भी कोई सुन्दर राजपूत स्त्री सती होने लगती थी और उसे पता चलता तो उन्हें  बलपूर्वक उठा कर लाता और उनके लिए उसने "हरम" का निर्माण किया था वे विधवा वहां पर रहती थीं।

  • मुगल साम्राज्य ने अकबर के राजतिलक के बाद पहला निशाना गुजरात को बनाया और गुजरात पर पहली विजय प्राप्त की।

  • 2008 में आधुनिक अकबर के रूप में ऋतिक रोशन ने भूमिका निभाई है जब आशुतोष गोवरिकर ने अकबर पर एक फिल्म का निर्माण किया और उसकी पत्नी के रूप में ऐश्वर्या राय ने रोल निभाया है जिसका नाम जोधाबाई अकबर था।

  • इस फिल्म से पहले एक और फिल्म का निर्माण हुआ है जिसका नाम मुग़ल-ए-आज़म था और इसका निर्माण 1960 में हुआ था। इसमें पृथ्वीराज कपूर ने एक्टर के रूप में और अनारकली का रोल मधुबाला ने निभाया है।

निष्कर्ष 

23 नवंबर, 1542 को, भविष्य के मुगल सम्राट अकबर का जन्म अमरकोट में हुआ था। उसके पिता हुमायूँ बाबर द्वारा जीता गया राज्य पहले ही हार चुके थे और अकबर का बचपन निर्वासन में बीता था। हुमायूँ ने 1555 में भारत पर फिर से विजय प्राप्त की, केवल मरने के लिए, और लड़के के राजा को खुद पर अधिकार करने से पहले पांच साल का शासन सहना पड़ा। वह एक दृढ़ नेता और प्रबुद्ध संगठनकर्ता के रूप में एशियाई शासकों के बीच खड़ा है। लेकिन वह आदमी राजा से बड़ा था। धर्म और दर्शन, कला और विज्ञान में उनकी रुचि प्रसिद्ध है, लेकिन उनकी महानता की पहचान जिज्ञासु बुद्धि और निडर निर्णय थे जो उन्होंने अपने आसपास की कठिनाइयों के बारे में हमेशा प्रयोग किए। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम भारत को एक करने का संकल्प लिया। 


उन्होंने पुराने राजपूत शाही परिवारों में शादी की, और उनके उत्तराधिकारी जहांगीर का जन्म एक राजपूत राजकुमारी से हुआ था। यह याद रखने योग्य है कि उसका शासन लगभग इंग्लैंड की एलिजाबेथ के साथ मेल खाता है। ऐसे समय में जब यूरोप ने अभी भी रैक और दांव के तरीकों को स्वीकार्य पाया, उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता को स्थापित और लागू किया। बेंटिक द्वारा इसे समाप्त करने से दो सौ साल पहले उन्होंने सट्टी की भयावहता के खिलाफ लड़ाई लड़ी। वे विद्या और कला के संरक्षक थे। उनका न्याय जाति, पंथ या रंग का कोई भेद नहीं जानता था। ऐसा ही एक व्यक्ति था जिसने रहते हुए भारत को परस्पर सेवा में एकजुट किया।

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Rakesh Kumar

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