आदर्श अध्यापक के कर्तव्य क्या होने चाहिए ?
समाज और देश निर्माण के लिए भारत में ही नहीं पुरे विश्व में शिक्षक की भूमिका बहुत ही सर्वोपरि है ,माता पिता के बाद एक शिक्षक ही होता है जो एक विद्यार्थी के जीवन को सही ढंग से ढालता है और अपने हिसाब से उसको एक रूप देता है।
एक शिक्षक की एक शिक्षक के रूप स्कूल के क्षेत्र में, समाज के क्षेत्र में और देश निर्माण के क्षेत्र में कर्तव्य और उत्तरदायित्व होते है या महत्वपूर्ण गुण होते हैं। आइए जानते हैं एक शिक्षक के रूप में शिक्षक या एक अध्यापक के कौन -कौन से कर्तव्य होते हैं।
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एक अध्यापक के 10 प्रमुख कर्तव्य | shikshak ke kartavya
- समय का पापंद होना चाहिए।
- स्कुल को व्यवस्थित करना।
- सुबह की प्राथना में सक्रिय रूप निभाना।
- कक्षा रूम में समय पहुंचना।
- उचित विषय पर बात करना।
- सभी स्टाफ के साथ सहयोग करना।
- स्वछता सबंधी अग्रसर होना। सबंधी
- स्कुल मुखिया के साथ उत्तरदाई होना।
- माता- पिता अभिवावकों के साथ समय- समय पर बात करते रहना।
- अपने शिक्षण विधि कप समय के अनुसार ढालना।
एक आदर्श शिक्षक के महत्वपूर्ण गुण, कर्तव्य और उत्तरदायित्व
shikshak ke kartavya
1. पहला कर्तव्य समय का पाबंद होना चाहिए :-
समय बहुत बलवान होता है और समय की कदर हर किसी इंसान को करनी चाहिए। एक शिक्षक का सबसे पहला कर्तव्य यह है कि वह समय का पाबंद हो एक शिक्षक में अनुशासन और करवायनिष्ठा का विचार तभी आ सकते हैं अगर वह समय का पाबंद हो। समय अनुसार स्कूल जाना। समय अनुसार अपने Period को Attend करना और समय के अनुसार अपने आप को ढालना, और परिस्थिति अनुसार और समय अनुसार अपनी बात को रखना एक शिक्षक का परम कर्तव्य है।
2. अनुशासन में रहना :-
अनुशासन इंसान का ही नहीं, सभी जीव जंतुओं के लिए जरूरी है और शिक्षक का भी ये कर्तव्य और उत्तरदायित्व है कि वह अनुशसन में रह कर अपने शिक्षण को अंजाम दे। अगर एक शिक्षक के अंदर अनुसासन नहीं है तो वह किसी भी विद्यार्थी को सही ढंग ढाल नहीं सकता है। अनुसाशन के बगैर शिक्षक एक साधारण इंसान की तरह होगा, और उसका फिर शिक्षा के साथ कोई सबंध नहीं रह जायेगा। शायद देश एक फौजी के बाद शिक्षक ही है जिसके अंदर अनुसासन का होना बहुत जरूरी है। इसलिए एक शिक्षक का अनुसाशित होना बहुत ही जरूरी है।
2. सामाजिक निर्माण के लिए अग्रसर होना। :-
शायद एक परिवार के बाद, स्कूल ही एक ऐसी संस्था है जो सामाजिक निर्माण की सबसे पहली इकाई है। समाजिक निर्माण या समाज के प्रति कर्तव्यों के लिए सबसे पहला पाठ हम परिवार से सीखते है और उसके बाद एक विद्यार्थी , एक शिक्षक से सीखता है कि समाज में किस तरह से कुरित्यों को दूर किया जा सकता है। इसलिए एक शिक्षक का यह कर्तव्य है कि एक अच्छे समाज का सृजन करे।
1. समय से स्कूल प्रांगण में पहुंचना :-
एक संस्था और एक स्कुल के प्रांगण में कम -से-कम आधा घंटा पहुँचाना एक शिक्षक का परम् कर्तव्य है। हमारा काम बच्चों को शिक्षा देना वही हमारा व्यवसाय है और उसी से एक शिक्षक के आर्थिक रूप से परिवार चलता है। अगर हम स्कूल में समय की कदर नहीं करते और Late स्कूल पहुंचते हैं तो निश्च्य ही समाज के लोग ही नहीं आपके विद्यार्थी भी इस बात पर वयंगय करेंगे।
जिससे एक अध्यापक की छवि धूमिल होगी और आप और दूसरी अन्य वर्ग के कर्मचारियों में कोई भी अन्तर नहीं रह जायेगा। इसलिए एक स्कूल के प्रति एक अध्यापक का ये फर्ज और कर्तव्य और उत्तरदायित्व है कि वह समय की कदर करते हुए स्कुल समय से पहले स्कुल पहुंचे।
2. स्कूल में आते व्यवस्था करना :-
अगर एक शिक्षक स्कूल में पहुँच गया है तो फिर आपके अंदर ये गुण होना चाइये कि आप अपने काम में Busy हो जाएँ। आते ही स्कूल को व्यवस्थित करना, स्कूल में शिक्षण के ढंग को सही व्यवस्थित करना और अगर कोई विद्यार्थी आपके साथ समय से पहले स्कूल में पहुंचा गया है तो आपका यह कर्तव्य है कि देखें कहीं बच्चे शरारत तो नहीं कर रहे। जरूरी नहीं है एक स्कुल का Head स्कूल पहुंचता है तभी स्कूल का सञ्चालन किया जाये।
अगर स्कूल का Head किसी वजह से स्कूल में थोड़ा Late भी हो जाता है तो एक अच्छे शिक्षक का यह कर्तव्य है कि वह स्कूल को सही तरीके से शुरू करवाए।
3. Morning Assembly में सक्रिय भूमिका
जब भी स्कूल शुरू होता है तो उससे पहले हर संस्था में Morning Assembly करवाई जाति है भगवान का नाम लिया जाता है। उस वक्त एक शिक्षक का यह कर्तव्य है कि वह रोज सुबह की Prayer में भाग ले और केवल भाग ही न ले उसमें रोल भी अदा करे। सुबह की प्रेयर में बच्चों को सही ढंग से व्यवस्थित करना और उन पर नजर रखना, एक शिक्षक की Duty है।
8. स्कूल मुखिया के प्रति आज्ञाकारी :-
स्कूल मुखिया (Head) एक ऐसा कर्मचारी होता है जिसके पीछे सारा स्कूल घूमता है अर्थात चलता है। स्कूल मुखिया के ऊपर कई Responsibilities होती हैं। एक शिक्षक शिक्षण का काम करता है पर Head सभी विषयों पर काम करता है। अगर आप एक शिक्षक हो और आप ये सोचते हैं कि मेरा काम सिर्फ पढ़ाना है तो लगत हो।
अगर शिक्षण की वजाये एक स्कूल का Head आपको कोई उत्तरदाइत्व देता है तो आपका यह कर्तव्य है कि आप उसे अच्छे तरह से करें।
9. विद्यार्थी के माता पिता के साथ Communication रखना :-
एक शिक्षक का यह भी कर्तव्य है कि वह बच्चों के माता पिता के साथ या फिर अभिवावकों के साथ सीओ-ordination बना के रखे ताकि विद्यर्थियीं के के शिक्षण का मूल्यांकन किया जा सके। अगर अभिवावकों और अध्यापक के बीच तालमेल नहीं है तो एक विद्यार्थी का teaching और अध्यात्मक विकास नहीं हो सकता है।
