मदर टेरेसा का जीवन परिचय, अनमोल वचन, अवार्ड | Mother Teresa Biography Quotes and Awards list in Hindi

अगर हम जिंदगी में जीने की बात करें तो इंसान हर कोई जी लेता है कुछ पैसों के जोर पर शान से जीते हैं, कुछ परिवार के लिए जीते हैं, कुछ देश के लिए जीते हैं पर कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपनी जिंदगी में स्वार्थ को छोड़कर दूसरों के लिए जीते हैं और अपना सारा जीवन दूसरों की सेवा के लिए लगा देते हैं और उन्हें एक प्रेरणा दायक स्त्रोत माना जाता है। 

  

एक ऐसी ही महान हस्ती और प्रेरणा दायक स्त्रोत का नाम था मदर टेरेसा जिन्होंने किस जाति धर्म से परे उठ के जिंदगी में निस्वार्थ सेवा की, और अपना जीवन गरीबों और लाचार व्यक्तियों पर लगा दिया। भारत में आकर उन्होएँ जो कार्य किये उनकी सराहना जितनी भी की जाये बहुत कम है। आज हम ऐसी ही हस्ती के ऊपर नजर डालेंगे।


मदर टेरेसा : जीवनी | जन्म | परिवार | एजुकेशन | चैरिटी में किये गए काम | विवाद | अनमोल वचन

मदर टेरेसा बायोग्राफी 



मदर टेरेसा के जीवन परिचय की  | Mother Teresa Short Biography

 

क्रम सं

जीवन परिचय बिंदु

मदर टेरेसा जीवन परिचय का विवरण

1

टेरेसा का पूरा नाम

अगनेस गोंझा बोयाजिजू

2

जन्म तारीख

26 अगस्त सन 1910

3

जन्म स्थान

स्कॉप्जे शहरमसेदोनिया

4

पिता का नाम

निकोला बोयाजू

5

माता का नाम

द्रना बोयाजू

6

कुल भाई बहन

दोएक भाईएक बहन

7

धर्म

ईसाईकैथोलिक

8

महत्व पूर्ण कार्य

मिशनरी ऑफ चैरिटी की स्थापना

9

मृत्यु की तारीख

सितम्बर सन 1997

10

मृत्यु स्थान

भारतकलकत्ता

 

 

मदर टेरेसा जन्म और पारिवारिक जिंदगी | Mother Teresa Birth and Family Life


अतुल्य मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त सन 1910 में स्कॉप्जे नामक स्थान में हुआ था जो अब मेसीडोनिया में आता है। उनके पिता का पूरा नाम बोयाजिजू था जिन्हे छोटे नाम से बोयाजिजू से जाना जाता था। उनके पिता जी एक मध्यवर्गीय परिवार से थे और एक छोटा सा व्यवसाय चला कर घर का गुजारा चलाते थे। मदर टेरेसा का वास्तविक नाम और पूरा नाम "अगनेस गोंझा बोयाजिजू टेरेसा" था। उनके पिता जी धार्मिक भावनाओं से जुड़े हुए थे और हर वक्त भगवान यीशु को समरण करते रहते थे।

 

ड्रैनाफाइल बोजाक्सीउ (DranafileBojaxhiu) था। अलबेनियन भाषा में गोंझा का अर्थ फूल होता है इसलिए उनकी माता मदर टेरेसाको "गोंझा" के नाम से पुकारा करती थी। टेरेसाको मिलाकर उनके कुल पांच भाई बहन थे और इन पांचों में टेरेसा सबसे छोटी थी। उनकी बड़ी बहन जब 15 साल की थी तो उनके पिता जी का देहांत हो गया था। 


तो मदर टेरेसासबसे छोटी थी आप अंदाजा लगा सकते है कि बाल्य अवस्था में उनके पिता जी का देहांत हो गया था जब 1919 में उनके पिता का देहांत हुआ टेरेसाआठ वर्ष की थी। पिता जी के देहांत के बाद उनके पुरे परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।




टेरेसा की शिक्षा - दीक्षा और एग्नेस गोक्सा बोजाक्सीहु से सिस्टर मैरी टेरेसा (Teresa's Education - Initiation and Agnes Goxa Bojaxihu to Sister Mary Teresa)

  

मदर टेरेसाने स्थानीय स्कूल के एक प्राथमिक स्कूल में दखिला लिया और राज्य द्वारा संचालित कॉन्वेंट माध्यमिक विद्यालय में भाग लिया। वे बचपन से गाने बजाने की शौकीन थी और स्कूल में हमेशा गायन प्रतियोगिता में भाग लिया करती थी। उनकी सुरीली आवाज के कारण उन्हें अकेले गायन के लिए बुलाया जाता था। 12 साल की उम्र में उन्होंने एक धार्मिक तीर्थ यत्र की उनकी तीर्थ यात्रा लेटनिस में चर्च ऑफ़ ब्लैक मैडोना के लिए थी और हर वर्ष ये यात्रा की जाती थी।


उन्होंने इस यात्रा से एक अलग जीवन की अनुभूति की। 12 साल की उम्र में गिरजाघर में रह कर उन्होंने अपने जीवन के मूल्यों को समझ लिया था। जब मदर ने 18 साल की उम्र में ये फैसला कर लिया कि वे अब जिंदगी मानव सेवा में लगाएंगी। उन्होंने अब डबलिन में सिस्टर्स ऑफ लोरेटो में शामिल होने कर लिया और 1928 में वह डबलिन में "सिस्टर्स ऑफ लोरेटो" में शामिल हो गई। यहां पर उन्हें अंग्रेजी भाषा का ज्ञान जरूरी था इसलिए उन्होंने अंग्रेजी भाषा का ज्ञान प्राप्त किया और अपना सिस्टर का सफर शुरू किया। इसी संसथान में उन्होंने अपना नाम " सिस्टर मैरी टेरेसा" लिया।



कैसे जुड़ा उनके नाम के साथ "मदर" शब्द | How the word "mother" was associated with her name)


ऐसा माना जाता है की उनकी माता जी एक धार्मिक विचारों वाली स्त्री थी और पाने पांच बच्चों को ये ही सलाह देती थी कि कोई भी चीज हो उसे मिल बाँट के खाना चाहिए। टरेसा इस बात पर हमेशा उनसे ये सवाल पूछा करती थी कि वह कौन है जिसके साथ मिल बांटकर खाएं, इस तरह उनकी माता और टेरेसामें प्यार के व्यंग्य होते रहते थे। पर उनकी माता जी कहा करती थी हमारे और भी सगे संबधी हैं जिन्हे जो आप खा रहे हैं उसकी जरूरत है। बार - बार उनकी माता जी के कहने पर उनके दिल में ये बात बस गई और फिर उनके शब्द के साथ "मदर" शब्द जुड़ गया।

 

मदर टेरेसा का भारत आगमन और सेवा | Mother Teresa's arrival and service in India


टेरेसा, टेरेसा नहीं एक सिस्टर थी और आयरलैंड से 6 जनवरी सन 1929 को कोलकाता केलोरेटो कॉन्वेंटकलकत्ता में पहुंची। अब टेरेसा का अच्छी शिक्षिका और एक अच्छी नन थी जिन्हे हर कोई प्यार करता था। मदर टेरेसा 1929 कलकत्ता में आकर लोगो की सेवा का संकल्प ले लिया उन्होंने गरीबो के बीच में रहना शुरू कर दिया। उन्होंने सबसे पहले बंगाल में आकर बंगाली सीखी ताकी वे गरीबों के साथ अपने विचार वांट सके।

 

उन्होंने भारत आते ही सबसे पहले इतिहास पढ़ाना शुरू किया और जब वे सेंट मैरिज में पढाती थी तो उन्हें गरीबों को देखकर बहुत दया करती थी। जब टेरेसा भारत आई तो सबसे पहले उन्होंने अपने पहनावा बदला और साधारण साड़ी पहन ली ताकि वः लोगों के बीच अच्छी तरह से रहे सके और उन्हें प्यार भाव की भावना प्रदान कर सके। उन्हें बंगाल में आते ही बंगाली बोलना तो सीख लिया था। पर उन्हें अब आम जिंदगी में मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। उन्हें झोंपड़ी में रहकर लोगों की मुश्किलों को सुनना पड़ता था।

 

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पहले उन्होंने एक सरल जीवन व्यतीत किया था पर अब उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। एक समय ऐसा भी आया था जब उन्होंने भारत से वापिस जाने का मन बना लिया था क्योकि देश उस वक्त भयंकर बिमारियों का सामना कर रहा था। टेरेसाने देखा कि गरीबों की सहायता करने वाला कोई नहीं है उन्होंने हौसला नहीं हारा और समाज सेवा में डटी रही। अपनी निस्वार्थ सेवा करते हुए उन्होंने गरीब लोगो के लिए भीख भी मांगी ताकि उनका पेट भरा जा सके।

मदर टेरेसा की जिंदगी में कैसे आया बदलाव ? | How did Mother Teresa's life change?


मदर टेरेसा भगवान यीशु पर पूर्ण विश्वास करती थी और उनकी पप्रार्थना में लगी रहती थी। 1946 में ये कथन मदर टेरेसा के हैं उन्होंने कहा कि जब वह वेस्ट बंगाल के दार्जलिंग में किसी काम के लिए जा रही थी तो उन्हें साक्षात् यीशु के दर्शन हुए और उन्होंने भगवान से बात की, बह्वन यीशु ने उनसे कहा कि आप अपना जीवन आगरा पढ़ाई की वजाये गरीब लोगों में लगाएं तो अच्छा रहेगा। इस घटना ने उनकी जिंदगी में बदलाव लाया और वह भारत के गरीब लोगों की सेवा में लग गई। उन्होंने निष्पक्ष रूप से लोगों की सहायता की और भगवान् यीशु के बताये हुए कामों का पालन किया।


गरीब लोगों की सेवा के लिए छोड़ा अध्यापन का काम


वैसे तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि एक अध्यापिका रहते हुए भी टेरेसा गरीब लोगों की सहायता कर रही थी। पर अध्यापन के साथ साथ उन्हें गरीबों और लाचार व्यक्तियों को समझना मुशकित था इसकिये उन्होने अध्यापन का काम छोड़ने का फैसला कर लिया। उन्होंने कान्वेंट स्कूल से इस बात की परमिस्शन मांगी की वह अध्यापन का काम छोड़ना चाहती है। स्कूल ने उन्हें परमिशन दे दी। 1948 में अध्यापन का काम छोड़ने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी में और बदलाव लाये और संतों का जीवन व्यतीत करने लगी। अब उनका एक ही मकसद था वह था गरीबों की सेवा करना।


जब मदर टेरेसा एक मेधावी स्वंयसेवक के रूप में | When Mother Teresa as a Meritorious Volunteer



टेरेसा को 1947 में भारत की नागरिकता मिला गई। अब उन्होंने अध्यापन का काम भी छोड़ दिया था। लोगों की सेवा करने के लिए उन्होंने नर्सिंग की ट्रेनिंग करने का फैसला किया वह बिहार चली गई और उन्होंने वहॉँ नर्सिंग का कोर्स किया। नर्सिंग के कोर्स के बाद वह बंगाल गई और उन्होंने अपना काम फिर से शुरू कर दिया। उन्होंने गरीब लोगों के घरों में जाकर उनके विचारों को सुना और अपने किये हुए पैसों से लोगों के बीच सामान बाँटने का काम किया।

 

उस वक्त देश गरीबी के दौर से गुजर रहा था और कोई किसी की सहायता के लिए आगे नहीं आता था। मदर टेरेसा ने लोगों के घरों में जाकर दान की राशि इकठा करना शुरू कर दिया। उस वक्त कोई राजनितिक पार्टी और कोई मिशनरी उनका साथ दे रही थी पर इसके विपरीत कुछ चर्च भी उनके मुकाबले में खड़े होकर उनसे प्रतियोगिता करने लगे थे। पर उनको पूर्ण विश्वास था की वह इस समाज सेवा में काम करती रहेगी और भगवान उनका पूर्ण साथ देंगे। हुआ भी वही उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई।




मदर टेरेसा के अंतराष्ट्रीय स्तर पर किये चैरिटी के काम | Charity work done by Mother Teresa at international level



टेरेसा ने मानवीय कामों के लिए भारत में ही काम नहीं किये पर इसके इलावा बहार के देशो के लिए काम किये हम सभी जानते हैं कि इजराइल और फिलिस्तीन का आपस में वर्षो से झगड़ा चलता रहा है उन्होंने इन देशो के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य किया ताकि दोनों के शांति हो सके। उन्होंने 1982 में वहा का दौरा किया और बच्चों और वहां के लोगों की सहायता की। उन्होंने युद्ध से पीड़ित लोगों की सहायता की और लगभग 37 बच्चों को दोनों देशो के नफरत का शिकार होने से बचाया। पूरी दुनिया दो शक्तियों में बंट चुकी थी एक एक पूंजीवादी देश, और दूसरे साम्यवादी देश। दोनों देश अपनी शक्ति का विस्तार करना चाहते थे।



टरेसा ने 1980 के दशक में अपनी चैरिटी के काम को आगे बढ़ाते हुए साम्यवादी देशो का भी दौरा किया। उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा पर वह अपने निस्वार्थ सेवा में डटी रही। 1988 में आर्मेनिया भूकंप कौन भूल सकता है जब वहां पर 6.9 रिक्टर स्केल तीव्रता का भूकंप आया था और लोग त्राहि त्राहि कर रहे थे उस वक्त 25000 से ज्यादा लोग मरे थे उन्हों यहां का दौरा किया और लोगो की सहायता का लिए शिविर लगाए।1996 तक टेरेसाने लगभग 100 देशो में अपने मानवीय कार्यों का विस्तार कर लिया था और अब हजारों देशों में उनकी चैरिटी ट्रस्ट खोले गए थे। कुल मिलाकर उनके अंतराष्ट्रीय स्तर की बात करें तो जितना बतायें काम है।




मिसनरीज ऑफ़ चैरिटी और मदर टेरेसा | Missionaries of Charity and Mother Teresa


मिसनरीज ऑफ़ चैरिटी नामक संसथान की स्थापना मदर टेरेसा ने 1950 में की थी। इसे अब "कैथोलिक चर्च" चर्च के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने उस वक्त इस संस्था की स्थापना गरीब और किसी भी त्रासदी से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए किया था। इस वक्त इस संस्था में लगभग 5200 नर्सें काम काम करती है। इस मिशनरी का काम, शरणार्थी, मानसिक रूप से बीमार, बीमार बच्चे, परित्यक्त बच्चे, कोढ़ी, एड्स से पीड़ित लोग और वृद्ध वृद्ध लोगों की सहायता करना है। इस संस्था में सभी धर्म के लोगों की निस्वार्थ सेवा की जाती है। बंगाल के लोगों, राजनीतिज्ञ, और नेताओं द्वारा भी इस संस्था में निस्वार्थ दान दिया जाता है।



मदर टरेसा पर विवाद क्या थे विवाद



वैसे तो टेरेसाने अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर ली थी, पर उन पर पहला आरोप ये लगा कि उनके मिशन में वित्तीय नियमतता नहीं है और धन का सही प्रयोग नहीं किया जाता है। भारत में धार्मिक प्रचार का बोलबाला पहले से है चाहे धर्म कोई भी हो, कुछ हिंदूवादी संगठनों ने ये भी आरोप कि टेरेसाचैरिटी के नाम पर धर्मांतरण का काम करती है। 

 

इसके इलावा ब्रिटैन के हिरचेस नामक लेखक ने उन्हें इतना तक कह डाला कि वह एक धार्मिक रूढ़िवादी और धर्म निरपेक्ष लोगो के लिए एजेंट का काम करती है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि जहां फूल हों वहां कांटे हों। विवाद होते रहते हैं और बिना क्रिटिसिज्म के कोई भी इंसान हो तरक्की का रास्ता नहीं पकड़ सकता है। टेरेसा ने बिना कोई परवाह किये सेवा की।



मदर टेरेसा मृत्यु  | Mother Teresa Death


समाज सेवी टेरेसाकई सालों से बीमार रहती थी उन्हें डॉक्टर ने दिल का और किडनी का पेशेंट बताया था। उन्हें पहली बार 1983 में भी दिल का दौरा पड़ा था। उनका इलाज भी चल रहा था। 1989 में उन्हें दूसरा दिल का दौरा पड़ा और उनके उपचार के लिए भी के जाया गया पर हालत खराब होने के बाद भी उन्होंने अपना काम जारी रखा। 1997 में उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि उन्होंने ये मह्सूस किया कि अब उन्हें चैरिटी का काम त्याग देना चाहिए। उन्होंने अपना चैरिटी ट्रस्ट का काम निर्मला जोशी पर छोड़ दिया। 5 सितम्बर 1997 को मदर टेरेसा का कलकत्ता में देहांत हो गया।


Mother Teresa biography and 10 best Quotes in Hindi | मदर टेरेसा का 10 अनमोल वचन


  • छोटी-छोटी बातों में विश्वास रखना सीखें क्योंकि इन्हीं में ही आपकी शक्ति निहित है।
  • आप जहां भी जाएं प्यार फैलाएं, किसी को भी खुश किए बिना कभी भी आपके पास न आने दें।
  • हम खुद महसूस करते हैं कि हम जो कर रहे हैं वह समुद्र की एक बूंद मात्र है। लेकिन उस लापता बूंद के कारण सागर कम होगा।
  • प्रेम की भूख को दूर करना रोटी की भूख से कहीं अधिक कठिन है।
  • इंसान से तब तक प्यार करो जब उसके अंदर विरोधावास न हो।
  • अगर प्रेम अपने आप में रहता है तो इसका कोई अर्थ नहीं, प्रेम को कर्म करना ही पड़ता है, और वह कर्म ही सेवा है।
  • हमें ईश्वर को खोजने की जरूरत है, और वह शोर और बेचैनी में नहीं पाया जा सकता है। ईश्वर मौन के मित्र हैं। देखिए कैसे प्रकृति-पेड़, फूल, घास- मौन में बढ़ती है; सितारों, चंद्रमा और सूर्य को देखें, वे कैसे मौन में चलते हैं। हमें मौन की आवश्यकता है ताकि हम आत्माओं को स्पर्श कर सकें।
  • प्रेम संदेश को आपस में बाटें, प्रेम एक दीपक की तरह है इस दीपक को कभी बुझने न दें इस दीपक में सन्देश रुपी तेल डालते रहें।
  • गरीब, लाचार और बीमार लोगों की सहायता ही जीवन का असली नियम है।


मदर टेरेसा अवार्ड और अचीवमेंट | Mother Teresa awards and achievements

 

क्रम संख्या

अवार्ड कब मिला

अवार्ड का व्योरा

1

1962 में

भारत सरकार ने पद्म श्री से सम्मानित किया।

2

1980 में

भारत सरकार ने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया।

3

1985 में

अमेरिका सरकार ने "मैडल ऑफ़ फ्रीडम अवार्ड" दिया।

4

1979 में

नोबल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया.

5

2003 में

पॉप जॉन पोल ने ब्लेस्ड टेरेसा ऑफ़ कलकत्ता कहकर सम्मानित किया था।






Rakesh Kumar

Rakesh Kumar From HP is interested in writing and go to the provision when where and why

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