मुंशी प्रेम चंद : जीवन परिचय , कहानियां, उपन्यास | Munshi Prem Chand Biography in Hindi

भारत एक ऐसी धरती है जहां पर अलग - अलग साहित्यकारों ने, इतिहासकारों ने और उपन्यासकारों ने जन्म लिया है। अगर हम इस सभी की बात करें तो हमें मुंशी प्रेम चंद का नाम याद आ जाता है। प्रेम चंद एक महान साहित्यकार थे जिन्होंने अपने उपन्यासों से और कहानियों से लोगो को जागृत किया।


उनकी 1906 से लेकर 1936 तक लिखियाँ कहानियां और उपन्यास आज भी भारत की विरासत बनी हुई हैं। उनकी कथाओं और उपन्यासों में सीधे तौर से का स्वच्छ समाज का चित्रण मिलता है। आज "हिंदी पुकार" में  हम मुंशी प्रेम चंद की जीवन परिचय, उमके जन्म, परिवार, शिक्षा, उनके उपन्यासों और उनके सम्पूर्ण जीवन पर नजर डालेंगे।

 

 

मुंशी प्रेम चंद : जीवन परिचय | जन्म | परिवार | शिक्षा | बचपन | शिक्षा | उपन्यास | कहानियां | मृत्यु  

 

 

 

मुंशी प्रेम चंद बायोग्राफी


 Munshi Prem Chand Biography in Hindi

 


प्रेम चंद का जन्म और पारिवारिक जिंदगी | Birth and family life of Prem Chand


 

मुंशी प्रेम चंद का जन्म हिन्दुओं की पवित्र भूमि वाराणसी जिले में हुआ था जो उत्तर प्रदेश का एक जिला है। वाराणसी जिले में उनके गांव का नाम लमही था जहां पर प्रेम चंद ने जन्म लिया। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को तब हुआ जब देश को एक साहित्कार की जरूरत थी। उनका परिवार एक हिन्दू परिवार था जिसका संबंध कायस्थ परिवार में हुआ था।

 

कायस्थ परिवार उस समय हिन्दू धर्म में वह वर्ण था जिसमें दोनों क्षत्रिय और ब्राह्मण वर्ग के लोग होते थे। वक्त कायस्थ लोगों का काम प्रशाशनिक काम देखना होता था इसलिए उनके दादा जी गुर सहाय राय व्यवसाय से एक पटवारी थे। उनके पिता जी का नाम अजायब राय था जो लमही में ही में एक पोस्टमॉस्टर का काम करते थे।



प्रेम चंद की माता जी का नाम आनंदी देवी था जो उत्तर प्रदेश के करोनि गांव की रहने वाली थी। प्रेम चंद को छोड़कर उनके दो और भाई बहन थे जिनका बचपन में देहांत हो गया था।


 

 

 प्रेम चन्द की विवाहित जिंदगी | Married Life of Munsi Prem Chand ji


 

 

ऐसा माना जाता है कि मुंशी प्रेम चंद ने अपने जीवन में दो शादियां की थी। पहली शादी उनके दादा जी की मर्जी से हुई थी। उनकी पहली शादी तब हुई थी जब वे नौवीं जमात या कक्षा में पढ़ते थे। अर्थात अगर उनकी पहली शादी की बात करें तो उनकी पहली शादी 1895 में हुई थी। पर इस शादी को हम एक खुशहाल विवाह नहीं माना गया था इसके पीछे उनका कोई अपना परिवारिक कारण माना गया था। ऐसा माना जाता है की वह प्रेम चंद से उम्र में जयदा बड़ी थी और आर्थिक दृष्टि से भी प्रेम चन्द से ज्यादा मजबूत थी।



एक बार जब नाराज होकर उनकी पहली पत्नी घर चली गई तो उसके बाद प्रेम चंद जी ने उन्हें कभी भी नहीं बुलाया। प्रेम चंद की पहली पत्नी के साथ कोई भी बच्चा नहीं था। प्रेम चंद ने 26 साल की उम्र में फिर से दूसरी शादी करने का फैसला किया और एक विधवा लड़की से शादी कर ली जिसका नाम शिवरानी देवी था। हिन्दू धर्म में ऐसा माना जाता था की विधवा के साथ शादी करना समाजिक बुराई है पर उन्होंने इसकी परवाह किये बिना शिवरानी देवी से शादी कर ली।



इसके बाद उनका विवाहित जीवन अच्छा बिता और उन्हें दो बेटे हुए जिनका नाम अमृत राय और श्रीपथ राय था। उन्हें एक बेटी भी हुई थी जिसका नाम कमला देवी है।


 

 

 

प्रेम चन्द के दुखद बचपन का वृतांत | Story of Prem Chand's Tragic Childhood


 

वैसे तो कोई भी इंसान ऐसा नहीं होता है जिसे दुखों का सामना नहीं करना पड़ता है पर प्रेम चंद जी का बचपन बड़ा ही संघर्षमय और कठिनाइयों वाला रहा। जब वे मात्र सात साल के थे तो उनके सिर से मां का साया उठ गया और उन्हें एक मां के वगेर जीवन वसर करना पड़ा। जब वे पंद्रह साल के थे तो उनके पिता जी ने अपने कार्यभार को कम करने के लिए, उनकी शादी कर दी। घर में बड़े होने के नाते अब उन्हें ही सभी कार्य देखने पड़ते थे।



कुछ दिनों बाद उनकी पत्नी भी उन्हें छोड़कर चली गई और एक साल बाद ही उनके पिता का देहांत तब हो गया जब वे सोलह वर्ष के थे। जब उनकी माता जी का देहांत हुआ था तो उनके पिता जो पेशे से एक पोस्ट ऑफिस में क्लर्क थे ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में अपना तबादला करवा लिया। तबादले के बाद उन्होंने दूसरी शादी पर ली।

 

अब प्रेम चंद की जिंदगी में और दुखों की झड़ी लग गई। क्योकि सौतेली माता क्या कभी किसी को चाहती है ,बस वहीँ से उनकी जिंदगी के संघर्ष का आरम्भ हुआ पर प्रेम चंद जी ने हिम्मत नहीं हारी और जिंदगी के साथ लड़ते रहे।


 

 

 कैसे पड़ा था मुंशी प्रेम चंद का नाम "प्रेम चंद" | How Munshi Prem Chand was named "Prem Chand"


 

मुंशी प्रेम चंद का नाम पहले नवाबराय था। उन्होंने "सोज़े वतन" नामक एक उर्दू में एक उपन्यास लिखा था। इस उपन्यास का प्रेम चंद ने विमोचन 1908 में किया था। आपको बता दें की "सोज़े वतन" उर्दू का शब्द है जिसका अर्थ होता है "सरकार में मातम" और इस कहानी संग्रह में वतन के लिए कहानियां लिखी गई थी पर इस कहानी संग्रह के कारण उन्हें उन्हें उत्तर प्रदेश के जिला कलेक्टर से कोप भाजन का सामना करना पड़ा।

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर कलेक्टर ने उनकी सारी प्रतियां जब्त करने के आदेश दिए थे। इसके बाद ही उन्होंने अपना नाम बदल लिया और अपना नाम नवाबराय से प्रेम चंद रख लिया।


 

 

मुंशी प्रेमचंद कितने पढ़े लिखे थे ? | Education of Munshi Premchand


 


प्रेम चंद किस शिक्षा का सफर उनक गांव से आरम्भ हुआ था उन्होंने अपने गाओं लमही में अपनी प्रारंभिक शिक्षा का आरम्भ किया था। उस वक्त पढ़ाई मदर से में हुआ करती थी इसलिए उन्होंने बचपन में सात साल की उम्र में अपने ही गांव से अंग्रेजी भाषा उर्दू भाषा और हिंदी भाषा का ज्ञान प्राप्त किया था। बचपन में उनका साथ कुदरत ने नहीं दिया और माता पिता का साया जब सर से उठ गया तो उन्होंने आगे की पढ़ाई अपने प्रयासों से पूरी की।



उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई को पूरा करने के लिए बनारस विश्व विद्यालय में दाखिला लिया और स्नातक की डिग्री हासिल की। उनका जो स्नातक की डिग्री का सफर था उसके लिए उन्हें बीच में मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा पर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की रो एक महान कहानीकार के रूप में सामने आये। 1919 में उन्होंने अपनी पढ़ाई का सफर लगभग तये कर लिया था।




प्रेम चन्द का साहित्यक जीवन या करियर | Literary life or career of Prem Chand



मुंशी प्रेम चंद उर्दू और हिंदी दोनों में कहानियां और उपन्यास लिखते थे। 1906 से लेकर 1918 तक उन्होंने वे उपन्यास और कहानियां लिखी जिसमें समाज का का चित्रण मिलता है और इसमें उन्होंने स्वाधीनता, स्वतंत्रता और प्रगतिवाद को अपना विषय सूचि बनाया। उसके बाद उन्होंने 1918 से लेकर 1936 तक यथार्थवाद और आदर्शवाद को अपना विषय सूचि बनाया। तो हम अगर साहित्य में 1906 से लेकर 1938 तक की बात करें तो इसे "मुंशी प्रेम चंद" का युग भी कहा जा सकता है। 

 

 

वैसे तो उन्होंने 1901 में कहानियां लिखना शुरू कर दिया था था पर किन्ही कारणों से उनका लेखन प्रकाशित नहीं हुआ। उन्होंने जो पहला उपन्यास लिखा था उसका नाम "असरारे मआबिद" था और यह उर्दू भाषा में लिखा गया था। प्रेमचुंद का यह उपन्यास प्रथम बार 1903 से वर्फ 1905 तक िनारस के साप्ताहहक उददफ पत्रआवाज--खल्कमें धारावाहिक रूप में प्रकाशित किया गया था। इसके बाद उन्होंने असरारे मआबिद और हमखुरामा उपन्यास भी उर्दू में लिखे थे। उन्होंने कुल पंद्रह उपन्यास लिखे थे जिन्हे प्रकाशित किया गया था जिन्हे नीचे दिया गया है।




प्रेम चंद के प्रमुख उपन्यासों की सूची | List of major novels of Prem Chand


  • उपन्यास का नाम -------  प्रकाशित होने वाला साल 

  • "ककशना" उपन्यास कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1907 ईस्वी में प्रकाशित हुआ।
  • "रूठी रानी उपन्यास" कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1907 ईसवी में प्रकाशित हुआ।
  • "वरदान उपन्यास" कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1912 ईसवी में प्रकाशित हुआ।
  • "सेवासदन उपन्यास" कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1918 ईसवी में प्रकाशित हुआ।
  • "प्रेमाश्रम उपन्यास" कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1921 ईसवी में प्रकाशित हुआ।
  • "रुंगभदशम उपन्यास" कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1925 ईसवी में प्रकाशित हुआ।
  • "कायाकल्प उपन्यास" कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1926 ईसवी में प्रकाशित हुआ।
  • "ननमफला उपन्यास" कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1926 ईसवी में प्रकाशित हुआ।
  • "प्रनतज्ञा उपन्यास" कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1927 ईसवी में प्रकाशित हुआ।
  • "गिन उपन्यास" कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1931 ईसवी में प्रकाशित हुआ।
  • "कमफभदशम उपन्यास" कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1932 ईसवी में प्रकाशित हुआ।
  • "गोदान उपन्यास" कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1936 ईसवी में प्रकाशित हुआ।
  • "मुंगलसदत्र उपन्यास" कब प्रकाशित हुआ ? ---- 1948 ईसवी में प्रकाशित हुआ।



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प्रेम चंद उपन्यास ही नहीं लिखते थे पर इसके साथ कहानियों का संग्रह भी करते थे उन्होंने अपनी पहली कहनी संग्रह 1905 में किया जब उन्होंने एक पत्रिका के लिए लेख लिखा था। उन्होंने कहानियां पढ़ना और तो बचपन से ही शुरू कर दिया था। उन्होंने बचपन से ही अपनी आर्थिक दशा को सुधारने के लिए एक पुराणी किताबों पर काम करना शुरू किया था इसलिए उन्हें कहानी पढ़ने का शोक उत्पन हुआ। उनके द्वारा लिखी गई कहानियां सरल होती थी। 

 

कुल 18 से भी ज्यादा उपन्यासों और 300 से भी ज्यादा कहानियों और लघु कहानियों में उन्होंने बिलकुल सरल भाषा का प्रयोग किया था। उनकी कहनियों में समाज के उत्थान का एक स्पस्ट चित्रण होता था। प्रेम चंद द्वारा लिखी गई कहानियां निम्नलखित हैं।


 

मुंशी प्रेम चंद द्वारा लिखी गई कुछ कहानियों सर्वश्रेष्ठ के नाम | Name of some stories written by Munshi Prem Chand


1

माधवी

75

नेउर

2

मॉँ

76

वासना की कड़ियॉँ

3

तांगेवाले की बड़

77

अपनी करनी

4

बडे भाई साहब

78

स्त्री और पुरुष

5

मोटेराम जी शास्त्री

79

शूद्र

7

सखियाँ

80

निर्वासन

8

नशा

81

लैला

9

कवच

82

एकता का सम्बन्ध पुष्ट होता है

10

नये पड़ोसियों से मेल-जोल

83

इज्जत का खून

11

सभ्यता का रहस्य

84

घमण्ड का पुतला

12

स्‍वामिनी

85

तेंतर

13

दूसरी शादी

86

देवी

14

ईर्ष्या

87

होली की छुट्टी

15

विदाई

88

आल्हा

16

शांति

89

सिर्फ एक आवाज

17

नमक का दारोगा

90

नेकी

18

विजय

91

बॉँका जमींदार

19

कौशल

92

अनाथ लड़की

20

नरक का मार्ग

93

कर्मों का फल

21

दो बैलों की कथा

94

शांति

22

पूस की रात

95

बैक का दिवाला

23

पंच- परमेश्वर

96

शंखनाद

24

धिक्कार

97

नाग पूजा

25

एक आंच की कसर

98

कफ़न

26

नैराश्य लीला

99

आधार

27

उद्धार

100

मुबारक बीमारी

28

वफ़ा का खंजर

101

नैराश्य

29

माता का ह्रदय

102

परीक्षा

30

कर्तव्य और प्रेम का संघर्ष

103

पुत्र-प्रेम

31

ममता

104

गैरत की कटार

32

धिक्‍कार

105

स्वर्ग की देवी

33

बंद दरवाजा

106

राष्ट्र का सेवक

34

मिलाप

107

वैराग्य

35

मनावन

108

काशी में आगमन

36

अंधेर

109

बेटों वाली विधवा

37

दु:ख-दशा

110

शादी की वजह

38

इस्तीफा

111

डिप्टी श्यामाचरण

39

स्वांग

112

दण्ड

40

आखिरी मंजिल

113

शिष्ट-जीवन के दृश्य

41

वरदान

114

नादान दोस्त

42

पर्वत-यात्रा

115

अमृत

43

निष्ठुरता और प्रेम

116

विश्वास

44

सांसारिक प्रेम और देशप्रेम

117

बड़े बाबू

45

प्रतापचन्द्र और कमलाचरण

118

प्रतिशोध

56

कप्तान साहब

119

मन का प्राबल्य

47

तिरसूल

120

अलग्योझा

48

विक्रमादित्य का तेगा

121

मंदिर और मस्जिद

49

नसीहतों का दफ्तर

122

क़ातिल

50

राजहठ

123

विदुषी वृजरानी

51

त्रियाचरित्र

124

ईदगाह

52

मतवाली योगिनी

125

प्रेम-सूत्र

53

समस्या

126

प्रेम का स्वप्न

54

ठाकुर का कुआं

127

खुदी

55

सौत

128

सैलानी बंदर

56

सुशीला की मृत्यु

129

नब़ी का नीति-निर्वाह

57

दो सखियां

130

आख़िरी तोहफ़ा

58

पैपुजी

131

ईश्वरीय न्याय

59

कमलाचरण के मित्र

132

शेख मखगूर

60

आत्म-संगीत

133

स्नेह पर कर्त्तव्य की विजय

61

गुल्ली-डंडा

134

मंत्र

62

क्रिकेट मैच

135

बोहनी

63

कायापलट

136

आत्माराम

64

एक्ट्रेस

137

बड़ें घर की बेटी

65

बुढ़ी काकी

138

जेल

66

देवी

139

पत्नी से पति

67

विरजन की विदा

140

शराब की दूकान

68

सोहाग का शव

141

जुलूस

69

झांकी

142

मैकूसमर- यात्रा

70

ज्योति

143

दुर्गा का मन्दिर

71

कोई दुख न हो तो बकरी खरीद ला

144

शोक का पुरस्कार

72

भ्रम

145

कमला के नाम विरजन के पत्र

73

प्रायश्चित

146

दुनिया का सबसे अनमोल रतन

74

दिल की रानी




 

मुंशी प्रेम चंद का देहांत | Death of Munshi Prem Chand

 

अपने महान उपन्यासों से और अपनी कहानियों से मुंशी प्रेम चंद ने भारत के समाज को जागृत किया था। आठ अक्टूबर 1936 में मुंशी प्रेम चंद का देहांत हो गया। उनकी कहानियां और उपन्यास आज भी जिन्दा हैं जो सभी लोगों को एक मर्गदर्शक के रूप में काम करते हैं।


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Rakesh Kumar

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