आइज़क न्यूटन बायोग्राफी इन हिंदी:-
सर आइज़ैक न्यूटन वैज्ञानिक दुनिया में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति थे। उन्होंने वैज्ञानिक दुनिया में अपना नाम कमाते हुए गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत जैसे को विकसित किया। एक किसान के बेटे होते हुए उन्होंने मुश्किलों का सामना करते हुए कामयाबी के शिखर को छुया। कहते हैं हिम्मत करे बंदा तो मदद करे खुदा। उन्होंने अपने जीवन में बहुत हिम्मत दिखाई। आइये जानते हैं सर आइज़ैक न्यूटन के जीवन, शिक्षा, परिवारिक जिंदगी उनकी खोज और इतिहास के बारे में।
आइज़क न्यूटन का जीवन परिचय :-
- न्यूटन ला जन्म स्थान -- Caldwell County, Kentucky जर्मनी (कैल्डवेल काउंटी, केंटकी)
- जन्म तारीख -- 4 जनवरी 1643
- पिता का नाम -- सर आइजेक न्यूटन
- माता का नाम -- हन्ना ऐस्क्फ़
- व्यवसाय -- वैज्ञानिक, लेखक
- मृत्यु की तारीख -- 20 मार्च 1727
- मृत्यु का स्थान -- इंग्लैंड
आइज़क न्यूटन का जन्म और परिवार (Isaac Newton's Birth and
Family)
आइज़क न्यूटन का जन्म जर्मनी के कोलस्तेरवर्थ लिंकनशायर में वूलस्थ्रोप मेनर नामक स्थान पर 4 जनवरी 1643 को हुआ था। न्यूटन का जन्म जब हुआ उससे पहले उनके पिता की मृत्यु हो गई थी अर्थात न्यूटन का जब जन्म हुआ उससे तीन महीने पहले उनके पिता जी का देहांत हो चूका था। उनके पिता जी का नाम भी आइज़क न्यूटन था।
वे पेशे से एक किसान थे और खेतीबाड़ी से अपना काम और घर का खर्चा चलाते थे। न्यूटन की माता जी का नाम हन्ना ऐस्क्फ़ था जो न्यूटन से बहुत प्यार करती थी। जब न्यूटन तीन साल के हुए तो उनकी माता जी हन्ना ऐस्क्फ़ ने दूसरी शादी करने का फैसला किया और रेवरंड बर्नाबुस स्मिथ नामक से दूसरी शादी कर ली। उसके बाद न्यूटन की देखभाल उनकी नानी जी ने की जिसका नाम मर्गेरी ऐस्क्फ़ था। दूसरी शादी के बाद न्यूटन अपने नए पिता और अपनी मां से बहुत नफरत करने लगा।
न्यूटन की शिक्षा का सफर (Newton's journey
of education)
न्यूटन की प्रारंभिक शिक्षा उनके गाँव वूलस्थ्रोप मेनर से शुरू हुई थी। उनकी माता जी उन्हें एक सफल किसान बनाना चाहती थी पर न्यूटन खेती नहीं करना चाहते थे और कुछ नया करके नाम कमाना चाहते थे। उनकी माता ने उन्होंने दी किंग्स स्कूल, ग्रान्थम में दाखिल लरवा करवा दिया। अपनी पढ़ाई करने के लिए वे एक फार्मासिस्ट के घर में रहते थे जिनका नाम क्लार्क था। जब वे 12 साल के थे तब तक उन्होंने इंग्लैंड के ग्रंथम में ही शिक्षा ग्रहण की।
अक्टूबर 1659 में उन्होंने अपने पैतृक गांव वूल्स्थोर्पे-बाय-कोल्स्तेर्वोर्थ
आने का फैसला किया। इससे पहले वे अपनी नानी के साथ रहते थे। अपने पैतृक गांव पहुंचने के बाद उनकी पढ़ाई से रूचि काम हो गई इसके पीछे ये कारण था कि उनकी माता जो दूसरी बार विधवा हो चुकी थी ये सोचती थी कि न्यूटन घर का खर्चा चलाने के लिए खेतीबाड़ी का काम करे। पर किंग्स स्कूल के मास्टर हेनरी स्टोक्स ने उनकी माँ को यह परामर्श दिया कि वे उनको आगे पढाये न्यूटन की माता ने उनका परामर्श मान लिया और उन्हें दुबारा स्कूल भेज दिया।
अपनी बुनियादी शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने 19 साल की आयु में इंग्लैण्ड के ट्रिनिटी कॉलेज में दाखिला लिया। 1661 में इंग्लैंड का जो पाठ्यक्रम था वह ज्यादातर अरस्तु पर आधारित था और उन्ही की शिक्षा को पढ़ाया जाता था। पर न्यूटन आधुनिक दार्शनिकों के विचारों में ज्यादा रूचि रखते थे।
उन्होंने 1665 में स्नातक की डिग्री हासिल की और उसके बाद आगे की पढ़ाई को भी जारी रखने का प्रयास किया पर उस वक्त इंग्लैंड में भयानक बीमारी प्लेग ने जकड़ लिया जिससे उन्हें आगे की पढ़ाई रोकनी पड़ी। कॉलेज के समय उनकी रूचि गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश के अध्ययन पर ज्यादा थी उन्ही में महारत हासिल करना चाहते थे। 1668 में उन्होंने मास्टर डिग्री हासिल की और गणित के प्रोफेसर के रूप में काम भी किया।
न्यूटन का करियर (Newton's career)
न्यूटन का प्रकाशिकी में प्रयोग (Newton's experiment in
optics)
न्यूटन का प्रकाशिकी में प्रयोग 17 वीं शताब्दी में आइज़क न्यूटन द्वारा दिया गया था। 1670 से 1672 तक न्यूटन न्र इस विषय पर गहरा अध्ययन किया। उन्होंने प्रकाश में जो अपवर्तक गुण होते हैं उसका गहन अध्ययन किया और प्रकाश की प्रभावशीलता की खोज की। सबसे पहले उन्होंने एक यंत्र की खोज की या निर्माण किया।
उस यंत्र में लेंस को फिक्स लिया। इस उपकरण दुआरा उनके द्वारा ये सिद्ध किया गया कि लेंस के बीच में जब प्रकाश को गुजारा जाता है तो ये इस लेंस से हम दूर की चीजों को आसानी से देख सकते हैं। इसके साथ उन्होंने प्रकाश के गुणों और Nature क्र बारे में ये भी बताया कि "श्वेत प्रकाश कई रंगों के प्रकाश का मिश्रण होता है।
" न्यूटन से प्रकाश की जिस रंगीन प्रवृति की खोज की उसे वैज्ञानिकों ने "प्रकाश के रंगीन सिद्धांत" के नाम से प्रचलित किया। 1704 में उन्होंने प्रकाश के और द्रव्य के गुणो की विशेषता बताई और ये सिद्ध किया कि प्रकाश अतिसूक्ष्म कणों मिश्रण से बना होता है और द्रव्य साधारण कणों से बना होता है।
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न्यूटन का यूनिवर्स गुरुत्वाकर्षण का नियम (Newton's Universe Law of
Gravitation)
न्यूटन का यूनिवर्स गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत को पूरी तरह से प्रयोग में लाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे एडमंड हेली ने इस काम के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया और उन्हें वित्तीय सहायता की ताकि वे इस काम को अंजाम दे सकें। न्यूटन के सिद्धांत की खोज कैसे हुई ?
एक दिन न्यूटन एक सेब के पेड़ के नीचे बैठे थे और अचानक ऊपर से सेब फल गिरा उनके दिमाग में ये बात आने लगी कि ये सेब ऊपर से नीचे किउं गिरा ऊपर किउं नहीं जा रहा। इसी घटना को अपने जीवन से और अपनी खोज से जोड़ लिया और ये निक्ष्चय किया कि वे इस बात को जरूर सिद्ध करेंगे। उसके बाद उन्होंने न्यूटन के तीन नियम बताये। जिन्हें न्यूटन के सिद्धांत से जाना जाने लगा ये सिद्धांत यूनिवर्स के गुरुत्वाकर्षण पर आधारित थे।
न्यूटन के सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण के नियम को आमतौर पर कहा जाता है कि प्रत्येक कण ब्रह्मांड में हर दूसरे कण को एक बल के साथ आकर्षित करता है जो उनके द्रव्यमान के उत्पाद के सीधे आनुपातिक होता है। और उनके केंद्रों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। सिद्धांत के प्रकाशन को "प्रथम महान एकीकरण" के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यह ज्ञात खगोलीय व्यवहारों के साथ पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण
के पहले वर्णित घटनाओं के एकीकरण को चिह्नित करता है।
यह एक सामान्य भौतिक नियम है जिसे आइज़ैक न्यूटन द्वारा आगमनात्मक तर्क के अनुभवजन्य अवलोकनों से प्राप्त किया गया है। यह शास्त्रीय यांत्रिकी द्वारा किया गया और न्यूटन के काम फिलॉसफी नेचुरलिस प्रिंसिपिया मैथमैटिका में तैयार किया गया था। और पहली बार 5 जुलाई 1687 को प्रकाशित किया गया था। ये सब उसी का परिणाम था जब न्यूटन ने अप्रैल 1686 में प्रकाशित पाठ की पुस्तक को पढ़ा था।
न्यूटन के गति के तीन नियम किसी भी बॉडी (Body) पर कार्य करने वाली शक्तियों और उस बॉडी की गति के बीच संबंधों का वर्णन करते हैं। आइये जानते हैं क्या हैं तीन न्यूटन के नियम।
न्यूटन का पहला नियम या खोज *Newton's first law or discovery)
न्यूटन के पहले नियम में कहा गया है कि यदि कोई भी वस्तु अगर स्थिर अवस्था में पड़ी हुई है या फिर उसकी स्थिति सीधी रेखा में पड़ी हुई तो वह अपनी स्थिति में ही में रहेगी जब तक उसे बल से या फाॅर्स से विचलित न किया जाये। शास्त्रीय न्यूटनियन यांत्रिकी में, एक सीधी रेखा में विराम और एकसमान गति के बीच कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं है; उन्हें अलग-अलग पर्यवेक्षकों द्वारा देखी गई गति की एक ही स्थिति के रूप में माना जा सकता है। गति एक कण के समान वेग से चलती है और दूसरी कण के संबंध में स्थिर वेग से चलती है। इस अभिधारणा को जड़त्व के नियम के रूप में जाना जाता है।
न्यूटन का दूसरा नियम या खोज (Newton's second law or
discovery)
न्यूटन का दूसरा नियम उन परिवर्तनों का मात्रात्मक विवरण है जो एक शरीर की गति पर एक बल उत्पन्न कर सकता है। यह नियम ये बताता है कि किसी पिंड या बॉडी की गति के परिवर्तन की समय दर उस पर लगाए गए बल के परिमाण और दिशा दोनों के बराबर है। किसी पिंड का संवेग उसके द्रव्यमान और वेग के गुणनफल के बराबर होता है। किसी पिंड पर लगाया गया बल संवेग के परिमाण या उसकी दिशा या दोनों को बदल सकता है।
न्यूटन का दूसरा नियम सभी भौतिकी में सबसे महत्वपूर्ण में से एक है। यदि किसी पिंड पर एक शुद्ध बल कार्य कर रहा है तो यह समीकरण के अनुसार त्वरित होता है। इसके विपरीत यदि किसी पिंड को त्वरित नहीं किया जाता है तो उस पर कोई शुद्ध बल कार्य नहीं करता है।
न्यूटन का तीसरा नियम या खोज (Newton's third law or discovery)
न्यूटन के तीसरे नियम में कहा गया है कि जब दो शरीर परस्पर क्रिया करते हैं तो वे एक दूसरे पर बल लगाते हैं जिसका परिमाण तो बराबर होता पर दिशा उनके विपरीत होती है। न्यूटन के तीसरे नियम को क्रिया और प्रतिक्रिया के नियम के रूप में भी जाना जाता है। इस सिद्धांत में न्यूटन ने जिस शक्ति का वर्णन किया है वह शक्ति वास्तविक है।
इस सिद्धांत में उन्होंने उपकरण को दरकिनार किया हुआ है। उनके इस तीसरे नियम को एक उदाहरण से समझा जा सकता है मान लो एक मोबाइल मेज पर रखा हुआ है तो मोबाइल ने जो जगह घेरि हुई है वह मोबाइल मेज के विपरीत दिशा में बल लगाता है अगर मेज हटा लिया जाये तो निश्चय ही मोबाइल नीचे गिर जायेगा।
न्यूटन से जुड़े कुछ अनसुने दिलचस्प किस्से (Some unheard interesting facts related to Newton)
- 1687 में में न्यूटन की एक किताब प्रकाशित हुई जिसका नाम "फिलोसोफी नेचुरेलिस प्रिन्सिपिया मेथेमेटिका" था। इंग्लैंड के इतिहास में इस पुस्तक ने बहुत ख्याति प्राप्त की।
- न्यूटन ने ने ये भी माना था कि पृथ्वी पर वस्तुओं की गति और आकाशीय पिंडों की गति का नियंत्रण प्राकृतिक नियमों के के कारण होता है इसलिए वे नास्तिक नहीं थे और कहीं न कहीं भगवान के अस्तित्व को भी मानते थे।
- उन्होंने प्रिज्म के जरिये ये खोज की थी कि प्रिज्म श्वेत प्रकाश को कई रंगों में अपघटित कर देता है जो दृश्य स्पेक्ट्रम बनाते हैं।
- अवकलन और समाकलन कलन के विकास सबसे पहले श्रेय गोटफ्राइड लीबनीज को जाता है।
- 2005 में ब्रिटेन की रोयल सोसाइटी ने इंग्लैंड में विज्ञानकों का एक सर्वेक्षण किया था जिसमे ये माना गया था कि न्यूटन द्वारा दिया गया सिद्धांत सबसे प्रभावी है।
- इसे भी आप नहीं जानते होंगे कि न्यूटन अपने कलन के सिद्धांत को उजागर नहीं करना चाहते थे किउंकि उन्हें इस बात का डर था कि अगर वह कामयाब नहीं हुआ तो उन्हें उपहास का सामना करना पड़ेगा।
- न्यूटन के सिद्धांत को बहुत ज्यादा प्रोत्साहित करने वाले उनके करीबी दोस्त निकोलस फतियो डे दुइलिअर थे जिन्होंने न्यूटन का साथ दिया।
- न्यूटन के सिद्धांत को लेकर एक विवाद शुरू हुआ था जिसे "न्यूटन बनाम लीबनीज विवाद" के नाम से जाना जाता है। ये विवाद इस प्रकार था कि न्यूटन पर ये आरोप लगा था कि उन्होंने अपने सिद्धांत को लीबनीज के सिद्धांत के नए रूप में प्रकाशित किया है ये विवाद लीबनीज की मृत्यु 1716 तक चला।
- न्यूटन ने अविष्कारों के साथ धर्म पर भी अपनी आस्था दिखाई थी और साहित्य में भी अपनी रूचि दिखाई थी।
- न्यूटन की ख्याति के कारन उहने 1701 में संसद का सदस्य भी चुना गया था।
- न्यूटन ने अपनी खोज एक सेब के गिरने से शुरू की थी और उनकी मौत के बाद आज भी इंग्लैंड ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में उनकी मूर्ति सेब के साथ विराजमान है।
न्यूटन की मृत्यु (Isaac Newton Death)
न्यूटन की मृत्यु 20 मार्च 1727 में हुई। वे एक विज्ञानी होने के साथ साथ एक अच्छे लेखक भी थे। ऐसा माना जाता है की जब उनकी मृत्यु हुई थी तब वे कुआंरे थे अर्थात मृत्यु लटक न्यूटन ने कोई भी शादी नहीं की थी। उनकी मृत्यु इंग्लैण्ड के किंग्गग्म में हुई थी।
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