सामाजिक परिवर्तन के परिणाम | samajik privartan ke prinaam | Consequences of social change in Hindi

सामाजिक परिवर्तन के क्या परिणाम हैं ?

परिवर्तन किसी भी में बहुत जरुरी है एक सुखी लकड़ी होती है उसमें में परिवर्तन आता है वह लकड़ी या तो बालन के काम आती या फिर फर्नीचर बनकर घर की सोभा बढाती है कहने का अर्थ यह है मनुष्य से समाज बनता है समाज में परिवर्तन के कुछ नियम मनुष्य द्वारा निर्धारित किये जाते हैं। 

अर्थात सामाजिक परिवर्तन के वगेर समाज में विकास होना मुश्किल हो जाता है। पर जब भी किसी भी वस्तु में परिवर्तन आता है तो उसके कुछ परिणाम भी सामने आते हैं। आइये जानने की कोशिश करते है सामाजिक परिवर्तन के कारण क्या परिणाम सामने आ सकते हैं।

1. समाजिक परिवर्तन के कारण समाज के सकारात्मक और नकारातमक पहलु सामने आते हैं :- 

आदि काल से हमारा इतिहास कहता है कि मनुष्य ने अपना बर्चस्व जमाने के लिए समाज आगे बढ़ने की सोच का विकास किया है। तरक्की चाहे आर्थिक हो, समाजिक हो या फिर सांस्कृतिक मनुष्य ने समाज में आगे बढ़ने के लिए मनुष्य को ही टारगेट किया है। 

जब सामाजिक परिवर्तन होता है तो इसके ये परिणाम निकलते हैं कि इसके दोनों पहलु नकारात्मक और सकारात्मक पहलु नजर आते हैं। सकारात्मक पहलु समाज में विकास लाते हैं पर नकारात्मक पहलु समाज में परिवर्तन तो लाते हैं पर ऐसा परिवर्तन समाज को विनाश की और भी ले जा सकता है। अगर मान लो समाज में युद्ध की दशा बनती है या Flood की हालात में कोई एक दूसरे की मदद नहीं करता है तो यह सामाजिक परिवर्तन का नकारात्मक पहलु नजर आता है।

2. नाकारात्मक आधुनिकीकरण का प्रचलन :- 

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि सामाजिक परिवर्तन के कारण मानव समाज में आधुनिकीकरण हुआ है पर इस परिवर्तन के कुछ ऐसे परिणाम निकल कर सामने आये हैं जो मानव समाज के लिए सही नहीं हैं। अगर आज इंटरनेट की बात करें तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इंटरनेट की दुनिया ने समाज को एक कर दिया है। 

पर इसके कुछ कुप्रभाव भी नजर आये हैं युवा वर्ग के नौजवानों की बात करें तो बिना मतलव के समय को बर्बाद किया जाता है। इसलिए समाजिक परिवर्तन में आधुनिकीकरण के कारण बदलाव तो आया है पर इसके परिणाम कहीं न कहीं गलत भी हुआ है।


3. सामाजिक परिवर्तन के शैक्षिक परिणाम :-

सामाजिक परिवर्तन की वजह शिक्षा समाज में बहुत परिवर्तन आये हैं शिक्षा समाज में परिवर्तन के कारण आज शिक्षित समाज की संकुचित सोच में विकास हुआ है। जहां पहले शिक्षा धर्म या जाति के नाम पर दी जाती थी वहीँ आजकल शिक्षा समाज में इतना परिवर्तन आया है कि शिक्षा हर धर्म या वर्ग के लोगों को इकठी एक विद्यालय या स्कुल में दी जाति है। यह परिवर्तन शिक्षा समाज का सकारात्मक पहलु है और इसके विकास के कारण समाज में भेदभाव की भावना का खात्मा हुआ है।


एक पहलू में बदलाव समाज के दूसरे हिस्से में बदलाव लाता है। प्रत्यक्ष परिवर्तन तुरंत देखा जा सकता है लेकिन समाज के अन्य हिस्सों में अप्रत्यक्ष परिणामों का अध्ययन किया जाना है। परिवर्तन की सीमा छोटी हो सकती है लेकिन उसका प्रभाव व्यापक होता है, और भविष्य में धीरे-धीरे प्रभाव डालता है। तकनीकी परिवर्तनों ने औद्योगीकरण शहरीकरण और आधुनिकीकरण के लिए एक क्षेत्र बनाया। इस तरह के बदलावों ने नई सामाजिक समस्याएं जैसे मलिन बस्तियों, आवास, ग्रामीण शहरी प्रवास को जन्म दिया। ऐसे नए परिणाम भारत में भी हैं।

ऑगबर्न बताते हैं कि भौतिक संस्कृति बदलती है जबकि अभौतिक संस्कृति धीरे-धीरे बदलती है, जिसके परिणाम सांस्कृतिक अंतराल की तरह समाज हमेशा सांस्कृतिक अंतराल की समस्याओं से निलंबित रहता है, सरल में हम हमेशा पीढ़ी के अंतराल के बारे में बात करते हैं। 1947 के बाद भारत में राजनीतिक परिवर्तन कई सामाजिक परिवर्तन लेकर आए। भारत ने लोकतंत्र को स्वीकार किया। निष्कर्ष: सभी परिवर्तन हानिकारक और अनुचित नहीं हैं। 

परिवर्तन और परिवर्तन का प्रतिरोध दोनों ही लाभप्रद और हानिकारक हैं। समाज को बदलने से पहले सतर्क रहना चाहिए। विशेष रूप से नए वैज्ञानिक आविष्कारों को अपनाने में पर्यावरण पर इसके प्रभाव का अध्ययन करने की आवश्यकता है, आधुनिक दुनिया में प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। कृत्रिम परिवर्तन को अपनाने से पहले मूल्यांकन हमेशा आवश्यक होता है। परिवर्तन सार्थक और हानिकारक है। समाज इसकी आवश्यकता पर स्वीकार या अस्वीकार करता है।

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Rakesh Kumar

Rakesh Kumar From HP is interested in writing and go to the provision when where and why

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