सामाजिक परिवर्तन की विशेषताएं और लक्षण | Features and Characteristics of Social Change in Hindi

सामाजिक परिवर्तन  विशेषताएं कौन- कौन सी हैं ?

किसी भी समाज परिवर्तन अक्सर देखने मैं आते हैं। समाज में सामाजिक परिवर्तन कहीं धीमी गति से होते हैं और कहीं सामाजिक परिवर्तन जल्दी होते हैं। 

सामाजिक परिवर्तन की कुछ विशेषताएं और लक्षण होते हैं जिनके कारण समाज में परिवर्तन आते हैं जिन्हे सामाजिक परिवर्तन कहा जाता है। आइये इस पोस्ट में जानने की कोशिश करते हैं सामाजिक परिवर्तन की विशेषताएं और लक्षण क्या होते हैं।
    
                              

सामाजिक परिवर्तन की 10 प्रमुख विशेषताएं और लक्षण


1. सामाजिक परिवर्तन एक निरंतर प्रक्रिया है :- 

आज दुनिया में कई समाज है कुछ समाज ऐसे स्वरूप बहुत बड़ा है कुछ समाज विकसित होते हैं तो कुछ समाज में विकास धीमी गति से होता है। पर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि समाज में परिवर्तन होता रहता है। किसी भी समाज में बदलाव सामाजिक परिवर्तन के कारण ही होता है। सामाजिक परिवर्तन की पहली विशेषता या लक्षण यह है कि यह एक निरन्तर प्रक्रिया है और समय के साथ सामाजिक परिवर्तन होते रहते हैं।


2. सामाजिक परिवर्तन धीमी और गतिशील प्रक्रिया है :- 

समाज में विकास होता है। बिना सामाजिक विकास के कारण किसी भी समाज का उत्थान मुश्किल हो जाता है। समाज में सामाजिक परिवर्तन धीमी गति से भी हो सकते है और सामाजिक परिवर्तन कभी -कभी तेज गति से भी होते हैं। अगर हम सांस्कृतिक समाज की बात करें तो उसमें परिवर्तन धीरे धीरे हुआ है इसके विपरीत अगर प्रद्योगिकी समाज के विकास की बार करें तो सामाजिक परिवर्तन तेज गति से गति से हुआ है।


3 . सामाजिक परिवर्तन के दो प्रकार होते हैं :- 

अगर हम सामाजिक परिवर्तन की बात करें तो समाज में सामाजिक परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं। एक सामाजिक परिवर्तन वह होता है जिसको अमूर्त कहा जाता है अर्थात इस किस्म के सामाजिक परिवर्तन को मापना असंभव होता है। इस किस्म के सामाजिक परिवर्तन को महसूस किया जा सकता है। जैसे अगर समाज के रीती रिवाज, मनोवृति या विचारों में परिवर्तन आते हैं तो उसे समाज के अभौतिक वादी और अमूर्त सामाजिक परिवर्तन कहते हैं। इसके विपरीत अगर किसी भी समाज में परिवर्तन की अगर Measurement की जा सके तो उसे हम समाज के भौतिकवादी या मूर्त सामाजिक परिवर्तन कह सकते हैं।


4. सामाजिक परिवर्तन की पहले घोषणा नहीं सकती है :- 

किसी भी समाज में सामाजिक परिवर्तन आते रहते हैं और ये परिवर्तन धीरे धीरे होते हैं इसलिए सामाजिक परिवर्तन का यह भी एक विशेषता या जरूरी लक्षण है कि इसका पूर्व अनुमान लगाना मुश्किल होता है। अक्सर देखने में आया है अगर कोई समाज में एक अच्छे सामाजिक परिवर्तन का अनुमान लगाते हैं या घोषणा करते हैं तो यह जरुरी नहीं होता वे सामाजिक परिवर्तन अच्छे हो किसी भी समाज में सामाजिक परिवर्तन विपरीत दिशा में या पक्ष में हो सकते हैं।


5. सामाजिक परिवर्तन के दो रूप चक्रीय तथा रेखीय :-

समाज शास्त्री सामाजिक परिवर्तन के दो रूप मानते हैं एक सामाजिक परिवर्तन का चक्रवात रूप और दूसरा सामाजिक परिवर्तन का रेखीय रूप। समाजिक परिवर्तन के रेखीय रूपं एक समाज में इस तरह से सामाजिक परिवर्तन आते हैं कि समाज एक चक्र में घूमता है अर्थात एक समाज समाजिक परिवर्तन इस तरह से होते हैं जहां से समाज में परिवर्तन शुरू होता है वहीँ पर फिर से आ जाता है। इसको समझने के लिए अगर भारतीय समाज के पहनावे की बात की जाये तो पुरुषों दुआरा पहले ऊपर से narrow और और नीचे से खुली पेण्ट पहनी जाती थी। 

उसके बाद narrow पेण्ट पहनने का रिवाज आया। समय के साथ पहले वाला रिवाज आ गया। दूसरी तरफ सामाजिक परिवर्तन का रेखीय रूप वह है जिसमें समाज में आशिंक परिवर्तन आते रहते हैं और जारी रहते हैं।


6 . किसी भी समाज में सामाजिक परिवर्तन जरूर आते हैं :- 

सामाजिक परिवर्तन की यही भी जरुरी विशेषता या लक्षण है की समाज में सामाजिक परिवर्तन जरूर होते हैं हाँ इन सामाजिक परिवर्तनों की दिशा और दशा में अंतर हो सकता हैं। बिना परिवर्तन के समाज स्थिर हो जाता है और उसे समाज की संज्ञा देना मुश्किल हो जाता है। हाँ ये हो सकता है कि ये सामाजिक परिवर्तन कहीं धीमी गति से होते हैं और कहीं जल्दी में होते हैं पर सामाजिक परिवर्तन जरूर होते हैं।


7 . सामाजिक परिवर्तन अनिश्चिकालीन होते हैं :- 

सामाजिक परिवर्तन की सातवीं विशेषता ये है की इसकी कोई निश्चित अवधि नहीं होती है अर्थात ये अनिश्चितकालीन होते हैं। हाँ समय के साथ सामाजिक परिवर्तनों में बदलाव जरूर आते हैं पर इन्हें निश्चित नहीं किया जा सकता है। हम ये नहीं कह सकते हैं कि इस समाज में पांच साल में ये परिवर्तन जरूर आएगा। हाँ हो सकता है परिवर्तन जो अनुमान लगाया गया है वैसा हो पर कितना होगा और जितना कोई चाहता है उतना परिवर्तन होगा इस बात का निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल होता है।


8 . सामाजिक परिवर्तन पुरे समाज पर निर्भर करता है :- 

सामाजिक परिवर्तन किसी व्यक्ति नहीं होता है पर किसी भी समाज में जब भी परिवर्तन आता है तो वह एक समाज में रहने वाले सभी व्यक्तियों का सामूहिक प्रयास होता है। सामूहिक प्रयास के वगेर सामाजिक परिवर्तन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। जब कोई व्यक्ति अपने लिए और अपने स्वार्थ के लिए काम करता है तो उसे परिवारिक समाज कहते हैं इससे पुरे समाज में बदलाव नहीं आता है।


9. कभी कभी सामाजिक परिवर्तन न्याय संगत नहीं होते :- 

समाज कानून के पालना करने की कोशिश करता है पर कभी कभी समाज में ऐसे बदलाव आते हैं कि वे एक व्यक्ति के लिए न्यायसंगत नहीं होते है अर्थात समाज में परिवर्तन किसी व्यक्ति के निजी विकास में रूकावट बन जाती हैं। परिवर्तन इस बात से शुरू होता है कि हम दूसरों के साथ कैसे और कब बातचीत करते हैं। बदलाव इस तरह से शुरू होता है। 

हमें विभिन्न दृष्टिकोणों वाले लोगों को एक साथ लाने के लिए नागरिक प्रवचन का पोषण करना चाहिए और जानबूझकर काम करना चाहिए। लोगों की सभा आयोजित करना, कक्षाओं और ऑनलाइन में छात्रों को शिक्षित करना, और सामाजिक परिवर्तन की वकालत करने में खुद को सबसे आगे रखने वाले कार्यकर्ताओं का समर्थन करना है। यह हमारे प्रत्येक संगठन द्वारा प्रदान किए जाने वाले कार्यक्रम नहीं हैं जो स्थायी परिवर्तन पैदा करते हैं, लेकिन यह विश्वास और सम्मान के संबंध हैं जो करते हैं।


10. सामाजिक परिवर्तन में संघर्ष और तरक्की की विशेषता :- 

हर किसी समाज में समाजिक परिवर्तन तभी आता है जब समाज में आपसी आगे बढ़ने की होड़ होती है। अक्सर देखा गया है कि सामाजिक परिवर्तन में एक समाज में एक वर्ग दूसरे वर्ग से आगे बढ़ना चाहता है। इससे समाज में विकास तो होता है पर कभी सामाजिक परिवर्तन ऐसा होता है कि गलत अवधारणाओं पर चलके विकास की गति को पूर्ण विराम भी लग सकता है।

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Rakesh Kumar

Rakesh Kumar From HP is interested in writing and go to the provision when where and why

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