भारत में सामाजिक परिवर्तन के लक्ष्य और उद्देश्य :-
भारत एक विशाल देश है और भारत में कई किस्म के समाज पाए जाते हैं जैसे शिक्षित समाज, अशिक्षित समाज, सांस्कृतिक समाज और कमजोर समाज और सशक्त समाज। भारत में आजादी से नहीं बल्कि आजादी से पहले सामाजिक परिवर्तन का आरम्भ हो गया था। अगर भारत में सामाजिक परिवर्तन होते हैं तो उन परिवर्तनों की कुछ न दायरा रहा होगा लम्बे समय के लिए भी और काम समय के लिए भी।अगर भारत में सामजिक परिवर्तन होते हैं या किये जाते हैं तो उनके कुछ लक्ष्य या फिर उद्देश्य होने चाहिए ताकि भारत का विकास हो सके आइये जानते हैं भारत में सामाजिक परिवर्तन के उद्देश्यों और लक्ष्यों के बारे में।
1. एक मजबूत नागरिक का निर्माण :-
1. एक मजबूत नागरिक का निर्माण :-
एक मजबूत नागरिक से ही एक मजबूत देश बनता है इसलिए अगर भारत जैसे विशाल देश में एक ऐसे नागरिक का निर्माण किया जाये जो हर पक्ष से मजबूत हो तो भारत का विकास होगा। इसलिए सामाजिक परिवर्तन का पहला और प्रमुख तथ्य यह है की अगर सामज में अगर कोई परिवर्तन किया जाये तो उसका एक ही लक्ष्य या उदेश्य होना चाहिए की एक अच्छे नागरिक का निर्माण किया जाये।
2.शिक्षा में सुधार :-
2.शिक्षा में सुधार :-
केवल शिक्षित वर्ग ही समाज के विकास के बारे में सोच सकता है इसलिए अगर समाजिक परिवर्तन को देखा जाये तो शिक्षा में सुधार करना सामाजिक परिवर्तन का जरूरी पहलु है और शिक्षित समाज का सृजन ही सामाजिक परिवर्तन का मूल लक्ष्य होना चाहिए।
3. मजबूत राजनीति का पक्षधार बनना :-
3. मजबूत राजनीति का पक्षधार बनना :-
आजादी के बाद ही हमने देखा है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद राजनीति में उलट फेर आया है। राजनीति में कुर्शी के लिए कुछ भी किया जाता है। सत्ता की भूख भारत में राजनीतिक परिवर्तन तो लाती है पर स्थिरता का आभाव रहा है। जब भी नै सरकार के लिए चुनाव होते हैं तो भारत का आर्थिक पहलु कमजोर होता है।
इसलिए अगर राजनीतिक समाज में परिवर्तन लाना है तो एक नागरिक का ये ही उदेश्य और लक्ष्य होना चाहिए कि राजनीति के मजबूत पक्ष को देखा जाये और स्थिर और कामयाब सरकार बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
4. अर्थवयवस्था में सुधार :-
4. अर्थवयवस्था में सुधार :-
अर्थव्यवस्था में सुधार और इसमें प्रगति करना किसी भी समाज के लिए बहुत जरुरी है। ये अन्य सामाजिक परिवर्तन अन्य सामाजिक परिवर्तनों से अलग है। समाज कोई भी हो उसे आर्थिक रूप से मजबूत होने की जरूरत है। अगर भारत में सभी समाज और वर्ग के लोग आर्थिक रूप से मजबूत होंगे तो निश्च्च्य ही पूरा भारत देश मजबूत होगा और अगर किसी भी समाज का आर्थिक पहलु मजबूत है तो अन्य पहलु अपने आप सुधर जाते हैं।
5. भारतीय समाज में समाजवादी पैटर्न लाने की कोशिश करना :-
5. भारतीय समाज में समाजवादी पैटर्न लाने की कोशिश करना :-
भारत में कई जाति और धर्मों के लोग रहते हैं। और भारतीय समाज में कुछ वर्ग का ऐसा समाज बना हुआ है जो आर्थिक रूप से बहुत मजबूत हैं और कुछ ऐसे भी हैं जिनका आर्थिक पक्ष कमजोर है। इसलिए भारतीय समाज में ये भी जरुरी है की समाज में ऐसा परिवर्तन किया जाये जिससे समाजवादी पैटर्न का विकास हो सके और समाजवाद की विचारधारा का विकास हो। समाज का अर्थ ये नहीं कि पूंजीपतियों का खात्मा किया जाये पर भारत में सामाजिक परिवर्तन का ये उद्देश्य होना चाहिए जिससे हर वर्ग को विकास के समान अवसर प्राप्त हों।
6. जातिवाद और क्षेत्रवाद का सामाजिक परिवर्तन में कोई स्थान नहीं :-
भारत में आज से नहीं शदियों से ये बीमारी सामने आ रही हैं। अगर विश्व में भारतीय समाज का विकास करना है तो ये बहुत जरुरी है कि सनाज में ऐसा परिवर्तन किया जाये जिससे हर जाति और वर्ग के लोग एक दूसरे से प्यार करें और जातिवाद और क्षेत्रवाद जैसी बीमारी को जड़ से उखाड़ने के लिए सदा बचनबद्ध रहे।
निष्कर्ष :- भारत में सामाजिक परिवर्तन के ऊपर लिखित लक्ष्यों और उद्देश्यों के इलावा और कई लक्ष्य होने चाहिए जैसे मौलिक मानवाधिकारों को संरक्षित करना, स्वतंत्र भाषण का अधिकार, स्वतंत्र धार्मिक अभिव्यक्ति का अधिकार, राजनीतिक भागीदारी का अधिकार, व्यक्ति निस्वार्थता, त्याग, सहयोग और आदर्शवाद की भावना को प्रेरित करना आदि।
निष्कर्ष :- भारत में सामाजिक परिवर्तन के ऊपर लिखित लक्ष्यों और उद्देश्यों के इलावा और कई लक्ष्य होने चाहिए जैसे मौलिक मानवाधिकारों को संरक्षित करना, स्वतंत्र भाषण का अधिकार, स्वतंत्र धार्मिक अभिव्यक्ति का अधिकार, राजनीतिक भागीदारी का अधिकार, व्यक्ति निस्वार्थता, त्याग, सहयोग और आदर्शवाद की भावना को प्रेरित करना आदि।
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सामाजिक परिवर्तन की परिभाषा और अर्थ