जानिए क्या है समाज मूर्त है या अमूर्त ? | samaj murt ya amurt | Society tangible or intangible in Hindi ?

समाज मूर्त या अमूर्त ? | Samaj murt hai ya amurat

निश्चय ही समाज को एक अमूर्त कहा जाता है। अमूर्त शब्द का अर्थ होता है जिसकी कोई मूर्ति या आकार न हो अर्थात जिसे हम छू नहीं सकते हैं। समाज की हर वास्तु में कुछ भौतिक गुण पाए जाते हैं जैसे आकार का होना, उस वस्तु के मापा जा सकता है वस्तु  कम या बढ़ाया भी जा सकता है जब किसी वस्तु के आकार में परिवर्तन किया जाता है तो उसकी मूर्त में बदलाव आता है। समाज के अमूर्त होने को एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं। 

मान लो हिमालय एक पहाड़ है और हिमालय की अपनी एक मूर्ति अर्थात अकार है ये भी कहा जा सकता है इसकी लम्बाई 2400 किलोमीटर है। पर हिमालय में जो गुन पाए जाते हैं वह अमूर्त हैं उसको हम महसूस कर सकते हैं। 

इसी तरह समाज भी एक संज्ञा तो है अपर अमूर्त संज्ञा है जिसको हम महसूस कर सकते है पर इसके आकार को देख नहीं सकते हाँ ऐसा कह सकते हैं एक विशाल समाज है, एक समृद्ध समाज है एक शिक्षित समाज है, अनपढ़ समाज है या फिर कृषक समाज है पर हम इसे महसूस करेंगे इसकी मूर्ति को देख नहीं सकते हैं। 

समाज को अमूर्त होने के पीछे कारण :-

समाज व्यक्ति व्यवहार पर निर्भर करता है :- एक समाज में व्यक्ति के व्यव्हार को महसूस किया जाता है। और व्यव्हार एक शब्द है जिसे हम देख या छू नहीं सकते हैं केवल व्यक्ति वयवहार को महसूस किया जाता है। क्या अपने कभी सुना है कि किसी व्यक्ति व्यवहार की कोई मूर्त हो व्यव्हार तो व्यवहार होता है जिसे मापना और आंकना मुश्किल होता है। 

समाज में जरूरतों पर निर्भर और जरूरतें अमूर्त होती हैं :- 

किसी भी समाज का निर्माण उस समाज की जरूरतों के साथ हुआ है। और हम जानते हैं हैं की जरूरतों को भी महसूस किया जाता है। और जरूरतें अमूर्त होती है इसका भी कोई आकार नहीं होता है। 

रीती रिवाज भी अमूर्त होते है :-  

हर समाज में कुछ न कुछ रीती रिवाज होते हैं और ये रीती रिवाज भी किसी Particular आकार के नहीं होते हैं। किसी के रीती रिवाज ये हैं कि वह चावल खाना पसंद करता है कोई गेंहूं की रोटी का सेवन करना पसंद करता ही। किसी समाज में पगड़ी बांधने का Style अलग है तो किसी समाज में इसका अलग ही रूप है। हाँ इन रीती रिवाजों को हम देख तो सकते हैं पर रिवाजों की भी कोई मूर्त नहीं होती है। 

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Rakesh Kumar

Rakesh Kumar From HP is interested in writing and go to the provision when where and why

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