समाज का निर्माण कैसे होता है ?
साधारण और सरल भाषा में समाज को पारिभाषित करें तो समाज व्यक्तियों का समूह होता है। पर वास्तव में ये समूह इसी लिए बनता है क्योकि व्यक्ति द्वारा इस समूह का निर्माण अपनी जरूरतें पूरा करने के लिए के लिए किया जाता है। व्यत्कि जरुरी आवश्यकताएं होती है जैसे राजनीतिक आवश्यकता, आर्थिक आवश्यकता, शारीरिक आवश्यकता। और इन जरूरतों को मनुष्य अकेले पूरा नहीं कर सकता है।
इसके लिए उसे कहीं -न - कहीं दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है ये ही कारण है कि समाज बनता है। इस पोस्ट में हम जानने की कोशिश करेंगे कि एक अच्छे समाज निर्माण कैसे होता और समाज के निर्माण के लिए कौन-कौन से तत्व जरुरी होते हैं।
एक अच्छे समाज के निर्माण के लिए जरुरी तत्व :-
मशहूर समाजशाष्त्री के डेविड के अनुसार समाज :- केवल सामाजिक सबंधो को समाज नहीं कहा जाता है, बल्कि समाज कुछ अवश्थायें होती हैं जिससे समाज का निर्माण होता है। डेविस के अनुसार समाज की चार अवश्थायें होती हैं जिससे समाज का निर्माण होता है ये हैं समाज की रक्षा, समाज का कार्य विभाजन, समूह की एकता, सामाजिक व्यवस्था की स्थिरता। इन चार तत्वों से समाज का निर्माण होता है इन्हे आगे विस्तार में बताने की कोशिश करते हैं इससे पहले जानते हैं डेविस कौन थे ?
डेविस कौन थे ? :- किंग्सले डेविस एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अमेरिकी समाजशास्त्री और जनसांख्यिकीय थे। उन्हें अमेरिकन फिलॉसॉफिकल सोसाइटी द्वारा बीसवीं शताब्दी के सबसे उत्कृष्ट सामाजिक वैज्ञानिकों में से एक के रूप में पहचाना गया था जिनक जन्म 20 अगस्त, 1908 और मृत्यु 27 फरवरी, 1997 में हुई थी।
डेविस ने यूरोप, दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और एशिया में समाजों के प्रमुख अध्ययनों का नेतृत्व और संचालन किया, "जनसंख्या विस्फोट" शब्द गढ़ा, और जनसांख्यिकीय संक्रमण मॉडल के नामकरण और विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई।
एक समाज के निर्माण के लिए निम्नलिखत तत्व निर्भर करते हैं।
- समाज की रक्षा
- समाज में कार्यों का विभाजन
- समूह में एकता समाज निर्माण के लिए जरूरी
- समाज में निरंतरता जरुरी
- साकारात्मक सोच का होना
- अच्छे विचारों से समाज का निर्माण
- वेवजह हस्त्क्षेप नहीं होना चाहिए
- अच्छे नेतृत्व की जरूरत
- सामाजिक बुराइयों का अंत एक अच्छे समाज के लिए जरूरी।
1. समाज की रक्षा:-
समाज की रक्षा किसी भी समाज के लिए जरूरी तत्व है। समाज का निर्माण इसलिए ही की जाती है ताकि मनुष्य सही और सुखी जीवन व्यतीत कर सके। समाज की रक्षा का अर्थ व्यक्ति की उन परिश्थितियों से है जिसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति का सहयोग करता है। एक व्यक्ति के जीवन में कई मुश्किलें होती है और अगर दूसरा व्यक्ति उन मुशीबतों का निपटारा करे या रक्षा करे तो एक अच्छे समाज का निर्माण हो सकता है।
समाज चाहे कोई भी हो अगर हमव्यक्ति विशेष की रक्षा के बारे में न सोचकर सम्पूर्ण समाज की रक्षा के बारे में सोचेगें तो एक अच्छे और समृद्ध समाज का निर्माण होगा। एक दूसरे की रक्षा और सहयोग से ही नए समाज होगा और नई पीढ़ी में भी विकास होगा।
2. समाज में कार्य विभाजन :-
2. समाज में कार्य विभाजन :-
समाज में कार्यविभाजन का अर्थ में काम करने का ढंग ऐसे निश्चित किया जाये जिससे समाज में रहने वाले हर वर्ग की जरूरत पूरी हो सके। अगर आर्थिक दृष्टि से एक समाज में एक ही कार्य होगा एक ही वर्ग होगा तो समाज की जरूरतों का निपटारा करना मुश्किल हो जायेगा। मान लो अगर एक समाज में कृषक वर्ग, और शिक्षा का वर्ग होगा तो शिक्षा और कृषि केवल मनुष्य की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते है इसलिए समाज के विभिन कार्यों का समाज में विभाजन होना जरुरी है।
समाज में कार्य विभाजन इस तरीके से किया जाना चाहिए कि हर किसी के सहयोग से हर जरूरत को पूरा किया जा सके इससे ही एक अच्छे समाज का निर्माण हो सकता है।
3. समूह में एकता एक अच्छे समाज के निर्माण के लिए जरुरी :-
3. समूह में एकता एक अच्छे समाज के निर्माण के लिए जरुरी :-
एकता एक ऐसा शब्द है जिसके माध्यम ने दुनिया की सबसे बड़ी दीवार बनाई है जो चन्द्रमा से भी दिखाई देती है। अगर परिवार समाज की मूल इकाई है और परिवार में सभी संगठित है तो आपको कोई भी पड़ोस में विचलित नहीं क्र सकता है। समाज में एकता या संगठित होना समाज के निर्माण के लिए बहुत जरूरी है।
अगर एक समूह में एकता होगी तो वह आर्थिक और समाजिक रूप से विक्सित होगा जिससे अन्य वर्ग भी एकता में सूत्र में बांधने की कोशिश करेंगे। विखरे हुए मोती कभी माला का रूप नहीं ले सकते हैं इसलिए अगर समाज रूपी माला पहननी है तो समाज के हर समूह में एकता का होना बहुत जरूरी है।
4. समाज में निरंतरता :-
4. समाज में निरंतरता :-
समाज वैसे तो एक ऐसा समूह होता है जिसमें स्थिरता भी होती है और जैसे शदियों से बनाये समाज के नियम आज भी हमारे जीवन का हिस्सा बने हुए हैं। इसके साथ निरंतरता भी समाज के लिए बहुत जरुरी है। एक स्थिर समाज समाज के नए रूपों को नहीं पहचान सकता है। अगर समाज एक जगह पर रुक जायेगा तो समाज में विकास होना संभव नहीं होगा .
5. सामाजिक निर्माण के लिए के लिए साकारात्मक सोच जरुरी :-
5. सामाजिक निर्माण के लिए के लिए साकारात्मक सोच जरुरी :-
एक समाज जब भी सृजन होता है है तो उसमें रहने वाले हर व्यक्ति की सोच अलग होती है। सोच में हर व्यक्ति में विभिन्नता पाई जाती है। एक अच्छे और सुदृढ़ समाज का निर्माण करना हो तो हर व्यक्ति की सोच साकारात्मक होना बहुत जरुरी है। Negativity या नकारात्मक सोच से एक समाज में कई समस्यायें उत्पन्न होती है जीसे समाज का विकास रुक जाता है।
समाज में एक चीज देखी जाती है कि जब भी समाज में कोई तरक्की करता है तो हम उसके नकारात्मक पहलु को सामने लेकर आते है ये ही सोचते हैं कि ये रातो रत तरक्की कैसे कर गया। दूसरी तरफ जब समाज में किसी को समस्या पड़ती है तो भी एक समाज का नकारात्मक पहलु नजर आता है और समाज के कुछ सदस्य सोचते है इसके साथ ऐसा ही होना था ये स्वाभाविक था।
समस्यायों का हल या फिर तरक्की के पहलु ढूंढ कर उसमें सकारात्मक सोच लाकर एक अच्छे समाज का सृजन या निर्माण हो सकता है।
6. समाज में अच्छे विचारों का विस्तार सामाजिक निर्माण के लिए जरुरी पहलु :-
समाज में अच्छे भी अच्छे विचारों का विस्तार होता है तो एक सुदृढ़ और अच्छे समाज का सृजन होता है। धर्म और जाति चाहे कोई भी हो समाज में बहुत अच्छे विचारक हुए हैं। जयादातर देखने में आया है की समाज में महान विचारकों की किताबों को पढ़ा तो जाता है और उन विचारों का असर एक व्यक्ति पर उसी समाज के लिए होता है उसके बाद हम उसे भूल जाते हैं।
समाज के सभी वर्ग में अच्छे विचार होंगे तो उसे दबाने की कोशिश की जाएगी पर अगर अच्छे विचारों में निरंतरता लाइ जाये तो समाज में निश्चित तोर से बुरे विचार विलुप्त हो जायेंगे। और एक अच्छे समाज का निर्माण होगा।
7. वेवजह हस्तक्षेप से एक सुदृढ़ समाज का निर्माण नहीं हो सकता है :-
7. वेवजह हस्तक्षेप से एक सुदृढ़ समाज का निर्माण नहीं हो सकता है :-
अगर एक समाज में दिखा जाये तो किसी भी संगठन में कुछ नियम निर्धारित होते है और उन नियमों और क्रियाकलापों पर सभी को चलना पड़ता है। पर इसके साथ अगर एक समाज में बिना मतलब के किसी के जीवन में हस्तक्षेप किया जाये तो वह भी किसी की निजी तरक्की में वाधा उत्पन करेगी।
अगर हस्तक्षेप ज्यादा होगा तो समाज में रहें वाले व्यक्ति का निजी विकास रुक जायेगा और निजी विकास से ही समाज का निर्माण हो सकता है। क्योकि एक व्यक्ति के जुड़ने से समाज का सृजन होता है।
8. समाज में अच्छा नेतृत्व जरुरी है :-
8. समाज में अच्छा नेतृत्व जरुरी है :-
व्यक्ति के जीवन में नेतृत्व का बहुत महत्व है परिवार हो या देश या फिर एक राज्य जब तक इनमें एक अच्छा नेतृत्व करने वाला व्यक्ति नहीं होगा उसका विकास रुक सकता है। इसी तरह एक समाज की स्थिति है समाज में अच्छे विचारों वाले होते हैं और अच्छे कार्य करने वाले भी होते हैं पर पहल करने वाला नहीं होता है। हर कोई ये ही सोचता है कि शुरआत कौन करे।
अगर एक समाज में अच्छा नेतृत्व करने वाला व्यक्ति है तो पुरे समाज को उसके विचारों का अनुसरण करना चाहिए ताकि एक अच्छे समाज और स्वच्छ समाज का निर्माण हो सके।
9. समाजिक बुराइयों को दूर करके अच्छे समाज का निर्माण :-
9. समाजिक बुराइयों को दूर करके अच्छे समाज का निर्माण :-
निश्चित ही समाज में कई बुराइयां पाई जाती हैं जैसे किसी के साथ समाज में रंग भेद के नाम पर, किसी से गरीबी अमीरी के नाम पर, किसी से जात पात के नाम पर किसी से क्षेत्रवाद के नाम पर भेदभाव किया जाता है। अगर इन सामाजिक बुराइयां कोदूर करके अपने नियमों में रहकर सामाजिक बुराइयों का नाश किया जाये तो निश्चित तोर से एक सदृढ़ समाज का निर्माण हो सकता है।
