समाज कैसे बनता है? | How is society formed?
समाज मनुष्य के लिए बहुत जरुरी है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि समाज एक अमूर्त संस्था होती है जिसमें कुछ नियम या प्रतिबंध होते हैं। अगर समाज में नियमों को निर्धारित नहीं किया जाये तो समाज एक सभ्य समाज नहीं कहलायेगा और समाज में भगदड़ मच जाएगी। अब हमारेमन में ये सवाल उठता है समाज कैसे बनता है ?तो समाज का निर्माण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका विकास धीरे हुआ है। एक परिवार जब दूसरे परिवार के साथ अपने दैनिक जीवन के सबंध स्थापित करता है तो समाज का निर्माण होता हो। समाज की सबसे पहली इकाई परिवार ही है। इसलिए जब परिवारों की श्रृंखला बनती है तो स्मैक बनता है। इस पोस्ट में हम समाज कैसे बनता है इसके बारे में जानने की कोशिश करेंगे।
व्यक्ति समाज नहीं पर है पारिवारिक समाज की मूल की मूल इकाई है :-
समाज कैसे बनता है ? या समाज निर्माण कैसे होता है ?
व्यक्ति समाज नहीं पर है पारिवारिक समाज की मूल की मूल इकाई है :-
समाज का सबसे छोटा रूप परिवार ही है। परिवार कैसे बनता है। परिवार में एक व्यक्ति के साथ दूसरे व्यक्ति के जब सबंध स्थापित होते हैं तो परिवार का सृजन होता है। हर कोई मनुष्य एक परिवार में रहकर ही अपन विकास करता है। अगर आप एक परिवार की कल्पना अपने मन में लाते हैं तो जरा अपने परिवार के बारे में सोच क्र देखिये आप एक इंसान हो और एक परिवार और एक पारिवारिक समाज में आपकी क्या भूमिका है।
अगर एक स्वस्थ और अच्छी सोच वाला व्यक्ति पैदा होता है परिवार का निर्माण होता है। और अगर एक अच्छे परिवार का निर्माण होता है तो ऐसे ही अच्छे परिवारों के साथ मिलकर समाज का निर्माण होता है। इसलिए व्यक्ति समाज नहीं है पर समाज के निर्माण के लिए एक सुदृढ़ व्यक्ति का होना बहुत जरुरी है। एक व्यक्ति ही होता है जो अपनी पहचान और नेतृत्व से समाज सकता है।
परिवार समाज की मूल इकाई :-
परिवार समाज की मूल इकाई :-
परिवार में हर व्यक्ति के प्रयास से समाज का निर्माण होता है या एक सदृढ़ परिवारिक समाज का सृजन होता है। परिवार में कई सदस्य होते हैं कोई बड़ा है कोई छोटा है, कोई बुजुर्ग है तो कोई बीमार है तो कोई विद्यार्थी। और एक परिवार में एक दूसरे के सहयोग के बिना परिवार रूपी समाज का विकास संभव नहीं है। परिवारिक समाज में सबहि एक दूसरे की जरूरतं पर निर्भर करता है। एक शिशु जब जान लेता है तो वह अपने मातापिता पर निर्भर करता है। उसके बाद जब बड़ा होता है तो उसके भाई बहिन उसे अपने साथ स्कुल लेकर जाते है।
जब शादी हो जाती है तो वही फिर पुरे परिवार का हर्ता करता भी बन जाता है। एक पारिवारिक समाज में यह बहुत जरूरी है कि पारिवारिक समाज में रहने वाले हर व्यक्ति का ध्यान रखा जाये यह ही परिवार रूपी समाज की विशेषता है। परिवारिक समाज में एक अच्छे नेतृत्व करने वाला व्यक्ति भी बहुत जरुरी है। अच्छे सबंधो और अपने फर्ज और कर्तव्यों का पालन करने के बावजूद ही समाज की इस पहली इकाई का निर्माण होता है।

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एक बच्चे के जन्म के बाद वह परिवार में रहता है वह परिवार ही समाज का सबसे पहला रूप माना जाता है। जब ये परिवार आपस में अपनी समस्यायों और जरूरतों को लेकर एक दूसरे पर निर्भर करते हैं और जरूरतों को पूरा करने के लिए बचनबद्ध हो जाते हैं तो उन परिवारों के मिलने से ही समाज का निर्माण होता है।

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कैसे बनता है समाज?
एक बच्चे के जन्म के बाद वह परिवार में रहता है वह परिवार ही समाज का सबसे पहला रूप माना जाता है। जब ये परिवार आपस में अपनी समस्यायों और जरूरतों को लेकर एक दूसरे पर निर्भर करते हैं और जरूरतों को पूरा करने के लिए बचनबद्ध हो जाते हैं तो उन परिवारों के मिलने से ही समाज का निर्माण होता है।
समाज का बनना एक वह क्रिया है जिससे पता चलता है कि इसका विकास धीरे धीरे हुआ है। मनुष्य एक सामजिक प्राणी है और समाज से अलग होकर वह सुखी जीवन का यापन नहीं कर सकता है। परिवार के बाद आदमी पड़ोस में अपनी अवस्यक्ताओं क पूरा करने का प्रयास करता हो इससे गांव में समाज का निर्माण होता है।
इसके बाद विद्यार्थी जीवन यापन करता है जिससे समाज में विद्यार्थी समाज बनता है। जब पढ़ लिख कर एक डॉक्टर बनता है तो डॉक्टर का अपना समाज बनता है। कई परिवार जब आपस में परिवारों के हितों को मिलाते हैं तो समाज का निर्माण होता है।
मनुष्य समाज का विकास धीरे-धीरे हुआ है :- मनुष्य समाज का विकास समय के साथ हुआ है पहले मनुष्य आदि मानव का जीवन वयतीत करता था उसके बाद समय की हुंकार के साथ उसमें अपनी जरूरतों को लेकर एक दूसरे पर निर्भर करना शुरू कर दिया। आज मनुष्य की जरूरतें इतनी ज्यादा बढ़ गई हैं कि इंसान का एक दूसरे के वगेर रहना मुश्किल हो गया है। एक समाज दूसरे समाज पर निर्भर करता है।
निष्कर्ष :- निष्कर्ष में ये ही कहा जा सकता है कि समाज का निर्माण एक परिवार रूपी इकाई से शुरू होता हैं और उसके बाद परिवार से निकलकर आगे जब परिवार के सदस्य अन्य समूह के साथ मिलते हैं है तो समाज बनता है। समाज के अलग-अलग रूप हो सकते है। समाज एक विस्तृत धारणा है जो एक दूसरे की आवश्यकताओं के कारण ही बनता है।
निष्कर्ष :- निष्कर्ष में ये ही कहा जा सकता है कि समाज का निर्माण एक परिवार रूपी इकाई से शुरू होता हैं और उसके बाद परिवार से निकलकर आगे जब परिवार के सदस्य अन्य समूह के साथ मिलते हैं है तो समाज बनता है। समाज के अलग-अलग रूप हो सकते है। समाज एक विस्तृत धारणा है जो एक दूसरे की आवश्यकताओं के कारण ही बनता है।
