क्या समाज का निर्माण सही है या गलत ?
कई बार ये सवाल पूछे जाते हैं कि क्या समाज सही है या नहीं ऐसा सवाल अगर आपके मन में भी उत्पन्न होता है तो सबसे पहले ये सोचने की कोशिश करो की समाज बनाया किसने है और समाज का विकास कैसे हुआ है। समाज का सृजन करने वाले लोग समाज ही होते हैं अर्थात समाज का निर्माण व्यक्ति द्वारा किया गया है।
समाज कोई वस्तु नहीं है पर कुछ ऐसे नियम हैं जो मनुष्य अपनी जरूरतों के अनुसार बनाता है और वे नियम धीरे -धीरे उस समाज का हिस्सा बन जाते हैं। ये ही नियम इंसान को क्यों मानने पड़ते हैं अगर उन नियमों का पालन न करें तो समाज उसका वहिष्कार करेगा।
हाँ इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि कभी -कभी एक परिश्थिति ऐसी हो जाती है कि वह समाज द्वारा बनाये गए नियमों का पालन करने से आना कानि करता है पर अंत में उन्हें उन नियमों का पालन करना ही पड़ता है। समाज तब गलत होता है जब एक निश्चित दायरे में भी रहकर एक वर्ग दूसरे वर्ग के साथ भेदभाव का रयेया अपनाता है उस वक्त जो वर्ग अनदेखी या फिर भेदभाव का शिकार होता है तो वह वर्ग अपने आप को Survive करने के लिए कोशिश करता है उस वक्त समाज में विघटन हो सकता है।
हाँ इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि कभी -कभी एक परिश्थिति ऐसी हो जाती है कि वह समाज द्वारा बनाये गए नियमों का पालन करने से आना कानि करता है पर अंत में उन्हें उन नियमों का पालन करना ही पड़ता है। समाज तब गलत होता है जब एक निश्चित दायरे में भी रहकर एक वर्ग दूसरे वर्ग के साथ भेदभाव का रयेया अपनाता है उस वक्त जो वर्ग अनदेखी या फिर भेदभाव का शिकार होता है तो वह वर्ग अपने आप को Survive करने के लिए कोशिश करता है उस वक्त समाज में विघटन हो सकता है।
इस बात से इंकार नहीं किया है कि समाज कभी-कभी ऐसे मूल्यों और नियमों को निर्धारित करता है जिससे एक मनुष्य की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, आर्थिक स्वतंत्रता या उसका निजी जीवन प्रभावित हो सकता है। समाज सही या फिर गलत इसको एक उदाहण से समझने की कोशिश करते हैं।
मान अगर आप एक गृहस्थ जीवन में रहते हैं और पहले आपक समाज परिवार है आपके परिवार आपके लिए नियम निर्धारित करते हैं और बचपन से ही आपको ये कहते ऐसा नहीं करना जो गलत हो तो आप बचपन से अपनी मर्जी करते हैं पर पर आप अगर उन नियमों का पालन नहीं करोगे को आप परिवार के सदस्य नहीं माने जाओगे अर्थात आप एक परिवारिक समाज का हिस्सा नहीं हो। इसी तरह पड़ोस में भी कुछ नियम होते हैं जिन्हे मानना पड़ता है इसलिए समाज के गलत होते का सवाल नाहों उठता है।
आज मॉस खाना या Non Vegetarian होना एक समाज में असभय माना जाता है तो अगर हम पुराने युग की बात करें तो पाषाण युग में कोई भी ऐसा मनुष्य नहीं था जो मास नहीं खाता था समय बदला हालात बदले और मनुष्य ने एक समाज का निर्माण कर लिया जो मास नहीं खाता है उसने अपने लिए एक नए समाज का निर्माण कर लिया। कारण क्या है इसके पीछे क्यों आज मनुष्य के पास आज मास के वगेर और भी साधन हैं जिससे वह अपना जीवन व्यतीत कर सकता है।
आखिर में ये ही कहा जा सकता है कि समाज बना तो इंसान ने बनाया नियम बने मनुष्य ने बनाये। उन नियमों का पालन भी करना पड़ेगा और उसके साथ समाज के साथ चलना भी पड़ेगा हाँ अगर समाज में बदलाव करना है तो जब समाज द्वारा बांये कुछ नियम गलत लगते हैं तो उसका बहिष्कार करो और समाज के सामने लाओ ताकि उसमें बदलाव लाया जा सके। अर्थात समाज गलत नहीं हो सकता है समाज के द्वारा बनाये कुछ नियम और परम्परा गलत हो सकती है।
मान अगर आप एक गृहस्थ जीवन में रहते हैं और पहले आपक समाज परिवार है आपके परिवार आपके लिए नियम निर्धारित करते हैं और बचपन से ही आपको ये कहते ऐसा नहीं करना जो गलत हो तो आप बचपन से अपनी मर्जी करते हैं पर पर आप अगर उन नियमों का पालन नहीं करोगे को आप परिवार के सदस्य नहीं माने जाओगे अर्थात आप एक परिवारिक समाज का हिस्सा नहीं हो। इसी तरह पड़ोस में भी कुछ नियम होते हैं जिन्हे मानना पड़ता है इसलिए समाज के गलत होते का सवाल नाहों उठता है।
आज मॉस खाना या Non Vegetarian होना एक समाज में असभय माना जाता है तो अगर हम पुराने युग की बात करें तो पाषाण युग में कोई भी ऐसा मनुष्य नहीं था जो मास नहीं खाता था समय बदला हालात बदले और मनुष्य ने एक समाज का निर्माण कर लिया जो मास नहीं खाता है उसने अपने लिए एक नए समाज का निर्माण कर लिया। कारण क्या है इसके पीछे क्यों आज मनुष्य के पास आज मास के वगेर और भी साधन हैं जिससे वह अपना जीवन व्यतीत कर सकता है।
आखिर में ये ही कहा जा सकता है कि समाज बना तो इंसान ने बनाया नियम बने मनुष्य ने बनाये। उन नियमों का पालन भी करना पड़ेगा और उसके साथ समाज के साथ चलना भी पड़ेगा हाँ अगर समाज में बदलाव करना है तो जब समाज द्वारा बांये कुछ नियम गलत लगते हैं तो उसका बहिष्कार करो और समाज के सामने लाओ ताकि उसमें बदलाव लाया जा सके। अर्थात समाज गलत नहीं हो सकता है समाज के द्वारा बनाये कुछ नियम और परम्परा गलत हो सकती है।