समाज के मुख्य तत्व | Elements of Society in Hindi | Samaj ke tatav kaun kaun se hain ?

समाज के मुख्य तत्व कौन- कौन से हैं ? Elements of a Society in Hindi Language

समाज एक मनुष्य निर्मित इकाई है है जिसका विकास धीरे -धीरे हुआ है। समाज एक ऐसी मानव निर्मित संस्था है जिसका विकास समय के साथ हालत और परिस्थिति के अनुसार हुआ है। समाज में कुछ ऐसे तत्व है जैसे आजादी, समानता, पारस्परिक सोच, मतभेद, अधिकार जिसके होने से समाज का गठन होता है आइये इस लेख में हम समाज के प्रमुख तत्व (Elements of a Society) क्या होते हैं उसके बारे में जानने की कोशिश करते हैं कि एक एक समाज किन तत्वों के साथ मिलकर बना हुआ है।


एक समाज में निम्नलिखित तत्व होने चाहिए ?


1. समानता एक समाज का पहला तत्व :-

अगर हम मनुष्य समाज की बात करें तो सभी को समान रखना और समझाना मुश्किल है पर समानता समाज का का ऐसा तत्व है जिससे समाज का समाज का सृजन और निर्माण हो सकता है। समानता का अर्थ है सभी को समान अवसर मिलें। अगर एक समाज में समानता का आभाव होगा तो समाज में अस्थिरता पैदा होगी। 

समानता का अर्थ ये नहीं कि सभी को एक ही समझा जाये पर इसका अर्थ है कि अगर एक समाज में अगर किसी को किसी जाति या धर्म के नाम पर या फिर गरीबी अमीरी के नाम पर आसमान समझा जाये तो समाज विचलित हो सकता सकता है इसलिए समाज के निर्माण के लिए समानता जैसे शब्द को एक तत्व के रूप में देखा जा सकता है।

2. रीतियां और रिवाज :- 

भारत में ही नहीं पुरे विश्व में हर समाज के अपने रीती रिवाज होते हैं। अगर भारत की बात करें तो उत्तर भारत में विवाह की अलग रीतियां हैं और दक्षिण भारत में अलग रिवाज हैं। जहां पंजाब में पगड़ी बांधने का तरीका अपना है वहीँ अगर राजस्थान और हरयाणा में भी ये रिवाज है पर सभी के रीती रिवाजों में अन्तर है। वहीँ अगर दक्षिण सभ्यता और पश्चमी सभ्यता में अंतर देखें तो दोनों में फरक नजर आएगा। इसलिए रीतियों और रिवाजों को भी समाज के तत्व के रूप में देखा जा सकता है।


3 .आपसी जागरूकता और समझदारी :-

एक समाज में जागरूकता का होना भी जरुरी है बिना जागरूकता के एक समाज एक अँधा समाज कहलायेगा। अगर एक समाज शिक्षा के क्षेत्र में में राजनीति के क्षेत्र में और आर्थिक क्षेत्र जागरूक होगा तो एक समृद्ध समाज होगा। एक समाज उचित चेतना और अच्छी भावना से चलता है। 

चेतना और भावना का विकास भी मनुष्य में जागरूकता फैलाने के कारण पैदा हो सकती हैं। इसके साथ आपसी समझदारी भी समृद्ध समाज का मूल तत्व है। जब किसी भी क्षेत्र का नागरिक समझदार होगा तो आपसी संघर्ष में क्लेश, लड़ाई और गलत संघर्ष पैदा होने के आसार कम ही होंगे। 

जब एक समाज जागरूक होगा और सामझदार होगा तो निश्चय ही दूसरा समाज भी उसे Follow करने की कोशिश करेगा। इसलिए जागरूकता का विकास और आपसी समझदारी को भी समाज का तत्व के रूप में देकः जाना चाहिए।


4. परस्पर निर्भरता भी समाज का मूल तत्व :- 

निश्चय ही समाज एक ऐसा समूह है जो एक दूसरे की जरूरतों को और एक दूसरे की भावनाओं को समझ सके। इस बात की सचाई है मनुष्य अकेला नहीं रहा सकता है अगर मनुष्य अकेला जीवन बिताएगा तो उसे समाज नहीं कहा जायेगा। और अपने ये कभी सुना भी नहीं होगा की कोई "अकेला समाज" होता है। परिवारिक समाज जो समाज की मूल इकाई है वहां से आपसी निर्भरता शुरू होती है एक बच्चा अपने माता पिता पर निर्भर होता है। 

माता पिता उसका पालन पोषण करते हैं उसके बाद मां बाप का पालन पोषण उस बच्चे द्वारा बुढ़ापे के समय किया जाता है। परिवार में ही नहीं उसके बाद आज तो एक राज्य और देश एक दूसरे पर आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से एक दूसरे को बहुत प्रभावित करते हैं। दुनिया एक समाज बन चूका है। इसलिए परस्पर निर्भरता को भी सक समाज का महत्वपूर्ण तत्व के रूप में देखा जा सकता है।



5. अधिकार एक समाज का मुख्य तत्व :- 

अधिकार तो बहुत किस्म के होते हैं और अधिकारों का समाज में न होना समाज को परिपूर्ण नहीं करता है। अगर एक समाज के पास अधिकार नहीं होंगे तो वह समाज एक गुलाम समाज कहलायेगा। जीने का अधिकार, बोलने का अधिकार, खाने का अधिकार अपने परिवार में शांति से रहना और शिक्षा का अधिकार कुछ ऐसे अधिकार हैं जो समाज के लिए बहुत जरुरी हैं और इसके बिना एक समाज का विकास नहीं हो सकता है। 

हाँ इस बात को माना जा सकता है कि अधिकार असीमित नहीं होने चाहिए इसे फिर अधिनायक वाद कहा जायेगा समाज नहीं। अगर अधिकार एक समाज में एक Element के रूप में शामिल है तो फिर समाज स्थिर माना जायेगा।


6. आपसी सहयोग की भावना :- 

एक सुदृढ़ समाज में आपसी सहयोग की भावना का होना भी समाज के सभी तत्वों में से एक प्रमुख तत्व माना जा सकता है। अगर एक समाज में शिक्षा भी है अधिकार भी है, समझदारी भी है समानता और जागरूकता भी है पर आपसी सहयोग भावना नहीं है तो समाज परिपूर्ण नहीं माना जायेगा। एक समाज में आपसी सहयोग की भावना जरुरी है चाहे कोई भी समाज हो जब तक एक दूसरे का सहयोग नहीं करेंगे कोई भी समाज आर्थिक पक्ष, राजनितिक पक्ष और विकास के पक्ष में कभी भी तरक्की नहीं कर सकता है।

7 . व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक समाज के तत्व के रूप में :- 

आजादी मनुष्य के लिए बहुत जरुरी है एक मनुष्य ये ही चाहता है कि वह आजादी से अपने जीवन का विकास करे और वह हर पक्ष में आजाद रहना चाहता है। एक समाज में आजादी का होना भी जरुरी है पर स्वतंत्रता की भी कुछ सीमायें होती हैं। व्यक्तिगत स्वतंत्रता तो जरुरी है कि वह स्वतन्त्र रह कर एक समाज में अपना जीवन निर्वाह करे पर समाज के नियमों के दायरे में रहकर ही यह संभव है। 

अगर एक समाज में किसी को उन बंधनों में बांधा जाये जिससे उसका सरवपक्षी विकास रुक जाये तो उस समाज का कोई भी फायदा नहीं होगा। एक समृद्ध समाज वही है जो समाज के नियमों और कानून में रहकर एक व्यक्ति को व्यक्तिगत आजादी प्रदान करे ताकि वह अपना विकास क्र सके।


8. समाज में कार्यप्रणाली :- 

 एक समाज की कार्यप्रणाली किसी है ये भी समाज का मुख्य तत्व है। एक समाज की कार्यप्रणाली वह होती है जिसमें एक समाज, समाज के सृजन का एक ढंग निश्चित करता है। समाज की कार्यप्रणाली साफ होनी चाहिए। एक सही कार्यप्रणाली के बिना समाज क्या कोई भी जीव विकास नहीं क्र सकता है। इसलिए निश्चित और सुदृढ़ कार्यप्रणाली भी एक समाज के लिए मूल तत्व के रूप में उजागर होता है।


9. समाज समूहों और उपसमूहों का समावेश :- 

आदि काल से मनुष्य ने सबसे पहले समूह में रहना सीखा था उसके बाद अन्य विकास किये थे। आज दुनिया में कई समूह और उपसमूह हैं। एक परिवार बनता है उसके बाद एक पड़ोस बनता है उसके बाद जब इंसान पढता है उसके बाद विद्यार्थियों का समूह बनता है [हीर विद्यार्थियों में उप -समूह बनते हैं। उसके बाद जब एक आदमी धन अर्जित करता है तो वहां भी समूह के वगेर नहीं रह सकता है। आज समाज कई समूहों और उप समूहों में बंटा हुआ है इसलिए समूह और और उप -समूह भी एक समाज का जरुरी अंग या तत्व है।


10 मानव व्यव्हार को रेखांकित करना :- 

समाज ही है जो मानव व्यव्हार को सामने एकर आता है और उसको नियंत्रित या फिर उसमें रेखायें इंगित करता है। अगर एक समाज मानव व्यवहार को trace नहीं करेगा तो या नियंत्रित नहीं करेगा तो एक मनुष्य आजादी की हदें पार कर जायेगा और एक सही समाज का सृजन होना मुश्किल हो जायेगा


नोट :- ऊपर दिए गए विचार जो "Elements of a Society in Hindi" समाज के तत्व या अंग हैं ये किसी भी विचारक या किसी वेबसाइट की नक़ल नहीं हैं बल्कि Hindi पुकार वेबसाइट के निजी विचार हैं जो Educational Purpose से दिए गए हैं वैसे प्रसिद्ध समाजशास्त्री मैकाइवर ने समाज के सात ही तत्व बताये हैं जिनकी विवेचना अगली पोस्ट में की जाएगी। अगर कोई इस पोस्ट में कुछ गलत लगे तो जरूर बताएं।

Rakesh Kumar

Rakesh Kumar From HP is interested in writing and go to the provision when where and why

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