समाज की सबसे छोटी इकाई और मूल इकाई कौन सी है ?
अगर हम पाषाण काल की बात करें तो उस समय मानव अर्थात मनुष्य का समाज बहुत ही संकुचित था। वह खाने की तलाश में इधर उधर घूमता रहता यह। जंगली जानवरों के शिकार से अपन पेट भरता था। पर अगर हम समाज की बात करें तो उसक अपना समाज था। आदि मानव को भी समझ थी की जब वह खाने के बाद विश्राम करेगा तो अपने निश्चित परिवार के साथ विश्राम करेगा। तो ये बात तो साफ़ हो जानी चाहिए कि समाज के एक छोटे से रूप की शुरुआत कब शुरू हुई। पाषाण युग के इंसान ने अपने परिवार के साथ रहकर फिर उसके आग की खोज के बाद, अन्य आदि मानव के साथ रहकर मास अर्थात अपने खाने को पकाना शुरू किया।उसके बाद उसने अपने रहने के प्रबंध का खोजा और अपने लिए रहने का जुगाड़ किया। उसके बाद पहिये की खोज के बाद विकास की रफ़्तार में इंसान आगे बढ़ा और उसने खेती करना शुरू किया। अब परिवार समाज की एक इकाई के साथ दूसरी इकाई जुड़ गई जो निश्चित स्थान में रहकर अपना खेतीबाड़ी का धंधा चलाता था। इतिहास की बात करें तो आज सुमेरी सभ्यता सबसे पुराणी मानी जाती है। ऐसे ही भारत में भी हड़पा और मोहनजोदड़ो सभय्ता का विकास हुआ। धीर -धीरे मनुष्य ने अपने जीने के ढंग को सुधारा और अलग समाज का सृजन किया। मनुष्य ने अपने धंधे के हिसाब से मनुष्य में अलग -अलग समाज का निर्माण किया।
वक्त के साथ जीने मरने की रश्मों को तय किया गया और समाज के साथ मिलकर नियमों को निर्धारित किया। पर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है की पाषाण युग से चले आ रहे इस नियम को आज तक इंसान ने नहीं छोड़ा है और वह सभी क्रियाकलापों के बावजूद भी वह अपने परिवार में रहता है। परिवार से ही उसके काम और भविष्य नियम तय लिए जाते हैं। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है आज समाज के रूप अलग हैं और समाज के साथ मिलकर एक इंसान काम करके और क्रियाकलापों से गुजर कर फिर अपने परिवार के लिए काम करता है उसके बाद वह दूसरे समाज के लिए अग्रसर होता है।
ये की कारण है कि समाज में विभिन इकाइयों के बावजूद आज समाज की सबसे छोटी, और मूल इकाई परिवार ही मानी जाती है क्योंकि मनुष्य के अस्तित्व के बाद आज तक परिवार आज समाज के रूप में संगठित हैं।
परिवार समाज की छोटी इकाई क्यों है ?
परिवार हमारी मूलभूत आवश्यकताओं जैसे भोजन, कपड़ा, मकान आदि की पूर्ति करता है। यह परिवार के सभी सदस्यों के लिए प्रेम और सुरक्षा सुनिश्चित करता है। परिवार से ही हम सामाजिक संबंध बनाना शुरू करते हैं, ऐसे संबंधों को विकसित और बनाए रखते हैं। इसलिए परिवार को समाज की मूल इकाई कहा जाता है।
परिवार समाज की छोटी इकाई क्यों है ?
परिवार हमारी मूलभूत आवश्यकताओं जैसे भोजन, कपड़ा, मकान आदि की पूर्ति करता है। यह परिवार के सभी सदस्यों के लिए प्रेम और सुरक्षा सुनिश्चित करता है। परिवार से ही हम सामाजिक संबंध बनाना शुरू करते हैं, ऐसे संबंधों को विकसित और बनाए रखते हैं। इसलिए परिवार को समाज की मूल इकाई कहा जाता है।