अगर आप शिक्षक हो तो इस बात को नहीं कहना चाहिए कि आपको एक शिक्षक होते हुए विद्यार्थियों के साथ क्या -करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि बच्चों का आपको पसंद करना और नहीं करना आपके ऊपर निर्भर करता है इसलिए एक शिक्षक शिक्षक ही होता है और विद्यार्थी, विद्यार्थी ही होता है फिर भी एक अच्छे शिक्षक में कुछ ऐसी भी बातें हैं जो उन्हें विद्यार्थी के साथ नहीं करनी चाहिए।
एक शिक्षक को विद्यार्थियों के साथ निम्न बातें नहीं करनी चाहिए -
1. पहली बात हर कोई विद्यार्थी जब स्कुल में आता है तो वह एक घरेलू परिस्थितियों से गुजर कर आता है और आपको पता है आजकल पैसे की होड़ में लगभग सभी परिवार तीतर -बितर हुए हैं कहने का भाव कि Stress सभी को है चाहे किसी भी सब्जेक्ट से रिलेटेड हो। इसलिए अगर आप एक अच्छे शिक्षक हैं तो सबसे पहले विद्यार्थी को जिंदगी में कभी भी discourage न करें। मामला चाहे शिक्षण का हो या फिर घरेलू जिंदगी का एक शिक्षक होते हुए आपको हमेशा विद्यार्थी को प्रोत्साहित करना चाहिए।2. एक अध्यापक के अंदर प्रेम की भावना का होना बहुत जरूरी है पर इस बात का ध्यान रखना चाहिए आप शिक्षक हैं इसलिए आप शिक्षार्थी के साथ इतना भी प्रेम न करें कि विद्यार्थी आपका ही मूल्यांकन करना जारी कर दे। मूल्यांकन तो दूर जब आप विद्यार्थी के साथ ज्यादा नजदीक हो जायेंगे तो वे आपकी अवेहलना भी कर सकते हैं। इसलिए आपको एक शिक्षक रहते हुए मध्यस्थत्ता का रास्ता अपनाना चाहिए।
3. अक्सर देखा गया है कि बच्चे शिक्षकों के साथ स्नेह दिखाने के लिए कोई चीज घर से लेकर या उपहार के रूप में देते हैं। एक शिक्षक होने के नाते आपको कभी किसी शिक्षार्थी से उपहार बार -बार नहीं लेना चाहिए। इससे अभिवावकों के मन में आपके प्रति हीन भावना का सृजन होता है और यह एक कटु सत्य है।
4. आजकल सोशल मीडिया का युग है और सोशल मीडिया के जरिये शिक्षण का प्रचलन बहुत ज्यादा है ज्यादातर Corona काल में बच्चे को घर बैठे शिक्षण पूरा किया गया अगर आप एक शिक्षक हैं और Social Media के जरिये या इंटरनेट के माध्यम से बच्चों को पढ़ाते है तो इस बात का ध्यान रखें की अध्यापन को छोड़कर अनावश्यक चैटिंग या वार्तालाप से दूर रहें। इससे आपका शिक्ष्ण प्रभावित होगा और आपका डर शिक्षक के रूप में ख़तम हो जायेगा।
5. ये बात एक शिक्षक के मन में और एक आम आदमी के मन में भी है कि भारत के सविंधान में लिंग भेद की मनाही है इसलिए अगर एक शिक्षक लड़के और लड़कियों में लिंग भेद करता है तो उसे ऐसा नहीं करना चाहिए और सभी छात्रों को शिक्षा के बराबर अवसर देने चाहिए।
6. आपकी बोली और आपका बोलचाल आपके व्यवसाय को इंगित करता है एक शिक्षक होते हुए आपको कभी शिक्षण के समय या शिक्ष्ण के बाद अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
7. अक्सर माता पिता के बाद शिक्षक हैं जो शिक्षार्थी को अच्छे कार्यों की सलाह देते हैं अगर कोई भी विद्यार्थी आपके पास कोई सलाह लेने आता है तो उसे हलके से न लेकर उसे Proper Guide करें और उसे मजाक में कभी भी नहीं लेना चाहिए। इसका गलत फर्क यह पड़ता है कि बच्चे आपकी गलत सलाह को फॉलो करते हैं और वही करते हैं जो अपने मजाक में बताया है।
8. स्कुल में हर किस्म के विद्यार्थी होते हैं कमजोर, Intelligent और मध्यवर्गीय एक अच्छे शिक्षक को कभी Mediocre और कमजोर व्यक्ति को अलग -थलग नहीं करना चाहिए और उसके शिक्षण में सुधार लाने के लिए कोशिश करनी चाहिए।
9. एक शिक्षक को विद्यार्थियों के साथ कभी मजाक में भी झूठ नहीं बौलना चाइये अगर एक शिक्षक ऐसा करते हैं तो वह उन्हें कभी सचाई का पाठ नहीं पढ़ा सकते हैं।
5. ये बात एक शिक्षक के मन में और एक आम आदमी के मन में भी है कि भारत के सविंधान में लिंग भेद की मनाही है इसलिए अगर एक शिक्षक लड़के और लड़कियों में लिंग भेद करता है तो उसे ऐसा नहीं करना चाहिए और सभी छात्रों को शिक्षा के बराबर अवसर देने चाहिए।
6. आपकी बोली और आपका बोलचाल आपके व्यवसाय को इंगित करता है एक शिक्षक होते हुए आपको कभी शिक्षण के समय या शिक्ष्ण के बाद अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
7. अक्सर माता पिता के बाद शिक्षक हैं जो शिक्षार्थी को अच्छे कार्यों की सलाह देते हैं अगर कोई भी विद्यार्थी आपके पास कोई सलाह लेने आता है तो उसे हलके से न लेकर उसे Proper Guide करें और उसे मजाक में कभी भी नहीं लेना चाहिए। इसका गलत फर्क यह पड़ता है कि बच्चे आपकी गलत सलाह को फॉलो करते हैं और वही करते हैं जो अपने मजाक में बताया है।
8. स्कुल में हर किस्म के विद्यार्थी होते हैं कमजोर, Intelligent और मध्यवर्गीय एक अच्छे शिक्षक को कभी Mediocre और कमजोर व्यक्ति को अलग -थलग नहीं करना चाहिए और उसके शिक्षण में सुधार लाने के लिए कोशिश करनी चाहिए।
9. एक शिक्षक को विद्यार्थियों के साथ कभी मजाक में भी झूठ नहीं बौलना चाइये अगर एक शिक्षक ऐसा करते हैं तो वह उन्हें कभी सचाई का पाठ नहीं पढ़ा सकते हैं।