विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में शिक्षक की क्या भूमिका है ? | Know what is the role of teacher in character building of students

चरित्र निर्माण में शिक्षकों का योगदान :-

चरित्र को एक विशेषता, गुणवत्ता या उच्च नैतिक संहिता के रूप में परिभाषित किया गया है। चरित्र का एक उदाहरण वह है जो मजाकिया होने के लिए जाना जाता है। चरित्र का एक उदाहरण एक ऐसा व्यक्ति है जो भरोसेमंद है समाजिक बुराईयों दूर है। और जब एक विद्यार्थी के चरित्र निर्माण बात आती है तो हमारा ध्यान सीधे तौर से विद्यार्थी परिवार पर या फिर शिक्षक पर जाता है और जो विद्यार्थी चरित्रहीन होता है तो अक्सर लोग समाज से या फिर अन्य व्यक्तियों से ये ही सवाल करते हैं ये बच्चा किसका है या फिर किस स्कूल में पढ़ता है कहने का अर्थ यह हुआ एक विद्यार्थी के चरित्र निर्माण में जितनी भूमिका एक परिवार की है उससे अधिक योगदान एक शिक्षक का है।


एक आदर्श शिक्षक के रूप में यह एक शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभा करके कक्षा व्यवहार के लिए उपयुक्त नियम निर्धारित करता है। जब बच्चा छोटा होता है तो उसे जमीनी नियम अर्थात Basic मूल्यों का ज्ञान नहीं होता है। दूसरे शब्दों में शुरू में एक विद्यार्थी उस Clay या मिट्टी की तरह होता है जिसमें पानी डालकर हम कोई भी रूप दे सकते हैं। एक शिक्षक अपने शिक्षक मूल्यों से और अपने कौशल से बच्चों को सही रूप में त्रास कर उसे नया रूप देकर एक शिक्षक होने का कर्तव्य निभाता है।


विद्यार्थी के चरित्र निर्माण के लिए एक शिक्षक विद्यार्थी के वाल्यावस्था में अपनी कोशिशों को शुरू कर देता है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि जब एक शिक्षक विद्यार्थी को एक अच्छे चरित्र के लिए प्रोत्साहित करता है तो विद्यार्थी उस राह पर बहुत मुश्किल से आते हैं इसके पीछे कारण यह है कि एक अच्छे चरित्र निर्माण के लिए कुछ सीमाएं होती हैं और बचपन में उन सीमाओं पर चलना एक शिक्षार्थी के लिए मुश्किल होता है। पर एक शिक्षक ही विद्यार्थी को चरित्रवान होने का पाठ पढ़ाते हैं। विद्यार्थी चरित्र निर्माण में एक शिक्षक का योगदान इसलिए सर्वोपरि है क्योकि शिक्षार्थी अपने घर से जयादा समय शायद स्कुल में बिताता है इसलिए जो भी आदर्श और सांस्कार दिए हैं वह एक शिक्षक के होते हैं। शिक्षक ही है जो विद्यार्थी के अंदर के अंदर विश्वसनीयता, जिम्मेदारी, सम्मान, देखभाल, निष्पक्षता और नागरिकता का पाठ पढ़ाकर साहस, परिश्रम और अखंडता जैसे गुण एक शिक्षार्थी में लेकर आता है।

विद्यार्थी के चरित्र निर्माण लिए आदर्श शिक्षक निम्नलिखित पहलुओं पर फोकस करता है :-

  • विद्यार्थी को सही काम करने के प्रति जागरूक करके एक आदर्श शिक्षक अपनी शिक्षक की चरित्र निर्माण की भूमिका निभाता है।
  • एक आदर्श शिक्षक विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण के लिए केवल प्रयास ही नहीं करता है पर इसके साथ सही काम करने के लिए प्रतिबद्ध भी रहता है
  • चरित्र निर्माण का पहला पहलु सही और उचित काम करने में सक्षम होना है इसलिए एक शिक्षक एक विद्यार्थी को इस योग्य बनाता है वः सही काम करने में सक्षम हो और समाज में अपने चरित्र को उज्जवल करे।
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Rakesh Kumar

Rakesh Kumar From HP is interested in writing and go to the provision when where and why

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