उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जीवन परिचय और राजनीतिक बृतान्त | Biography and Political History of Former Uttar Pradesh Chief Minister Kalyan Singh in Hindi

कल्याण सिंह लोधी : जीवन परिचय, जन्म, परिवार, राजनीतिक करियर, मुख्यमंत्री कार्यकाल, बाबरी मस्जिद विवाद, राज्यपाल, मृत्यु

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पहले से ही हलचल होती रही है ये ही कारण है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति ने भारत को उत्तर प्रदेश के 9 प्रधानमंत्री दिए है। प्रधानमंत्री तो भारत का राजनीतिक मुखिया होता है इसलके इलावा उत्तर प्रदेश कि राजनीति में मुख्यमंत्री पद के लिए फेर बदल हुए हैं। जहां आज 2022 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ है वही अगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की बात करें तो दो महिला मुख्यमंत्री हुई हैं पहली सुचेता कृपलानी और दूसरी मायावती। 

आज हम उत्तर प्रदेश के उस मुख्यमंत्री के बारे में बताने जाने वाले हैं जो मायावती के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे जिनका नाम कल्याण सिंह जिनका देहांत 2021 में हुआ। आज हम कल्याण सिंह के जीवन परिचय (बायोग्राफी) और उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल से जुड़े बाबरी मस्जिद विध्वंश के ऊपर नजर डालने की कोशिश करेंगे।




कल्याण सिंह बायोग्राफी पर एक नजर :-

पूरा नाम नाम (Full Name)

कल्याण सिंह सिंह लोधी

कल्याण सिंह का जन्म

5 जनवरी 1932 में संयुक्त प्रांत (अब उत्तर प्रदेश) में अलीगढ़ जिले में हुआ था। 

पत्नी का नाम (wife Name)      

रामवती

जाति (Caste)

लोधी, राजपूत

धर्म (religion)

हिन्दू

राजस्थान के राज्यपाल बने कब तक रहे

4 सितम्बर 2014 से 8 सितम्बर 2019 तक पांच साल

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कब बने

जनवरी 2015 से 12 अगस्त 2015 तक आठ महीने के लिए

पहली बार MLA बने

1967 में

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पहला कार्यकाल

24 जून सन 1991 से 6 दिसम्बर 1992 तक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का दूसरा कार्यकाल

21 सितम्बर सन 1997 से 12 नवम्बर 1999 तक

 

पार्टी का नाम

भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय क्रांति पार्टी, जन क्रांति पार्टी

पहली बार लोकसभा सदस्य बने

2014 में

मृत्यु की तारीख (Date of Death )

21 अगस्त 2021

मृत्यु का स्थान (Place of Death)

लखनऊ उत्तर प्रदेश

मृत्यु  स्थान (Date of death & place)               

लखनऊ, उत्तर प्रदेश

मृत्यु के समय उम्र (Age at Death)

89 साल


परिवार (Family) :- कल्याण सिंह का परिवार लोधी समुदाय से सबंधित था इसलिए उन्हें कल्याण सिंह लोधी के नाम से भी जाना जाता था। उनके परिवार में उनकी पत्नी थी जिसका नाम रामवती देवी था और उनकी पत्नी का देहांत गया है। उनके पिता जी का नाम तेजपाल लोधी था और माता जी का नाम सीता देवी था। कल्याण सिंह और पत्नी रामवती के एक पुत्र हैं जिनका नाम राजवीर सिंह हैं और आज भी एक राजनीतिज्ञ हैं और भारतीय जनता पार्टी से सबंध रखते हैं। आगे उनके पोते जिनका नाम संदीप सिंह है और वे भी भारतीय जनता पार्टी से सबंध रखते हैं और एक राजनीतिज्ञ हैं। 


कल्याण सिंह का राजनीतिक करियर :-

उतर प्रदेश के विधानसभा में के रूप में राजनीतिक करियर :- कल्याण सिंह ने अपना राजैनितक शुरुआत 1967 में भारतीय जनता पार्टी से शुरू की थी जब उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का पहला चुनाव 1957 में लड़ा था उस वक्त पार्टी जनता पार्टी नहीं थी बल्कि भारतीय जनसंघ थी। उन्होंने अपना विधानसभा चुनाव 33 साल की उम्र में लड़ा था और उस वक्त उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस के उमीदवार को हराया था। 

उसके बाद उनका जीत रूपी रथ नहीं रुका था और वे 1969 से लेकर 2002 तक दस बार इलेक्शन जीते थे। अपने विधानसभा राजनीतिक करियर में वे केवल एक बार ही इलेक्शन हारे थे 1980 में जब वे कॉग्रेस के उमीदवार अनवर खान से इलेक्शन हारे थे। उत्तर प्रदेश के राजीनीति में आगे बढ़ते हुए वे 1984 में भारतीय जनता पार्टी के राज्य स्तर के अध्यक्ष भी चुने गए। लगातार तीन बार इसी पद पर बने रहने के बाद 1989 में वे उत्तर प्रदेश के विधानमंडल के अध्यक्ष चुने गए थे।


कल्याण सिंह का पहला मुख्यमंत्री कार्यकाल :-

कल्याण सिंह का मुख्यमंत्री का पहला कार्यकाल 24 जून 1991 से लेकर 6 दिसंबर 1992 तक एक साल और 165 दिन का रहा था।

पहला कार्यकाल और बाबरी मस्जिद विध्वंस :- 

सन 1990 के अंत में भाजपा और उसके हिंदू-राष्ट्रवादी सहयोगियों ने उत्तर प्रदेश अयोध्या शहर में बाबरी मस्जिद के ऊपर एक हिंदू मंदिर बनाने के अपने आंदोलन के समर्थन में एक धार्मिक रैली राम रथ यात्रा का आयोजन किया था। ये एक साधारण रथ यात्रा थी मगर ये ही रथ यात्रा एक आंदोलन में बदल गई थी। इस आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश में राजीनीतिक ध्रुवीकरण हुआ और भारतीय जनता पार्टी को इसका राजनीतिक फायदा मिला परिणामस्वरूप 1991 में जो उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हुए उसका फायदा भारतीय जनता पार्टी को हुआ। भारतीय जनता पार्टी ने 419 में से 221 सीटों पर जीत हासिल की और मुलायम सिंह यादव को भारतीय जनता पार्टी की और से मुख्यमंत्री बना दिया गया।


दरअसल उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सरकार के आते ही 1991 में उत्तर प्रदेश सरकार ने बाबरी मस्जिद के पास ही 2.77 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था इस भूमि को खरीदने का मकसद पर्यटन को बढ़ावा देना था। कुछ हिन्दू राष्ट्रवादी नेताओं ने इस भूमि का प्रयोग हिन्दू धर्म के प्रोग्रामों के लिए करने का आग्रह कल्याण सिंह से किया था और कल्याण सिंह ने हिन्दू धर्म के लोगों को इसका प्रयोग करने के लिए अनुमति दे दी थी। 


पुजारियों के पूजा के साथ समय के साथ कारसेवकों का जमावड़ा यहां पढता गया और अलग -अलग जगह से इस स्थान पर कर सेवक इकठे होने लगे। 1992 के अंत में राष्ट्र्रीय सवंसेवक संघ ने एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसमें लगभग 10 लाख से ज्यादा कर सेवक इकठे हुए थे। उस वक्त कारसेवकों के साथ भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता भी शामिल थे। कल्याण सिंह ने इसके लिए पुलिस व्यवस्था का प्रबंध भी किया था पर कारसेवकों को नहीं पाए और उन्होंने पुलिस बेरी गेट तोड़कर बाबरी मस्जिद पर हमला किया। जिसे बाबरी मस्जिद विध्वंश के नाम से जाना जाता है जो कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री काल में हुआ था।

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बाबरी मस्जिद 
विध्वंस में कल्याण सिंह को सजा :-

बाबरी मस्जिद विध्वंस कल्याण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और उसके बाद भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उनपर आरोप लगाया था की उनके आश्वाशन के बावजूद ये हमला हुआ है इसलिए भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने अवमानना के केस में उन्हें एक दिन की जेल और बीस हजार का जुर्माना लगाया था।

कल्याण सिंह का दूसरा मुख्यमंत्री कार्यकाल :- 

कल्याण सिंह का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल 21 सितम्बर 1997 से लेकर 12 नवंबर 1999 तक 2 साल का और 52 दिन का रहा था। राष्ट्रपति शासन की अवधि के बाद, नवंबर 1993 में फिर से राज्य के चुनाव हुए। सिंह ने दो निर्वाचन क्षेत्रों, अतरौली और कासगंज से चुनाव लड़ा और दोनों में जीत हासिल की। भाजपा का वोट शेयर लगभग पिछले चुनाव की तरह ही था, लेकिन उसके द्वारा जीती गई विधानसभा सीटों की संख्या 221 से घटकर 177 हो गई और समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का गठबंधन बनाने में सक्षम था। सरकार, मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री बनने के साथ यादव और मायावती के बीच गठबंधन, बसपा की नेता, 1995 में टूट गया, और मायावती भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बनीं।


1999 में कल्याण सिंह द्वारा पहले बार भारतीय जनता पार्टी  का छोड़ना :-


कल्याण सिंह की राजनीति में तब फेर बदल आया था जब उन्हें उच्च जाति की वजाये अन्य जातियों का समर्थन मिलने लगा था। उन्हें पिछड़ी जातियों के संरक्षक के रूप में देखा जाने लगा और इससे उनकी राजनीति में बदलाव आया। उन्हें भाजपा का विरोध करना पड़ा और इसी विरोध के चलते उन्होंने ने भी 1999 में 36 विधायकों के साथ भारतीय जनता पार्टी को छोड़ने का फैसला कर लिया और एक नई पार्टी का गठन कर डाला जिसका नाम राष्ट्रीय क्रांति पार्टी था। इस पार्टी का नेतृत्व करते हुए उन्होंने 2002 में पहला चुनाव लड़ा और 2002 में वे राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से इलेक्शन जीत गए। 2002 के इलेक्शन के बाद कलयाण सिंह 2004 में फिर से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।


2010 में जनता पार्टी से फिर किनारा करना :-

कल्याण सिंह ने दूसरी बार फिर से इस्तीफा दे दिया था जब वे 2010 में पार्टी से नाराज थे। 2013 में कल्याण सिंह की पार्टी जान क्रांति पार्टी भारतीय जनता पार्टी में विलय किया गया था। और कल्याण सिंह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। 

कल्याण सिंह बने थे राज्यों के गवर्नर :-

राजनीतिक घटना क्रम में कल्याण सिंह 2014 में पार्टी में वापिस होने के बाद दो बार गवर्नर बने थे पहली बार उन्हें 2014 में राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया था और दूसरी बार 2015 में उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल चुना गया था। 2019 में कल्याण सिंह ने राजीनीति लगभग अलविदा कह दिया था।

Frequently Asked Question-Related to Biography of Kalyan Singh Biography in Hindi:-

प्रश्न :- कल्याण सिंह कहां के रहने वाले थे ?
उत्तर :- कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के रहने वाले थे।

प्रश्न :- कल्याण सिंह का पूरा नाम क्या था ?
उत्तर :- कल्याण सिंह का पूरा नाम कल्याण सिंह लोधी था।

प्रश्न :- कल्याण सिंह की (शिक्षा एजुकेशन} क्या थी ?
उत्तर :- कल्याण सिंह स्नातक थे और LLB की थी ?

प्रश्न :- कल्याण सिंह कितनी बार विधानसभा चुनाव जीते थे ?
उत्तर :- कल्याण सिंह नौ बार 1969, 1974, 1977, 1985, 1989, 1991, 1993, 1996 और 2002 में विधानसभा इलेक्शन जीते थे।

प्रश्न :- कल्याण सिंह कब विधानसभा इलेक्शन हारे थे ?
उत्तर :- कल्याण सिंह एक बार 1990 में विधानसभा इलेक्शन हारे थे।

प्रश्न :- पहली बार कल्याण सिंह कब मुख्यमंत्री बने /
उत्तर :- कल्याण सिंह 24 जून 1991 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे।

प्रश्न :- कल्याण सिंह दूसरी बार कब मुख्यमंत्री बने थे ?
उत्तर :- कल्याण सिंह दूसरी बार 21 सितम्बर 1997 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे।

प्रश्न :- कल्याण सिंह हिमाचल के राज्यपाल कब बने थे ?
उत्तर :- कल्याण सिंह 2015 में हिमाचल प्रदेश के राज्य पाल बने थे।

प्रश्न :- कल्याण सिंह राज्य स्थान के राज्य पाल कब बने थे ?
उत्तर :- कल्याण सिंह 4 सितम्बर 2016 में राजस्थान के राजपाल नियुक्त किये गए थे।

प्रश्न :- कल्याण सिंह का मुख्यमंत्री कार्यकाल कितना था ?
उत्तर :- कल्याण सिंह का कुल मुख्यमंत्री कार्यकाल 3 साल और 217 दिन का था दोनों मिला के।

प्रश्न :- जब कल्याण सिंह की मृत्यु हुई तब कितनी सम्पति के मालिक थे ?
उत्तर :- कल्याण सिंह की जब मृत्यु हुई तब उनके पास 600 ग्राम सोना जिसकी कीमत 18 लाख भारतीय रुपया थी। इसके साथ उनके पास चार किलो चांदी के आभूषण थे। एक ट्रेक्टर के साथ उनकी कुल सपति की बात करें तो उनकी मृत्यु के समय उनके पास लगभग 62 लाख की सम्पति थी।

प्रश्न :- बाबरी मस्जिद विध्वंश के समय उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे भारत का प्रधानमंत्री कौन था ?
उत्तर :- बाबरी मस्जिद विध्वंश के समय जब उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे तब भारत के प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव थे।

प्रश्न :- कल्याण सिंह किसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे ?
उत्तर :- कल्याण सिंह पहली बार 1991  सिंह और दूसरी बार मायावती के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। 

प्रश्न :- बाबरी मस्जिद विध्वंश के समय उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे तब भारत का राष्ट्रपति कौन था ?
उत्तर :- बाबरी मस्जिद विध्वंश के समय उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे तब भारत का राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा थे।

प्रश्न :- कल्याण सिंह भारत के प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन पाए ?
उत्तर :- कल्याण सिंह लोधी भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े दिग्गज नेताओं में से एक थे जो अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के साथ भारत के प्रधानमंत्री के दावेदार थे पर वे भारत के प्रधानमंत्री शायद इसलिए नहीं बन पाए क्यों कि उन्होंने बीच में पार्टी छोड़ दी थी। 



Rakesh Kumar

Rakesh Kumar From HP is interested in writing and go to the provision when where and why

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