भूगोल शिक्षक के गुण, कार्यक्षेत्र, भूमिका और विशेषताएँ | Qualities, role and Characteristics of Geography teacher in Hindi

भूगोल शिक्षक के गुण, कार्यक्षेत्र, भूमिका और विशेषताएँ :- 

अगर हम शिक्षण की बात करें तो शिक्षण प्रक्रिया में सभी विषयों का एक मनोविज्ञान को छोड़ कर सभी विषयों का पाना अलग तरीका होता है जिससे एक विद्यार्थी अच्छी शिक्षा ग्रहण करता है। इतिहास का Teaching Method अपना है, अंग्रेजी का अपना है और हिंदी विषय का कार्यक्षेत्र और शिक्षण विधि अपनी है। भूगोल विषय पाठ्यक्रम का जरूरी हिस्सा है अगर इसे दूसरे शब्दों में विज्ञानं कहे तो कोई बात नहीं इसलिए भूगोल विषय के शिक्षण के लिए अक अच्छे भूगोल शिक्षक की जरूरत होती है। आइये जानते हैं एक भूगोल शिक्षक के कार्यक्षेत्र, गुण, भूमिका और विशेषताओं के बारे में उसके अंदर कौन कौन से गुण होने जरूरी हैं।




भूगोल के शिक्षक का कार्यक्षेत्र :- एक भूगोल के शिक्षक का कार्यक्षेत्र संकुचित नहीं है अर्थात सीमित नहीं है। अगर एक अध्यापक भूगोल का शिक्षण करवाता है तो उसका कार्यक्षेत्र इतना बड़ा है जितना ब्रहमाण्ड (Universe} है। अगर आप विद्यार्थी के पाठ्क्रम में मान लो तारों के बारे में या फिर चाँद के बारे में समझाना है तो आपको एक टारे और चाँद के बारे में समझाने से पहले Universe अर्थात ब्राहमंड के बारे में समझाना पड़ेगा। 

अगर पूरा ज्ञान नहीं तो कम -से -कम एक भूगोल के शिक्षक को उसके बारे में Motivation के लिए बच्चों को कुछ तो समझाना पड़ेगा। जो भी इस संसार में है वह सभी भूगोल ही तो है फिर भूगोल शिक्षक का कार्यक्षेत्र संकुचित नहीं हो सकता है। एक भूगोल के शिक्षक के अंदर यह गुण होना चाहिए कि वह हर कड़ी को आपस में जोड़े और उसी अनुसार वैज्ञानिक तरीके से अपने भूगोल शिक्षण के कार्यकम को अंजाम दे। अगर आप यातायात के साधनों के बारे में समझाते है तो उसके साथ, आपको सड़क और परिवहन के बारे में भी ज्ञान होना जरूरी है।

भूगोल शिक्षक के गुण,भूमिका और विशेषताएँ | Qualities, Roles and Characteristics of Geography Teacher


1. अपने विषय का सही ज्ञान :- 


भूगोल के शिक्षक को अपने विषय का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। पहले ही बताया गया है कि भूगोल एक साइंस है और अगर आपको अपने विषय का ज्ञान नहीं है तो आवश्य ही आप अपने Syllabus को Cover नहीं कर पाओगे। Syllabus ही नहीं आपके द्वारा पढ़ाया गया Topic बच्चों के मन में लगत बैठ जायेगा और फिर बच्चे उसी ज्ञान को आगे बाँटेंगे। मान लो एक भूगोल के शिक्षक को इस बात का अंदाजा नहीं है या ज्ञान नहीं है कि धरती घूमती है और सूर्य स्थिर है और वह बच्चे को को यह ही सिखा देता है तो अभिवावक अगर अनपढ़ हो तो वे भी इसी का अनुसरण करेंगे और जब उसे बाद में समझाने की कोशिश की जाएगी तो वह मुश्किल होगा।


2. Play Way Method का अनुसरण :-  

अब आप सोचते होंगे की मैं तो दसवीं जमात के विद्यार्थी का भूगोल का शिक्षक हूँ मुझे Play way Method से क्या मतलब तो यह गलत है। इसका उदाहरण में आपको देता हूँ मान लो हम बच्चे को दिशाओं के बारे में ज्ञान दिया जाता है जो भूगोल विषय के पाठ्यक्र्म का अभिन्न अंग है। बच्चों को बचपन से सिखाया जाता है सूर्य पूर्व से निकलता है पर पश्चिम में अस्त होता है। अब आप दसवीं के छात्र को, दिन 12 वजे ग्राउंड में लेकर जाओ और उसे चार दिशाओं के बारे में पूछो वह निशन्देह नहीं बता पाएगा। इसके लिए आपको Play Way Method ही अपनाना पड़ेगा और ऐसा दो या तीन बार करने पर शिक्षक अवश्य समझ जायेगा। इसी तरह अगर आप मिटटी की किस्म के बारे में समझा रहे हैं तो किताब में पढ़ाने की वजाये Ground में लेकर जायो और उस समझाओ की हम किस मिट्टी में रह रहे हैं।



3. मिथ्या तथ्यों से दूर रहना :- 

एक भूगोल के शिक्षक के अंदर ये गुण और विशेषता होनी चाहिए की वह हमेशा मिथ्या तथ्यों से दूर रहे। किसी भी धर्म में यह जरूर गया होगा चन्द्र देवता है यह एक धार्मिक तथ्य है और उस धर्म की आस्था के साथ जुड़ा हुआ है पर जब एक भूगोल का शिक्षक चंद्र (Moon) के बारे में Teaching करवाता है तो उसे बच्चों को ये ही समझाना चाहिए चाँद एक उपग्रह है और यह सूर्य के इर्द गिर्द घूमता है। हाँ यह जरूरी है बाद में ये समझाया जाये की सूर्य को हिन्दू धर्म में देवता मानते है। अगर आप भूगोल के शिक्षण में पहले पहले नई बतायेगे की यह एक देवता है तो शिक्षण वहीँ रुक जायेगा।



4. भूगोल का शिक्षक आधुनिक भूगोल का ज्ञाता होना चाहिए :-

एक भूगोल के शिक्षक को वैसे तो सभी भौगोलिक स्थिति का पता होना चाहिए पर इसे आधुनिक भूगोल का ज्ञाता होना बहुत ही जरूरी है। आधुनिक भूगोल का अर्थ है उसे इस बात का पता होना चाइये कि समय के साथ भूगोल में क्या बदलाव आये हैं। भूगोलिक स्थिति में बदलाव आना स्वाभाविक है कहीं भूचाल आते है भौगोलिक स्थिति बदल जाती है कहीं, देश का विभाजन होता है भौगोलिक स्थिति में बदलाव होता है इसलिए एक भूगोल के शिक्षक के अंदर ये गुण और विशेषता होना भी जरूरी है कि वह आधुनिक भूगोल का ज्ञान रखे। 



5.बाल मनोविज्ञान का ज्ञान :- 

बाल मनोविज्ञान सभी विषयों के शिक्षण के लिए जरूरी है पर एक भूगोल के शिक्षक के लिए इसका बहुत महत्व है। बाल मनोविज्ञान के माध्यम से एक भूगोल का शिक्षक इस बात का अंदाजा लगा सकता कि उसे अगर Map की study करवानी है तो किस स्तर पर करवाई जाये। क्या वह एक जटिल विधि से सीखेगा या फिर सरल विधि का प्रयोग किया जाये। इसलिए भूगोल के शिक्षक के अंदर बाल शिक्षा और मनोविज्ञान का knowledge होना एक जरूरी गुण और विशेषता है।


6. अन्य विषयों का ज्ञाता :- 

एक भूगोल के शिक्षक होने के नाते आपके अंदर यह गुण या विशेषता बहुत ही जरूरी है कि वह अन्य विषयों के बारे में भी ज्ञान रखे। भूगोल विषय का कार्यक्षेत्र Wide है और कहीं- न - कहीं भूगोल का Topic किसी न किसी पाठ्यक्रम में मिल जाता है। इसलिए अगर आपको अन्य विषयों के बारे में ज्ञान हो तो आप कभी उस शिक्षक की जगह Appoint किये जाते हैं तो आपको शिक्षण में कोई भी problem नहीं होगी।

7. बदलते मौसम और ऋतुओं के अनुसार शिक्षण :- 

भूगोल के शिक्षक के लिए यह जरूरी है कि वह बदलते हुए मौसम और ऋतू के अनुसार शिक्षण करवाए। इसका फायदा यह होता है बच्चे उसे याद रखते हैं। आप सोचते होंगे पाठ एक तो परिवहन से सबंधित है तो फिर मौसम और ऋतू के अनुसार केस पढ़ाया जाये तो। भूगोल के पाठ्यक्रम में पाठ पांच तो ऋतू या मौसम से सम्बंधित हो सकता है इसलिए एक भूगोल के शिक्षक के अंदर ये गुण भी जरूरी है कि बदलते हुए हालत के अनुसार शिक्षण किया जाये तो अच्छा है।


8. स्वच्छ मूल्यांकन विधि वाली सोच :- 

वैसे आज कल आठवीं जमात तक सरकार ने बच्चे को फेल शब्द से दूर रखा है इसके पीछे कारण बच्चे का Dropout है। और सरकार ने मूल्यांकन विधि को अपनाया है। आपके अंदर एक भूगोल के शिक्षक होने के नाते, यह गुण और विशेषता होनी चाहिए कि आप सही मूल्यांकन करे ताकी शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाया जा सके। अपनी A. C. R में अच्छी Grading को ऊपर उठाने की वजाये आप एक बच्चे की अच्छी Grading करें तो अच्छा रहेगा।


9. मॉडल, मानचित्र,नक़शे या भौगोलिक चित्र का सही ज्ञान :- 

ये भूगोल विषय शिक्षण का महत्वपूर्ण भाग है कि अगर आप एक भूगोल के शिक्षक हो तो आपके अंदर यह ज्ञान जरूरी है कि एक मानचित्र को कैसे Elaborate किया जाये। नक़्शे की कितनी किस्में होती है हर पहलु को एक नक्शे से जोड़ा जाये या फिर मानचित्र से जोड़ा जाये तो अच्छा है इससे विद्यार्थियों को एक तो Topic याद रहेगा और दूसरा विद्यार्थी को उस जगह का ज्ञान भी हो जायेगा। इसलिए भूगोल के शिक्षक के अंदर ये विशेषता भी जरूरी है कि उसे मॉडल, मानचित्र,नक़शे या भौगोलिक चित्र का सही ज्ञान हो जिससे शिक्षण विधि को आसान बनाया जा सके।


10. भूगोल का शिक्षक भौगोलिक कारणों का ज्ञाता होना चाहिए :- 

एक भूगोल के शिक्षक होते हुए आपको इस बात बात का पता होना चाहिए कि किस concept में क्या छुपा है अर्थात आपको एक विषय के जन्म से लेकर अंत तक का ज्ञान होना जरूरी है बच्चे हमेशा ये सवाल पूछते हैं Sir ये कैसे हुआ। जैसे मान लो जापान में सुनामी आयी थी तो आप सुनामी के बारे में पढ़ाते हैं तो उसके कारणों का पता होना जरूरी है ये नहीं की सुनामी समुन्द्र में आती है और बात ख़तम। सुनामी के पीछे क्या कारण है उसका ज्ञान होना चाहिए। इसी तरह अन्य विषयों के कारणों का ज्ञान भी आपको होना जरूरी है।


11. विभिन्न पहलुओं का ज्ञान ;- 

एक शिक्षक भूगोल के शिक्षक को आयात, निर्यात, सड़क ग्रह, उपग्रह, ग्लोब, मानचित्र, पहाड़, नदियां, छोटा, बड़ा आदि सभी विषयों के बारे में ज्ञान होना चाहिए। अगर आपके अंदर यह ज्ञान है तो आप विषय के साथ लगते अन्य Topic का अध्यापन आसानी से करवा सकते हैं। इसलिए एक भूगोल के शिक्षक के अंदर यह विशेषता जरूरी है कि वह हर पहलु पर खरा उतरे। 


12. अपने विषय प्रति श्रद्धा और प्यार :- 

अच्छा अध्यापक और शिक्षक वही है जो अपने विषय के साथ प्यार करता है और अपने विषय के साथ श्रद्धा रखता है इसलिए एक भूगोल के शिक्षक होते हुए आपके अंदर यह गुण और विशेषता भी जरूरी है कि आप अपने विषय से प्रेम करें


13. भौगोलिक वस्तुओं में रूचि रखना :- 

एक भूगोल के शिक्षक के अंदर यह गुण होना भी जरूरी है कि वह भौगोलिक वस्तुओं में रूचि रखे हर वस्तु को धार्मिक रूप से न देख कर उसे भूगोल की दृष्टि से देखा जाये। मान लो अगर आप एक भूगोल के शिक्षक हैं और आपके स्कूल का tour अमृतसर जाता है। तो आप सिख धर्म के धार्मिक स्थान के ज्ञान के वाद खाना खाते समय एक भूगोल के अध्यापक होने के नाते ये पूछ सकते हैं अमृतसर की कोई दो विशेषतायें बताओ। उस स्थान को भौगोलिक दृष्टि से देखना एक भूगोल के अध्यापक के लिए बहुत जरूरी है।

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Note :- इस पोस्ट में जो एक भूगोल शिक्षक के गुण, कार्यक्षेत्र, भूमिका और विश्श्ताओं की बात कही गई है वे सधारण वाक्य थे अगर आप एक भूगोल के शिक्षक हो तो आपके अंदर इस गुण का होना बहुत जरूरी है कि आपके द्वारा पढ़ा भूगोल,बच्चा किस मुकाम पर पहुंचा है आपका शिक्षण तभी कामयाब समझा जायेगा। धन्यवाद




Rakesh Kumar

Rakesh Kumar From HP is interested in writing and go to the provision when where and why

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