आपातकाल : राष्ट्रीय आपातकाल, वित्तीय आपातकाल और राज्य आपातकाल | Information about emergency and its types in Hindi

भारत में राष्ट्रपति आपात काल के प्रकार

आपात काल के प्रकार:- आपातकाल की तीन किस्में होती हैं राष्ट्रीय आपातकाल, वित्तीय आपातकाल और राज्य आपातकाल। आपातकाल को दूसरे शब्दों में राष्ट्रपति शासन भी कहा जाता है। देश में आपातकाल उस परिस्थिति में लगता है जब देश में सरकारी तंत्र या राज्य का तंत्र फैल हो जाए। इस आर्टिकल में हम आपातकाल के तीन प्रकारों (Types of Emergency) के बारे में जानने की कोशिश करेंगे।



Types of Emergency in India in Hindi

A. अनुच्छेद 352 :- राष्ट्रीय आपातकाल 


भारतीय सविंधान के अनुच्छेद 352 में ये प्रावधान है कि भारत के राष्ट्रपति देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकते अगर उन्हें लगे की देश किसी बाहरी संकट जैसे युद्ध या फिर बहरी आक्रमण से गुजर रहा है। दूसरे शब्दों में अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रीय आपातकाल तब लगाया जाता है जब विदेशी या घरेलू स्रोतों से किसी राष्ट्र के लिए खतरे या खतरे से उत्पन्न आपातकाल की स्थिति पैदा हो।


किन परिस्थितयों में 352 के तहत आपातकाल की घोषणा की जाती है :- 


भारतीय सविंधान के अनुच्छेद 352 के तहत, राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है जब भारत या उसके एक हिस्से की सुरक्षा को युद्ध या बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से खतरा हो।सशस्त्र विद्रोह या बाहरी आक्रमण की वास्तविक घटना से पहले ही भारत के राष्ट्रपति, राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।


राष्ट्रीय आपातकाल की दो प्रकार |  Types of national emergency


भारत के अनुच्छेद 352 के तहत जो राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जाती है उसके भी दो प्रकार हैं। पहले जब 'युद्ध' या 'बाहरी आक्रमण' के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जाती है, तो इसे 'बाहरी आपातकाल' के रूप में जाना जाता है। दूसरी ओर, जब इसे 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर घोषित किया जाता है, तो इसे 'आंतरिक आपातकाल' के रूप में जाना जाता है।


तीन बार हुई भारत में 352 के तहत आपातकाल की घोषणा | Emergency was declared thrice in India under 352

भारत्त में तीन बार ऐसी परिस्थिति उत्पन हुई है जब देश में 352 के तहत आपातकाल की घोषणा करनी पड़ी थी। पहली बार जब भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू थे और भारत के राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद थे। ये आपातकाल 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध के समय लगाया गया था। ये राष्ट्रीय आपातकाल देश में "बाहरी आक्रमण या युद्ध" के आधार पर घोषित किया गया था। दूसरी बार राष्ट्रीय आपातकाल 1971 में लगाया गया था जब भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी थे जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था। 


ये आपातकाल भी बाहरी आक्रमण के खतरे से या युद्ध की स्थिति में लगाया गया था। ये दोनों आपातकाल देश में किसी दूसरे देश के बाहरी आक्रमण के आधार पर लगाया गया था जिसे बाहरी आपातकाल के नाम से जाना जाता है। इसके इलावा भारत में आंतरिक आपातकाल की घोषणा भी एक बार हुई थी जब 1975 में भारत के राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद थे। ये आपातकाल आंतरिक आपातकाल था और देश में आंतरिक स्थिति स्थिर न होने की वजह से लगाया गया था। 


इस आंतरिक आपातकाल के बाद भारत के सविंधान में 44 वे संसोधन के तहत ये बदलाव कर दिया गया था कि देश में 352 के तहत आपातकाल की घोषणा उन्ही परिस्थितियों में हो सकती है जब "बाहरी आक्रमण या युद्ध" या फिर "सशस्त्र विद्रोह" का खतरा हो।


अनुच्छेद 352 के तहत क्या जरूरी है आपातकाल लागु करने के लिए 


ऐसा भी नहीं है कि 352 के तहत भारत में आपातकाल की घोषणा राष्ट्रपति अपने हितों के लिए लगा सकते हैं ऐसा करने के लिए राष्ट्रपति को ऐसी उद्घोषणा करने से पहले दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से एक महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना जरूरी है। यदि आपातकाल की उद्घोषणा ऐसे समय में जारी की जाती है जब लोक सभा भंग कर दी गई हो या उद्घोषणा को मंजूरी दिए बिना एक महीने की अवधि के दौरान विघटन हो जाता है, तो उद्घोषणा लोकसभा की पहली बैठक के बाद 30 दिनों तक जीवित रहती है। 


इसका पुनर्गठन, बशर्ते राज्य सभा ने इस बीच इसे मंजूरी दे दी हो। यदि संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित किया जाता है तो ये आपातकाल 6 महीने तक जारी रहता है। अगर इस आपातकाल को आगे बढ़ाना हो तो फिर संसद की मंजूरी लेना जरूरी है गर संसद ऐसे आपातकाल को बार - बार मंजूरी देती है तो इसे अनिश्चित काल तक बढ़ाया जा सकता है। आपातकाल की उद्घोषणा या उसके जारी रहने का अनुमोदन करने वाला प्रत्येक प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन द्वारा विशेष बहुमत से पारित किया जाना जरूरी होता है।


राष्ट्रीय आपातकाल के प्रभाव | Effects of National Emergency


ऐसा नहीं है आपातकाल की घोषणा का राजनीतिक व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है पर इसका व्यापक प्रभाव किसी भी देश के तंत्र पर पड़ता है। राष्ट्रीय आपातकाल के लागु होने से केंद्र और राज्यों के सबंधों में एक गहरा प्रभाव पड़ता है। पहला प्रभाव ये पड़ता है कि केंद्र किसी राज्य को 'किसी भी' मामले पर कार्यकारी निर्देश देने का हकदार बन जाता है। 

दूसरा राज्यों का कानून बनाने का हक छिन जाता है और संसद के पास ये हक होता है कि वह किसी भी राज्य के लिए, राज्य सूची के अधीन कानून का निर्माण का सकता है। जब तक राष्ट्रीय आपातकाल लागु रहता है तब तक अर्थात 6 महीने तक राज्य पर ये कानून लागु रहता है उसके बाद ये निष्क्रिय हो जाता है।


इसके इलावा भारत के सविधान के अनुच्छेद 358 के अनुसार भारत के नागरिक को जो अनुछेद 19 के तहत मौलिक अधिकार दिए गए होते हैं वे राष्ट्र्रीय आपातकाल के समय स्वतः निलंबित हो जाते हैं और तब तक निलंबित रहते हैं जब तक राष्ट्रीय आपातकाल समाप्त नहीं हो जाता है। अनुच्छेद 359 के तहत, राष्ट्रपति को आदेश द्वारा, राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए किसी भी अदालत में जाने के अधिकार को निलंबित करने का अधिकार है। 


पर भारत में 44 वे संसोधन में ये अधिनियम पारित किया गया था कि राष्ट्रीय आपातकाल के समय नागरिक के अनुच्छेद 20 और 21 के तहत अधिकार को खत्म नहीं किया जा सकता है और नागरिक अदालत में जा सकता है।



B. राष्ट्रपति शासन या स्टेट इमरजेंसी :- अनुच्छेद 356


भारत के संविधान की धारा 356 भारत सरकार अधिनियम, 1935 की धारा 93 पर आधारित है। अनुच्छेद 356 के अनुसार संवैधानिक तंत्र की विफलता के आधार पर भारत के किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है और आपातकाल की घोषणा की जा सकती है। यह दो प्रकार का होता है: यदि राष्ट्रपति को राज्य के राज्यपाल से एक रिपोर्ट प्राप्त होती है या वह आश्वस्त या संतुष्ट होता है कि राज्य की स्थिति ऐसी है कि राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार सरकार का प्रयोग नहीं कर सकती है। 

अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को एक उद्घोषणा जारी करने का अधिकार देता है यदि वह संतुष्ट है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें किसी राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल सकती है।


यदि राष्ट्रपति संबंधित राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर या अन्य स्रोतों से संतुष्ट हैं, कि किसी राज्य में शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, तो राज्यपाल राज्य में आपातकाल की घोषणा कर सकता है। ऐसी आपात स्थिति को संसद द्वारा दो महीने की अवधि के भीतर अनुमोदित किया जाना चाहिए।



भारत में स्टेट इमरजेंसी | भारत में राज्य आपातकाल 

किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए संसदीय स्वीकृति आवश्यक है। राष्ट्रपति शासन की घोषणा को संसद के दोनों सदनों में इसके जारी होने के दो महीने के भीतर मंजूरी मिल जानी चाहिए। भारत में स्टेट एमेर्जेन्सी की बाते करें तो 29 राज्यों में और केंद्र शासित प्रदेशों में इनकी गिनती अलग - अलग है। सबसे जयादा या अधिक बार राज्य आपातकाल की बात करें तो आज तक सबसे ज्यादा बार स्टेट एमर्जेन्सी भारत के मणिपुर राज्य में लगा है इस राज्य में 10 बार स्टेट एमर्जेन्सी लगाई गई है। वहीँ उत्तर प्रदेश में 9 बार और बिहार में आठ बार स्टेट एमर्जेन्सी इम्पोस की गई थी। 



C. वित्तीय आपातकाल - अनुच्छेद 360 | Financial Emergency - Article 360

भारत सविधान अनुछेद 360 में ये प्रोविजन है की भारत का राष्ट्रपति वित्तीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है अगर उन्हें लगे की भारत की अर्थव्यवस्था संकट में है या फिर ऐसी परिस्थिति उत्पन हो गई है। ऐसा आपातकाल ज्यादातर वित्तीय अस्थिरता के कारण ही फैलती है। इस उद्घोषणा की भी एक शर्त है कि इस तरह का आपातकाल लागु करने के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से 2 महीने के अंदर ससंद का अनुमोदन जरूरी होता है।


संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित होने के बाद, वित्तीय आपातकाल अनिश्चित काल तक जारी रहता है जब तक कि इसे रद्द नहीं किया जाता है। यदि वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा ऐसे समय में जारी की जाती है जब लोकसभा भंग कर दी जाती है या लोकसभा का विघटन उद्घोषणा को मंजूरी दिए बिना दो महीने की अवधि के दौरान होता है, तो उद्घोषणा पहले से 30 दिनों तक जीवित रहती है। इसके पुनर्गठन के बाद लोकसभा की बैठक, बशर्ते राज्य सभा ने इस बीच इसे मंजूरी दे दी हो।


FAQ :- 

प्रश्न :- भारत में कितनी बार राष्ट्रीय आपातकाल लगाया गया है ?

उत्तर :- भारत में अभी तक तीन बार राष्ट्रीय आपातकाल लगाया गया है पहली बार 26 26 अक्टूबर 1962 में जब भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू थे और भारत के राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंदर प्रसाद थे। ये राष्ट्रीय आपातकाल भारत और चीन युद्ध के दौरान लगाया गया था। दूसरी बार 3 दिसम्बर 1971 में लगा था जब भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी थी और भारत के राष्ट्रपति वी वी गिरी थे। तीसरी बार राष्ट्रीय आपातकाल आंतरिक शांति के लिए खतरे के कारण 25 जून 1975 में लगाया गया था जब भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी थी।


प्रश्न :- भारत में कितनी बार वित्तीय आपातकाल लगा है ?

उत्तर :- भारत में आज तक 2022 तक वित्तीय आपातकाल की घोषणा नहीं की गई है।


प्रश्न :- राष्ट्रपति शासन लगने के बाद क्या होता है?

उत्तर :- राज्यपाल राष्ट्रपति की ओर से राज्य के प्रशासन का कार्य करता है। वह राज्य के मुख्य सचिव और अन्य सलाहकारों / प्रशासकों की मदद लेता है जिन्हें वह नियुक्त कर सकता है। राष्ट्रपति के पास यह घोषणा करने की शक्ति है कि राज्य विधानमंडल की शक्तियों का प्रयोग संसद द्वारा किया जाएगा। राज्य विधान सभा या तो राष्ट्रपति द्वारा निलंबित या भंग कर दी जाएगी।जब संसद का सत्र नहीं चल रहा हो, तो राष्ट्रपति राज्य के प्रशासन के संबंध में अध्यादेश जारी कर सकता है।


प्रश्न :- राष्ट्रपति शासन कब लगाया जाता है ?

उत्तर :- यह देखा गया है कि राष्ट्रपति शासन तब लगाया गया है जब राज्य का राज्य पाल ये सुनिश्चित करे कि राज्य आंतरिक स्थिति मजबूत नहीं है या फिर राजयपाल को ऐसा अनुभव हो कि राज्य में कोई भी दल सरकार बनाने में असमर्थ है। 

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Rakesh Kumar

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