यह अकेले दक्षिण भारत के बारे में नहीं है कि भारत के दक्षिण भारत से ही भारत में प्रधानमंत्री कम हुए हैं पर कोई भी पीएम की बात करता है तो बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे बड़े राज्यों को भी धयान में रखना चाहिए। ये चारों बड़े राज्य हैं और लोकसभा की भी अच्छी खासी सीटें है पर यहां से भी बिहार से तो पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद हुए हैं पर प्रधानमंत्री कम ही गए हैं। जानते हैं कुछ कारणों के बारे में जिससे ये पता चलता है कि दक्षिण भारत से इतने काम प्रधानमंत्री हुए हैं।
दक्षिण भारत से बहुत कम प्रधान मंत्री होने के कारण | Having very few Prime Ministers from South India Why ?
पहला कारण ये कि यूपी भारतीय राजनीति की धुरी है और दूसरा कारण ये भी हो सकता है यहां से लोकसभा की सबसे जयादा सीटें हैं शायद इसलिए ज्यादातर पीएम यूपी से आए हैं। यहां तक कि नरेंद्र मोदी, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे अन्य राज्यों में पैदा हुए नेताओं ने भी यूपी से चुनाव लड़ा था, जब उन्हें बीजेपी का उम्मीदवार घोषित किया गया था।
दूसरा कारण ये भी हो सकता है कि आजादी से पहले का उत्तर भारत का आजादी के लिए योगदान दक्षिण भारत से बेहतर हो और उत्तर प्रदेश आजादी से पहले एक सयुक्त प्रान्त था जिसका आजादी का इतिहास बहुत लंबा है। आजादी के बाद उत्तर प्रदेश टुटा या फिर उत्तराखण्ड बनाया गया। उसके बाद भी उत्तर प्रदेश देश का जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य बना रहा।
तीसरा कारण ये हैं कि दक्षिण भारत से राजनीति में भी कोई दिग्गज नेता आजादी के बाद सामने नहीं आये नेहरू- गांधी परिवार ने दशकों तक भारत पर शासन किया है और वे यूपी से हैं। उनके कई मुख्य राजनीतिक चैलेंजर यूपी से भी आए हैं जैसे चौधरी चरण सिंह, वीपी सिंह, चंद्रशेखर आदि। यह एक कारण है कि यूपी ने भारत को इतने पीएम दिए हैं।
चौथा कारण इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है किआज दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्से (एक हद तक कर्नाटक और केरल को छोड़कर) पर क्षेत्रीय दलों का शासन है। और भारत की राजनीति और लोग पहले से क्षेत्रीय नेता के बार-बार पीएम बनने की उम्मीद नहीं कर सकते। तमिलनाडु ने 1967 के बाद से राष्ट्रीय दल की सरकार नहीं चुनी है और यह एक कारण है कि जब भी एच डी देवगौड़ा जैसे नेता पीएम की दौड़ से बाहर रखा गया था।
भारत की राजनीति ने दक्षिण भारत से आंध्र और कर्नाटक से एक -एक प्रधानमंत्री दिए हैं पर इसके पीछे भी एक मुश्किल ये थी कि उन्हें पांच साल का कार्यकाल मुश्किल से पूरा करना पड़ा। शायद भाषाई अन्तर या फिर दक्षिण भारत में हिंदी भाषा का बोलबाला बी जयादा कारण हो सकता है।
भारत में दक्षिण भारत से कम प्रधानमंत्री क्यों हुए हैं ?
पांचवां कारण ये भी हो सकता है कि दक्षिण भारत की उत्तर भारत की वजाये आबादी बहुत कम है और इक चौथाई से भी कम हैं। भारत एक लोकतंत्रीय देश है और लोकतंत्र में लोकों को एहमियत दी जाती है अर्थात चुने हुए नुमाइंदे सरकार चलाते हैं ये ही कारण ही दक्षिण भारत से भारत में प्रधानमंत्री कम हुए हैं।
दक्षिण स्वतंत्र नदियों और संस्कृतियों की एक श्रृंखला से बना है। इस प्रकार, कोई एक पार्टी या नेता नहीं है जो अधिकांश दक्षिण को प्रभावित कर सके। राष्ट्रीय दलों में ऐसे कई नेता नहीं हैं जो दक्षिण से हैं। दक्षिणी राज्य जनसंख्या में छोटे हैं और उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तरी राज्यों की तुलना में कम संसदीय सीटें हैं।
दक्षिण स्वतंत्र नदियों और संस्कृतियों की एक श्रृंखला से बना है। इस प्रकार, कोई एक पार्टी या नेता नहीं है जो अधिकांश दक्षिण को प्रभावित कर सके। राष्ट्रीय दलों में ऐसे कई नेता नहीं हैं जो दक्षिण से हैं। दक्षिणी राज्य जनसंख्या में छोटे हैं और उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तरी राज्यों की तुलना में कम संसदीय सीटें हैं।
इस प्रकार, वे राष्ट्रीय परिणामों को उतना नहीं बदलते जितना उत्तर करता है। दक्षिण भारत में भाषा का अंतर एक नेता के लिए दक्षिणी दर्शकों और उत्तर दोनों को आकर्षित करना कठिन बना देता है। नेताओं को कई भाषाओं से परिचित होने की जरूरत है जैसे नरसिम्हा राव और राजगोपालाचारी ने स्थानीय लोगों और बाहरी लोगों दोनों तक पहुंचने के लिए क्या किया। दूसरी ओर, कामराज के लिए तमिलनाडु पर प्रभुत्व होने के बावजूद उत्तर तक पहुंचना मुश्किल था।
निष्कर्ष :- इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि दक्षिण भारतीय भारत के प्रधान मंत्री बन सकते हैं और बने भी हैं। अगर हम राजनीति की बात करें तो प्रजातंत्र ने उत्तर भारत ने भारत को जयादा प्रधानमंत्री दिए हैं तो जहां अकेले उत्तर प्रदेश से 9 प्रधानमंत्री और उत्तर भारत से राष्ट्रपतियों की बात करें तो अभी तक छे राष्ट्रपति भारत को दिए हैं इसके इलावा आरबीआई गवर्नर, सेना के जनरल और अन्य अधिकारी भी हमें दक्षिण भारत से ही मिले। इस लेख का अर्थ भारत में किसी भी किस्म का मतभेद पैदा करना नहीं है पर एक जनरल से कांसेप्ट को आपके सामने लाना है।
निष्कर्ष :- इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि दक्षिण भारतीय भारत के प्रधान मंत्री बन सकते हैं और बने भी हैं। अगर हम राजनीति की बात करें तो प्रजातंत्र ने उत्तर भारत ने भारत को जयादा प्रधानमंत्री दिए हैं तो जहां अकेले उत्तर प्रदेश से 9 प्रधानमंत्री और उत्तर भारत से राष्ट्रपतियों की बात करें तो अभी तक छे राष्ट्रपति भारत को दिए हैं इसके इलावा आरबीआई गवर्नर, सेना के जनरल और अन्य अधिकारी भी हमें दक्षिण भारत से ही मिले। इस लेख का अर्थ भारत में किसी भी किस्म का मतभेद पैदा करना नहीं है पर एक जनरल से कांसेप्ट को आपके सामने लाना है।
उत्तर :- भारत दक्षिण भारत से दो प्रधानमंत्री बने है जिनका नाम नरसिम्हा राव और एच डी देवगौड़ा था जिसमें नरसिम्हा राव भारत के नौवें प्रधानमंत्री और दक्षिण भारत के पहले राष्ट्रपति थे जो भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्र शेखर के बाद 21 जून 1991 में भारत के प्रधानमंत्री बने थे। दूसरे दक्षिण भारत से प्रधानमंत्री एच् डी देवगौड़ा थे जिन्होंने मात्र 324 दिन का कार्यकाल पूरा किया था और पांच साल भी भारत के प्रधानमंत्री नहीं बने।
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