भारत में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया :-
Indian President Election Process in Hindi :- भारत में राष्ट्रपति पद एक गौरवमई पद है जब से भारत एक गणत्रन्तीय देश बना है तब से भारत में जनवरी 1950 से भारत के राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं। जब भारत आजाद हुआ और 26 जनवरी को गणतंत्रीय देश बना तब भारत के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद निर्वरोध राष्ट्रपति चुने गए थे जिन्होंने आज भी भारत में सबसे ज्यादा समय काल के लिए राष्ट्रपति पद रहने का गौरव प्राप्त है।
भारत में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए और उप - राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी एक क्रिया है एक सिस्टम है जिसके द्वारा राष्ट्रपति और उप - राष्ट्रपति पद का चुनाव किया जाता है। आइये हिंदी पुकार के माध्यम से जानते हैं भारतीय राष्ट्रपति और उप - राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है उसके पीछे क्या सविंधानिक शर्तें होती है क्या योग्यताएं होनी चाहिए।
भारतीय राष्ट्रपति और उप - राष्ट्रपति चुनाव पद्ति | Indian President and Vice - President Procedure in Hindi
भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए संवैधानिक प्रावधान :-
1. भारत में राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 की धारा 4 की उप-धारा (3) के प्रावधानों के तहत, उक्त अधिनियम की धारा 4 की उप-धारा (1) के तहत चुनाव बुलाने की अधिसूचना भारतीय चुनाव आयोग दूसरा की जाती है। ये अधिसूचना राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति का कार्यकाल ख़त्म होने से पहले की जाती है ताकि चुनाव सुचारु रूप से किये जा सकें।
2. भारत में राष्ट्रपति और उप -राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य, 28 राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य और दिल्ली, पुडुचेरी और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
3. भारतीय सविंधान सत्तरवां संसोधन 1992 में हुआ था इस अधिनियम के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी सहित] ( अनुच्छेद 54)। संसद के किसी भी सदन या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी सहित राज्य की विधानसभाओं के लिए मनोनीत सदस्य इलेक्टोरल कॉलेज में शामिल होने के पात्र नहीं होते हैं अर्थात भारतीय राष्ट्रपति चुनाव और उप -राष्ट्रपति चुनाव में भाग नहीं ले सकते हैं।
4. भारतीय संविधान में सत्तरवां संशोधन संसोधन अधिनियम, 1992 की धारा 2 के तहत संविधान के अनुच्छेद 54 के तहत स्पष्टीकरण में संशोधन किया गया था। संशोधित में ये स्पष्टीकरण था कि अनुच्छेद 55 में "राज्य" में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी शामिल हैं। इसके बाद भारत के केंद्र शासित प्रदेशों को भारतीय राष्ट्रपति चुनाव और उपराष्ट्रपति चुनाव में शामिल किया गया था।
5. भारतीय सविंधान अनुच्छेद 55 के अनुसार भारत के राष्ट्रपति चुनाव और उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एकरूपता स्थापित की गए और उसी एकरूपता के आधार पर ये चुनाव होते हैं। एकरूपता का अर्थ भारत में राष्ट्रपति चुनाव के लिए लोकसभा के जो सदस्य, राज्य सभा के जो सदस्य, विभिन्न राज्यों से जो सदस्य और दिल्ली और पुडुचेरी से जो सदस्य चुन के आते हैं उनके लिए राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक सूत्र दिया जाता है जिसे वोट मूल्य कहते हैं उसी के तहत इलेक्शन करवाए जाते हैं ताकि समानता बनी रहे। इस एकरूपता को स्थापित करने के लिए भारत में राष्ट्रपति चुनाव पर उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट मूल्य राज्य की जनसँख्या के हिसाब से तय किया जायेगा।
6. भारत में राष्ट्रपति चुनाव और उप- राष्ट्रपति चुनाव के लिए भारतीय सविंधान के चौरासीवें संसोधन के अधिनियम 2001 में ये प्रावधान किया गया है जब तक वर्ष 2026 के बाद की जाने वाली पहली जनगणना के लिए प्रासंगिक जनसंख्या के आंकड़े प्रकाशित नहीं हो जाते, तब तक राज्यों की जनसंख्या के लिए वोटों के मूल्य की गणना के प्रयोजनों के लिए राष्ट्रपति चुनाव का मतलब 1971 की जनगणना में तय की गई आबादी से होगा।
7. प्रत्येक राज्य विधानसभा के सभी सदस्यों के वोटों के कुल मूल्य की गणना विधानसभा में निर्वाचित सीटों की संख्या को प्रत्येक सदस्य के वोटों की संख्या से गुणा करके की जाती है, उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश के लिए 175 x 159 = 27,825। एक साथ जोड़े गए सभी राज्यों के वोटों के कुल मूल्य को संसद के प्रत्येक सदस्य के वोटों का मूल्य प्राप्त करने के लिए संसद के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या (लोकसभा 543 + राज्यसभा 233) से विभाजित किया जाता है।
भारत राष्ट्रपति और उप- राष्ट्रपति चुनाव में वोट मूल्य क्या है और कैसे निर्धारित होता है ?
ये पहले ही बताया गया है कि भारत के राष्ट्रपति चुनाव और उपराष्ट्रपति चुनाव में समानता दिखाने के लिए एक सूत्र दिया जाता है अर्थात एक मूल्य निर्धारित किया जाता है। लोकसभा सदस्य और राज्य सभा की सदस्य के लिए वोट मूल्य एक ही होता है पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए वोट मूल्य अलग होता है। लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में सांसद के वोट का मूल्य विधायक के वोट के मूल्य से अलग होता है।
इतना ही नहीं, एक राज्य के विधायक के वोट का मूल्य दूसरे राज्य के विधायक के वोट के मूल्य से भिन्न होता है। एक साथ डाले गए सभी मतों का मूल्य चुनाव के लिए मतदाताओं का मूल्य है। ऐसे प्रत्येक चुनाव से पहले, चुनाव आयोग उस समय पर रिक्तियों आदि के आधार पर सभी वोटों के कुल मूल्य को अधिसूचित करता है।
विधान सभा सदस्यों का वोट मूल्य निर्धरित करने का सूत्र (फार्मूला) :-
भारत में किसी विधान सभा के सदस्य वोट मूल्य = राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की जनसंख्या X 1000 / चुने गए कुल विधानसभा के सदस्य
भारत में राष्ट्रपति चुनाव और उपराष्ट्रपति चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व की प्रणाली से होता है।
राष्ट्रपति चुनाव में मतदान का तरीका राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव नियम, 1974 के नियम 17 में निहित है। बैलेट पेपर में कोई चुनाव चिन्ह नहीं होता है। बैलेट पेपर में दो कॉलम होंगे। बैलेट पेपर के कॉलम 1 में "उम्मीदवार का नाम" शीर्षक होता है और कॉलम 2 में "वरीयता का क्रम" शीर्षक होता है। प्रत्येक निर्वाचक की उतनी ही वरीयताएँ होंगी जितनी कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार हैं, लेकिन किसी भी मतपत्र को केवल इस आधार पर अमान्य नहीं माना जाएगा कि ऐसी सभी प्राथमिकताएँ अंकित नहीं हैं।
एक निर्वाचक अपना मत देते समय अंक 1 को उस उम्मीदवार के नाम के सामने वाले स्थान पर रखेगा जिसे वह अपनी पहली वरीयता के लिए चुनता है और इसके अतिरिक्त, अपने मतपत्र पर अंक 2 रखकर जितनी चाहें उतनी बाद की वरीयताएँ अंकित कर सकता है। वरीयता क्रम में अन्य उम्मीदवारों के नाम के विपरीत रिक्त स्थान में ,3,4 और इसी तरह। अंकों को भारतीय अंकों के अंतर्राष्ट्रीय रूप में या रोमन रूप में या किसी भी भारतीय भाषा में प्रयुक्त रूप में चिह्नित किया जा सकता है लेकिन शब्दों में इंगित नहीं किया जाता है।
भारत के राष्ट्रपति चुनाव के लिए पात्रता या योग्तयाएँ | Eligibility or Qualifications for the Presidential Election of India
भारत में कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति या उप - राष्ट्रपति के चुनाव के लिए कुछ योग्यताएं या फिर पात्रता का होना जरूरी हैं जो निम्न निम्न लिखित दी गई हैं।
1. पहली पात्रता ये है की राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए उसे भारत का नागरिक होना जरूरी है।
2 .उसने 35 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो 35 वर्ष से कम उम्र वाला भारत का राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ सकता है चाहे वह भारत का नागरिक ही क्यों न हों।
3 . एक व्यक्ति राष्ट्रपति के रूप में चुनाव के लिए पात्र नहीं होगा यदि वह भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन या किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण के अधीन किसी भी राज्य सरकार के नियंत्रण के अधीन लाभ का कोई पद धारण करता है।
4 . हालांकि, किसी व्यक्ति को केवल इस कारण से लाभ का पद धारण करने वाला नहीं माना जाएगा कि वह संघ का राष्ट्रपति या उपाध्यक्ष या किसी राज्य का राज्यपाल है या संघ या किसी राज्य का मंत्री है।
भारत में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में किये गए कुछ चुनावी बदलाव :-
भारत में राष्ट्रपति चुनाव और उपराष्ट्रपति चुनाव में कमियों को दूर करने के लिए, आयोग ने कई सिफारिशें कीं, जिसके परिणामस्वरूप, संसद ने "राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव (संशोधन) अधिनियम, 1974 अधिनियमित किया था । राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 में और संशोधन करने के लिए 5 जून, 1997 को एक अध्यादेश भी जारी किया गया था, जिसे बाद में एक अधिनियम में बदल दिया गया था।
इन अधिनियमों ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यालयों के चुनाव के तरीके और तरीके से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण प्रावधान पेश किए थे । केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग के परामर्श से 1952 के नियमों की जगह "राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव नियम, 1974" का एक नया सेट जारी किया था।
दिनांक 06.06.1997 को केंद्र सरकार ने कानून और न्याय मंत्रालय ने राष्ट्रपति चुनाव और उप- राष्ट्रपति चुनाव के लिए कुछ महत्व पूर्ण संसोधन किये थे जिसके अनुसार एक संभावित राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को अपना नामांकन पत्र प्रस्तावक के रूप में कम से कम पचास निर्वाचकों और समर्थक के रूप में कम से कम पचास निर्वाचकों द्वारा अभिस्वीकृत करवाना जरूरी है।
संभावित उप-राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के मामले में, नामांकन पत्र में प्रस्तावक के रूप में कम से कम बीस मतदाता और समर्थक के रूप में कम से कम बीस मतदाता होने जरूरी होते हैं।
राष्ट्रपति या उप- राष्ट्रपति पद के लिए कोई भी मतदाता एक ही चुनाव में एक से अधिक नामांकन पत्र प्रस्तावक या समर्थक के रूप में सदस्यता नहीं ले सकता है और यदि वह ऐसा करता है, तो उसके हस्ताक्षर पहले दिए गए नामांकन पत्र के अलावा किसी अन्य नामांकन पत्र पर निष्क्रिय होंगे।
भारत में राष्ट्रपति चुनाव और उप - राष्ट्रपति चुनाव के लिए राशि या सिक्योरिटी फण्ड :-
भारत में राष्ट्रपति पद के लिए और उपराष्ट्रपति पद के लिए अगर चुनाव लड़ता है तो उसे निर्धारित नियम के अनुसार 15000 रूपये की राशि जमा करवानी पड़ती है। ये राशि Non -Refundable होती है अगर वह कुल वोट का एक-छठे से अधिक से वोट प्राप्त नहीं करता है। इसलिए एक उमीदवार को 1 / 6 वोट हासिल करना जरूरी है।
भारत में राष्ट्रपति या उप - राष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल :-
राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव नियम, 1974 के नियम 40 के तहत, चुनाव आयोग को अनुच्छेद 54 में निर्दिष्ट निर्वाचक मंडल के सदस्यों की एक सूची तैयार की जाती है जिसमें सभी निर्वाचकों का सही पता या Address लिया जाता है ताकि उसे चुनाव की सही इनफार्मेशन दी जा सके। सूची में उस क्रम में राज्य सभा, लोकसभा के निर्वाचित सदस्यों और राज्य विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के निर्वाचित सदस्यों के नाम शामिल होते हैं।
गौरतलब है कि भारत में राष्ट्रपति और उप- राष्ट्रपति पद के लिए संसद के कुल सदस्यों और 30 राज्यों और दिल्ली और पुडुचेरी के M.L.A को मिलाकर चुनाव के लिए एक निर्वाचक मंडल बनाया जाता है जो भारत में राष्ट्रपति पद और उपराष्ट्रपति पद में मतदान करते है जैसे 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्य सभा के सदस्य क्रमश 543 और 233 थे तो कुल संसद सदस्य 776 हो गए और राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से कुल M. L. A. 4120 थे तो इस प्रकार से 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में 776+4120 = 4896 सदस्यों का निर्वाचक मंडल था जिसने भारत में 2017 राष्ट्रपति चुनाव में भाग लिया था। ये निर्वाचक मंडल भारत में राष्ट्रपति चुनाव और उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए ही होता है अगर उनकी संख्या में किसी कारण से कमी न हो।
राष्ट्रपति या उप राष्ट्रपति पद के चुनाव पर सवाल उठाने वाली एक चुनाव याचिका कैसे दायर की जाती है ?
भारत में राष्ट्रपति पद और उपराष्ट्रपति पद का चुनाव हो जाता है और उसके बाद चुनाव के परिणाम की घोषणा के प्रकाशन की तारीख से 30 दिनों के भीतर - किसी भी उम्मीदवार द्वारा ऐसे चुनाव में या किसी भी बीस या अधिक के लिए सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जा सकती है।FAQ:-
प्रश्न :- भारत में राष्ट्रपति चुनाव कैसे होता है ?
उत्तर :- भारत में राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष तौर से जनता द्वारा नहीं किया जाता है ये चुनाव अन्य चुनावों के मुकाबले अलग है। इस चुनाव में भारत के राज्यों में जो भी विधायक चुने जाते हैं उनके द्वारा और संसद में जो भी प्रतिनिधि अर्थात मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट (MP's) चुने जाते हैं उनके सदस्यों द्वारा एक निर्धारित फॉर्मूले के अधीन किया जाता है। राष्ट्रपति चुनाव में राज्य सभा और विधानसभा के चुने हुए नुमायंदे भाग नहीं ले सकते हैं। दूसरे शब्दों में भारत के राष्ट्रपति का चुनाव एक इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्यों द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और संघ सहित संविधान के तहत पुडुचेरी के के निर्वाचित सदस्य हिस्सा लेते हैं।
प्रश्न :- राष्ट्रपति चुनाव की वोटिंग कैसे होती है ?
उत्तर - भारत में राष्ट्रपति चुनाव में मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट और मेंबर ऑफ़ लेजिस्लेटिव असेंबली के चुने हुए सदस्य केवल एक ही वोट डाल सकते हैं। वोट तो एक ही दे सकता है पर जब वोटर को वेलेट पेपर दिया जाता है तो तो वह उस बैलेट पेपर में अपनी पसंद को तय कर सकता है जैसे पहली पसंद दूसरी पसंद या फिर तीसरी पसंद। राष्ट्रपति चुनाव में कहीं भी बैलेट पेपर पर नाम नहीं लिखा होता है। बैलेट पेपर में पहले कॉलम में सदस्य का नाम लिखा होता है और दूसरे कॉलम में प्राथमिकता को इंगित किया होता है।
प्रश्न :- राष्ट्रपति चुनाव कितने साल बाद होता है ?
उत्तर :- भारत के संविधान के अनुच्छेद 56(1) में प्रावधान है कि भारत के राष्ट्रपति पांच वर्ष की अवधि के लिए पद पर बने रहेंगे। अर्थात पांच साल के बाद भारत में राष्ट्रपति चुनाव होता है अगर किसी वजह से राष्ट्रपति पद खाली नहीं हो जाता है।
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