सामाजिक सबंधों के परिवर्तनशील होने के पीछे क्या कारण है ?
समाज परिवर्तन एक स्वभाविक क्रिया है। अगर कोई भी समाज में जटिलता और स्थिरता बनाने की कोशिश करेगा यो निश्चय ही उस समाज का विकास वहीँ पर रुक जायेगा।अगर मानव समाज में हर पक्ष में तरक्की लानी है तो हमें उसमें परिवर्तन लाना बहुत जरुरी है। हाँ सामाजिक संबंध उस पहलु पर भी परिवर्तनशील होते हैं जहां व्यक्ति की निजी स्ववतंत्रता का हनन होता है पर किसी भी समाज का परिवर्तनशील होना बहुत जरुरी है। समाज को इस तरीके से परिवर्तित करना चाहिए जिससे सम्पूर्ण मानव समाज का विकास और उत्थान हो सके।
एक दायरे में रहकर समाज में निरंतर सकारात्मक परिवर्तन लाना मानव समाज का कर्तव्य भी है और फर्ज भी है। अगर हम सामाजिक सबंधों में साकारात्मक परिवर्तन नहीं लाएंगे तो ऐसा समाज किसी के लिए फलदाई नहीं होगा। एक स्थिर सामाजिक सबंधों में इंसान सक्रिय नहीं रहेगा इसलिए सामाजिक सबंध हमेशा परिवर्तनशील होते हैं।