लाल बहादुर शास्त्री थे भारत के सबसे ईमानदार प्रधानमंत्री :-
राजनीति में ईमानदारी और ईमानदार नेता का कोई स्थान नहीं है अर्थात कभी -कभी राजनीति को एक Dirty Game के नाम से भी जाना जाता है। दूसरी तरह राजनीति में यह जरूरी नहीं की सभी नेता भ्रष्ट हो और कम ईमानदार हो। अगर हम दुनिया के ईमानदार बात करें तो ईमानदार नेता हुए हैं। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू थे उनके बाद आज तक भारत के 15 प्रधानमंत्री हुए हैं अलग -अलग सर्वे में भारत के अलग-अलग प्रधानमंत्री चुने जाते है।
एक बार मनमोहन सिंह को भी उनकी पार्टी के नेता राजेश मिश्रा को ईमानदार प्रधानमंत्री घोषित किया था 2021 में उन्होंने ट्वीट करके इस बात की पुष्टि की थी। लिस्ट जारी होती है पर ईमानदारी कहीं दूर नजर आती है आज हम भारत के उस प्रधानमंत्री के बारे में बताएँगे जो सच में एक ईमानदार नेता भी थे और ईमानदार प्रधानमंत्री भी थे।
1. लाल बहादुर के स्वाभिमान और ईमानदारी का पहला परिचय :-
लाल बहादुर शास्त्री से जुड़े कुछ ऐसे किस्से हैं जिनको जानकर हम सभी ये ही कहेंगे कि वे सबसे ईमानदार प्रधानमंत्री थे। पहली बार उन्होंने ईमानदारी का परिचय उस वक्त दिया था जब भारत देश आजाद भी नहीं हुआ था दरअसल उस वक्त लाल बहादुर शास्त्री की आर्थिक दशा और दिशा ठीक नहीं थी भारत के क्रांतिकारियों की आर्थिक दशा सही रहे इसके लिए गोपाल कृष्ण गोखले ने एक सोसाइटी का निर्माण किया था जो देश के क्रंतिकारियों की आर्थिक मदद करती थी। लाल बहादुर शास्त्री के घर का खर्चा चलाने के लिए इस सोसाइटी द्वारा हर महीने 50 रूपये दिए जाते थे।
एक बार जब लाल बहादुर शास्त्री से अपनी पत्नी से घर की आर्थिक दशा और दिशा के बारे में पूछा तो उनकी पत्नी ने ये कहा था कि उनका गुजारा 50 रूपये से बहुत अच्छी तरह चलता है साथ में उनकी पत्नी ने ये भी कह दिया था कि वे 50 रूपये में से 40 खर्च करके 10 रूपये बचा लेती हैं तो लाल बहादुर शास्त्री ने अपने स्वाभिमान और ईमानदारी का परिचय देते हुए गोखले से ये Request की कि उनके घर के खर्चे में कटौती करके 50 से 40 रूपये किया जाये और बाकि के 10 रूपये जरुरत मंद के लिए दिए जाएँ। ऐसे स्वाभिमान और ईमानदारी का परिचय कहां मिल सकता है।
2. क्या था लाल बहादुर शास्त्री के समय रेल दुर्घटना का किस्सा जब नेहरू भी भी कायल हुए थे लाल बहादुर की ईमानदारी से और स्वाभिमान से :-
अगर आज भारत कोई भी दुर्घटना हो जाती है तो उसकी नैतिक जिमेदारी कोई भी मंत्री तैयार नहीं होता है पर ये सुनकर आपको हैरानी होगी कि उन्होंने एक बार रेलमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके पीछे कारण रेल दुर्घटना थी। उन्होंने रेल दुर्घटना की जिमेवारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। दरअसल 1956 के अगस्त में आंध्र प्रदेश के महबूबनगर में एक बड़ा रेल हादसा हुआ था, जिसमें 112 लोगों की मौत हो गई थी।
दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए, शास्त्री ने अपना इस्तीफा पीएम को सौंप दिया, लेकिन नेहरू ने शास्त्री को अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए मना लिया। कुछ महीने बाद नवंबर 1956 में, तमिलनाडु के अरियालुर में एक और रेल दुर्घटना हुई। इस त्रासदी के परिणामस्वरूप 144 मौतें हुईं। शास्त्री ने तुरंत अपना इस्तीफा पीएम को सौंप दिया और इसे जल्द स्वीकार करने का अनुरोध किया था।
3. आजकल भारत में हर कोई पैसे कमाने के लिए शार्ट कट लगाना चाहता है ईमानदारी से काम करने वाले नेताओं में कमी आ रही है पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ईमनदारी और स्वाभिमान एक बहुत बड़ा परिचय थे पहली बात तो ये जब वे office जाते थे तो पैदल ही यात्रा करते थे या साइकल पर office जाते थे जब वे देश के प्रधानमंत्री बने वक्त वे चाहते तो देश के धन का दुरपयोग करके एक आलीशान गाड़ी और बांग्ला ले सकते थे उनके पास पर्याप्त धन राशि न होने के कारण उन्होंने अपने लिए कर खरीदी थी जो लोन पर थी।
4. वैसे तो लाल बहादुर शास्त्री को देश का सबसे ईमानदार और स्वाभिमानी नेता कहें तो कोई भी अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योकि जब 1962 में भारत युद्ध के दौर से गुजरा था तब देश की आर्थिक दशा विगड़ चुकी थी। देश की आर्थिक दशा को पटरी पर लाना मुश्किल था। लाल बहादुर शास्त्री के स्वाभिमान का परिचय तब मिला जब भारत पाकिस्तान का युद्ध चल रहा था।
1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान के लाहौर तक कब्ज़ा कर लिया था। अमेरिका और पाकिस्तान के सबंध आपस में ठीक थे इसलिए अमेरिका ने शांति बहाली के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से यह कहा कि भारत अपनी सेनायें लाहौर से वापिस बुला ले पर लाल बहादुर शास्त्री ने अपने स्वाभिमान का परिचय देते इंकार कर दिया।
बदले में अमरीका ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दे डाली और खाने की जरुरत मंद जीजों को बंद करने की धमकी दी। लाल बहादुर शास्त्री ने इस समस्या से निपटने के लिए अपने ही घर से शुरुआत की और घर में आकर अपने घर वालों से एक वक्त का राशन त्यागने का आग्रह किया। उसके बाद उन्होंने देश की जनता के साथ भी ये ही बिनती की जिससे देश को आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके इससे ज्यादा सवाभिमान और ईमानदार नेता खां से मिल सकता है।