क्या है लाल बहादुर शास्त्री और गुदड़ी के लाल मुहावरे का रिश्ता | Why Lal Bhahadur Shashatri is called "gudri ka laal"

लाल बहादुर शास्त्री के गुदड़ी का लाल क्यों कहा जाता है?

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री देश के ईमानदार और स्वाभिमानी नेता थे जिनकी ईमानदारी को आज भी याद किया जाता है। लाल बहादुर शास्त्री को गुदड़ी का लाल कहा जाता है कहने को यह मुहावरा कुछ अजीब सा है पर इस मुहावरे के पीछे बहुत कुछ छिपा है। आज हम इस पोस्ट में ये जानने की कोशिश करेंगे कई भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को गुदड़ी का लाल क्यों कहा जाता था और लाल बहादुर शास्त्री का इससे क्या सबंध है।

गुदड़ी के लाल मुहावरे का अर्थ :- गुदड़ी के लाल मुहावरे का अर्थ होता है एक ऐसा गुणवान व्यक्ति जो प्रतिभा से भरा हुआ हो पर कोई भी व्यक्ति प्रतिभा और गुणों से भरा हो सकता है। इस मुहावरे का यह अर्थ है कि एक ऐसा व्यक्ति जो गरीब घर में पैदा हुआ हो और असाधारण गुणों और प्रतिभाओं से भरा हो। लाल बहादुर शास्त्री ऐसे ह प्रधानमंत्री थे।

आइये जानते है लाल बहादुर शास्त्री को क्यों गुदड़ी का लाल कहा जाता था ?

लाल बहादुर शास्त्री थे गरीब घर के गुणवान व्यक्ति :-

लाल बहादुर शास्त्री एक ऐसे प्रधानमंत्री थे जो एक गरीब परिवार में पले थे बचपन में ही में उनके पिता का देहांत हो गया था उसके बाद उनके मौसा जी ने उन्हें पढाने के लिए प्रयास किया। घर की आर्थिक दशा कमजोर होने के वावजूद भी उन्होंने बचपन के दिन ख़ुशी से विताये। बचपन में गरीब होना उनके गरीबी का परिचय देते हैं। बचपन में बहुत सॉरी मुश्किलों के बावजूद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई को पूरा करने के लिए बहुत स्ट्रगल किया और मिडिल स्कूल की पढ़ाई के बाद हाई स्कूल की शिक्षा के लिए नदी पर करके स्कुल के लिए जाते थे।

लाल बहादुर के गुणवान होने के किस्से :- लाल बहादुर शास्त्री में गुणों की कमी नहीं थी सादगी और सादापन उनमे कूट -कूट कर भरा हुआ था। उनकी सादगी गुणवान होने का परिचय आया था जब जवाहर लाल नेहरू के समय जब वे भारत के मंत्री पद पर थे तो उनका सामना एक ऐसे व्यक्ति से हुआ जिसका नाम देवी लाल था। जब लाल बहादुर शास्त्री हाई स्कुल में पढ़ते थे तब देवी लाल एक चपड़ासी के व्यवसाय पर कार्यरत थे। लाल बहादुर शास्त्री से अचानक बिकार टूट गया था। देवी लाल ने उन्हें थपड मार दिया था पर जब लाल बहादुर शास्त्री मंत्री बने तब उन्होंने उसे गले लगाया था।

सबसे बड़ा कारण उनको गुदड़ी का लाल इसलिए कहा जाता था कि जब एक बार वे office जा रहे थे तो उनका कुरता फटा हुआ था इस कुर्ते को छुपाने के लिए उनकी घर वाली ने उस कुर्ते के ऊपर कोट पहनाया था। दूसरा किस्सा ताशकंद समझौते का था जब उन्होंने फटा हुआ कुरता पहना था और उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि न्य कुरता खरीद सकें। ये किस्से ही उनके सादगी और एक गुणवान होने के लिए बहुत नहीं हैं उसके बाद भी उन्हने कई महान कार्य किये ये ही कारण था कि लाल बहादुर शास्त्री को गुदड़ी का लाल कहा जाता था।


Rakesh Kumar

Rakesh Kumar From HP is interested in writing and go to the provision when where and why

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