जानिए हिंदी भाषा शिक्षण लक्ष्यों, उद्देश्यों और महत्त्व के बारे में :-
A. प्राइमरी स्तर, माध्यमिक स्तर और हाई स्कुल में हिंदी शिक्षण के लक्ष्य :-
1.प्राइमरी स्तर पर हिंदी शिक्षण के लक्ष्य :-
प्राइमरी स्तर में शिक्षण का शुरूआती स्तर होता है। जब भी भी विद्यार्थी स्कुल में आता है तो वह एक कोरे कागज की तरह होता है। इसलिए हर भाषा का ज्ञान भी उसके लिए नया होता है। इसलिए प्राइमरी स्तर पर हिंदी शिक्षण का एक ही लक्ष्य होना चाहिए कि विद्यार्थी हिंदी को समझ सके अर्थात लिख सके उसे अक्षर ज्ञान हो जाये, हिंदी बोल सके और हिंदी पढ़ सके।
2. माध्यमिक स्तर पर हिंदी शिक्षण के लक्ष्य :-
3. उच्च माध्यमिक स्तर पर हिंदी शिक्षण के लक्ष्य :-
उच्च माध्यमिक स्तर पर बच्चा नौवीं और दसवीं जमात में होता है। ऐसा ही सकता है कि आपके पास बच्चे ऐसे आये जिसे हिंदी के बारे में ज्यादा ज्ञान न हो इसलिए आपका उच्च माध्यमिक स्तर पर हिंदी शिक्षण के लिए भी लक्ष्य का होना जरूरी है। इस स्तर पर एक हिंदी शिक्षक का हिंदी शिक्षण में ये लक्ष्य होना चाहिए कि क्या वह बिना रुके हिंदी पढ़ सकता है या फिर शुद्ध हिंदी बोल सकता है।
B. हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्य | Objectives of Hindi Language Teaching
हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्य। लक्ष्यों से भिन्न होते हैं इसलिए जानते हैं प्राइमरी स्तर पर, माध्यमिक स्तर पर और उच्च माध्यमिक स्तर पर हिंदी भाषा शिक्षण के क्या क्या उद्देश्य होने चाहिए।
1. प्राइमरी स्तर पर हिंदी शिक्षण के उद्देश्य (पहली से पांचवीं तक) :-
- प्राइमरी स्तर पर शिक्षार्थी छोटा होता है इसलिए इस स्तर पर शिक्षक के हिंदी शिक्षण के निम्नलिखत होने चाहिए।
- इस स्तर पर विद्यार्थी के अंदर शिक्षण का पहला उद्देश्य यह होना चाहिए कि वह पहली से पांचवीं तक पहुंचने तक आत्म विश्वास के साथ हिंदी बोलने, लिखने और पढ़ने का कौशल सीख सके।
- दूसरा उद्देश्य यह होना चाहिए कि उसे हिंदी भाषा के व्याकरण के सभी वर्णों का लिपि का और वाक्य रचना का ज्ञान होना चाहिए। पांचवीं तक पहुंच के बच्चा इस बात के लिए सक्षम हो जाये कि वह वाक्य अपने आप बना उसके और वे भी शुद्ध वाक्य।
- तीसरा उद्देश्य यह होना चाहिए कि बच्चा अगर पढ़ने में में कौशल प्राप्त कर लेता है तो उसके अंदर इस Skill का विकास किया जाये कि वह हिंदी शिक्षा शिक्षण में सुनने की क्षमता भी रखता हो।
- इसके बाद अगर विद्यार्थी शुद्ध बौलना सीखता है तो उसके अंदर लोकोक्तियां और मुहावरे के ज्ञान का विकास करना चाहिए।
- प्राइमरी स्तर के हिंदी शिक्षण में शुद्ध लेखन के लिए इस उदेश्य का होना भी बहुत जरुरी है कि लेखन में विकास के लिए पहली से पांचवीं तक लेख प्रतियोगिताएं करवाई जाये इसमें बच्चो में हिंदी Handwriting में विकास होगा।
- हिंदी भाषा शिक्षण का अगला उद्देश्य यह होना चाहिए कि विद्यार्थी किताबों से पढ़ने की आदत में विकास किया जाये अर्थात अगर वह किताब पढ़ सकता है तो उसके बाद उसके अंदर मौखिक हिंदी बोलने में विकास किया जाये।
- प्राइमरी विद्यालयों में हिंदी शिक्षण का सामान्य उद्देश्य ये ही है कि विद्यार्थी हिंदी भाषा को सही बोल सके ,सही लिख सके, सही सुन सके और और सही तरीके से पढ़ सके।
प्राइमरी शिक्षा के बाद जब बच्चा माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में पहुँचता है तो शिक्षण विधि अलग हो जाती है और शिक्षण के उद्देश्यों में बदलाव भी होना स्वाभाविक है इसलिए माध्यमिक स्तर में हिंदी शिक्षण के निम्नलिखत उद्देश्य होने चाहिए।
- पहला उद्देश्य अगर इस स्तर में विद्यार्थी हिंदी पढ़ लेता और बोल भी लेता है तो उसके अंदर हिंदी के विकास के महत्व को समझाना बहुत जरूरी है।
- दूसरा उद्देश्य यह होना चाहिए कि वह पाठ्यपुस्तकों के साथ हिंदी अख़बार और हिंदी मैगज़ीन पढ़ने में भी सक्षम होना चाहिए।
- विद्यार्थियों के अंदर व्याकरण के सभी पहलुओं का बारीकी से ज्ञान करवाना जैसे संज्ञा, पूर्ण विराम, वाक्य रचना कहानी बोलना और मुहावरे और कविता बोलने का ढंग इसके लिए एक शिक्षक को Morning Assembly में बच्चों को हिंदी अखबार पढ़ने के लिए जागृत करना चाहिए।
- हिंदी शिक्षण का इस स्तर पर हिंदी अध्यापक का ये उदेश्य होना चाहिए कि वह लेख सुधार के लिए हिंदी लेख प्रतियोगिता करवाए और अपने विद्यार्थियों का Co petition ने स्कूलों से जरूर करवाए ताकि आपको अपनी मेहनत का पता लग सके।
- इसके साथ यह भी जरूरी है कि वह इस स्तर पर हिंदी भाषा के विकास के लिए विद्यार्थियों के अंदर हिंदी में बात करने के लिए उत्साहित करे।
- इस स्तर पर हिंदी शिक्षण का ये भी उदेश्य होना चाहिए कि विद्यार्थी अपने विचारों की अभिवक्ति हिंदी में मौखिक रूप से बोल सके और उसे लिख भी सके।
- संक्षेप में माध्यमिक शिक्षा स्तर पर हिंदी शिक्षण का उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रति प्रेम की भावना, बच्चों के अंदर हिंदी शिक्षा की सभी विधियों का विकास करना और हिंदी भाषा का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए।
3..उच्च माध्यमिक स्तर पर हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्य :-
उच्च माध्यमिक स्तर पर में विद्यार्थी 9th और 10th में शिक्षा ग्रहण करता है। इस शिक्षा स्तर पर पहुंचने से पहले विद्यार्थी हिंदी भाषा का काफी ज्ञान रखता है अर्थात उसे हिंदी भाषा के Basic पहलुओं का जैसे लिखना बोलना और सुनना ये सभी स्किल्स डेवेलप हो चुके होते हैं। इस लिए इस स्तर पर हिंदी शिक्षण के निम्न लिखित उद्देश्य होने चाहिए।
- विद्यार्थियों के अंदर हिंदी पढ़ने का पूर्ण विकास करना इस स्तर की शिक्षा का प्रमुख उदेश्य होना चाहिए।
- हिंदी में समाचार सुनंने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करना और उसे लिख के स्कुल में Morning Assembly में बोलने के लिए बच्चों को उत्साहित करना
- इस स्तर पर हिंदी शिक्षण का ये उद्देश्य होना चाहिए की बच्चा तीब्र गति से बिना रुके हिंदी लिख सके और हिंदी बिना गलती किये बोल सके।
- उच्च माध्यमिक स्तर में विद्यार्थियों के बीच में हिंदी भाषा के अलग- अलग Competition करवाए जाएँ ये competition, कहानी स्तर के, मुहावरे की प्रतियोगिता या फिर कविता की प्रतियोगिता हो सकती है।
- छात्रों में निबंध लेखन, बड़े पैराग्राफ के सारांश का कौशल उतपन्न करना चाहिए।
- इस शिक्षण स्तर पर हिंदी शिक्षण का यह उद्देश्य भी बहुत जरूरी है कि हिंदी व्याकरण का पूरा विकास किया जाये। इस स्तर पर विद्यार्थी को हिंदी व्याकरण का पूरा ज्ञान होना चाहिए।
- हिंदी भाषा के शिक्षण को अन्य छात्रों के साथ मिलाकर विकास करना भी इस शिक्षण स्तर में शामिल है।
- इस स्तर पर हिंदी शिक्षण के विकास के लिए सृजनात्मक क्षमता करना और हिंदी भाषा में अपने आप किसी भी विषय पर लिखने की क्षमता का विकास होना जरूरी है।
- साहित्य विकास के लिए अन्य साहित्य का विकास करना और उसका हिंदी में अनुवाद करना उच्च माध्यमिक स्तर पर हिंदी शिक्षण का उद्देश्य होना चाहिए।
हिंदी भाषा शिक्षण के महत्व | Importance of teaching Hindi language
हिंदी भाषा शिक्षण का भारत में ही नहीं पुरे विश्व में है हम जानते हैं कि भारत में 9 राज्यों में हिंदी बोली जाती है और हिंदी भाषा हमारी मातृ भाषा है इसलिए हिंदी भाषा शिक्षण के विकास से देश प्रेम की भावना का विकास हो सकता है। दूसरा हिंदी भाषा को सविंधान की भाषा का दर्जा दिया गया है हमारा सविंधान भी हिंदी में ही लिखा गया था।
