भारत में आर्थिक संकट कब - कब आया ? | भारत में आर्थिक मंदी के उदाहरण
- भारत को आजादी के बाद पांच वित्तीय वर्षों में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। पहला वित्तीय वर्ष 1957- 58 था। ये आर्थिक संकट भारत में खाद्यान वस्तुओं की वजह से आई थी और इसमें भारत की अर्थव्यवस्था में -1.2 % की गिरावट दर्ज की गई थी। इस आर्थिक मंदी के समय भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू थे और भारतीय रिसर्वे बैंक के गवर्नर H V R Iengar थे।
- दूसरी बार भारत में आर्थिक संकट 1965 - 66 वित्तीय वर्ष में आया था और इसके पीछे कारण भारत के साथ पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन के साथ युद्ध था और इसमें -3.7 % की गिरावट दर्ज की गई थी। जब भारत को दूसरी मंदी का सामना करना पड़ा था तब भारत के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री थे और भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर P C Bhattacharya थे।
- तीसरी बार भारत में आर्थिक मंदी वित्तीय वर्ष 1973 -74 में आई थी और इस आर्थिक संकट का कारण अरब पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OAPEC) का तेल की कीमतों में भारी उछाल था। जब इस वित्तीय वर्ष में भारत में आर्थिक संकट पैदा हुआ तब भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी थी और भारत रिज़र्व बैंक के गवर्नर S Jagannathan थे।
- चौथी बार भारत को आर्थिक संकट का सामना वित्तीय वर्ष 1979-80 में करना पड़ा था और इसके पीछे कारण फिर से तेल (पेट्रोलियम) की कीमतों में तेजी थी। जब भारत में चौथी बार आर्थिक संकट आया तब भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और भारत रिज़र्व बैंक के गवर्नर Dr. I G Patel थे और इस मंदी से निपटने के लिए बाद में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को नियुक्त किया गया था।
- पांचवीं बार भारत को आर्थिक संकट का सामना वित्तीय वर्ष 1990 - 91 में करना पड़ा था। इस आर्थिक संकट का कारण भी खाड़ी का युद्ध था जब भारत को मंदी का सामना करना पड़ा था और इसके पीछे कुछ राजनीतिक अस्थिरता का कारण भी था और धार्मिक कारण भी थे जब 1990 में बाबरी मस्जिद issue ने भारत में अस्थिरता फैला रखी थी। इस आर्थिक अस्थिरता की वजह से भारत के आठवें प्रधानमंत्री वजट भी पेश नहीं कर पाए थे। इस आर्थिक मंदी के समय भारत रिज़र्व बैंक के गवर्नर S Venkitaramanan थे।
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