History of Indian Presidential Election in Hindi
भारतीय राष्ट्रपति चुनाव का इतिहास :- भारत में राष्ट्रपति चुनाव हर साल पांच साल के बाद होते हैं। भारत में राष्ट्रपति भारत का पहला नागरिक होता हैं। 1950 में पहले राष्ट्रपति चुने गए थे। उसके बाद राष्ट्रपति चुनाव दो बार राष्ट्रपति चुनाव तब कराने पड़े जब राष्ट्रपति का पद अचानक राष्ट्रपति की मृत्यु के बाद खाली हो गया था। भारत में आजादी से लेकर 14 राष्ट्रपति पद के लिए 15 राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं। आइये जानते हैं "भारतीय राष्ट्रपति चुनाव का इतिहास" (Indian Presidents Election History) कैसा था कौन इसमें जीता था और कैसा था चुनावी इतिहास।
भारत के राष्ट्रपति चुनाव का इतिहास 1950 - 2022
भारत में पहला राष्ट्रपति चुनाव 1950 में हुआ था जब डॉक्टर राजेंदर प्रसाद Unopposed भारत के राष्ट्रपति चुने गए थे ये चुनाव भारतीय सविंधानिक सभा द्वारा किया गया था। अगर भारत के राष्ट्रपति चुनाव (इलेक्शन) की बात करें तो पहले इलेक्शन 2 मई 1952 में हुआ था और 6 मई 1952 में राष्ट्रपति चुनाव की गणना के बाद भारत के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद बने थे जब उनके सामने दूसरे प्रतिनिधि के टी शाह थे जो आजाद उमीदवार थे। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने के टी शाह को भारी सिकसत दी थी और 507,400 वोट हासिल करके के टी शाह को हराया था और उन्हें 92,827 वोट ही मिले थे।
दूसरा भारतीय राष्ट्रपति इलेक्शन 1957 में हुआ था जिसमें डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद फिर से इंडियन नेशनल कांग्रेस की तरफ से उमीदवार थे और उनके सामने फिर से आजाद उमीदवार थे जिनका नाम चौधरी हरी राम था डॉक्टर राजेंदर प्रसाद ने उन्हें भी 459,698 वोट हासिल करके भारी मतों से हरा दिया था जबकि चौधरी हरी लाल को केवल 2,672 ही वोट हासिल हुए थे।
इस चुनाव में तीसरे कैंडिडेट भी थे जिनका नाम नरेंद्र नारायण दास था और उन्हें 2,000 ही वोट मिले थे। इस प्रकार राजेंद्र प्रसाद तीसरी बार भारत के राष्ट्रपति बने थे पहले निर्विरोध दूसरी बार इलेक्शन में और तीसरी बार इलेक्शन जीत के राष्ट्रपति बने थे। डॉक्टर राजेंदर प्रसाद 13 मई 1962 तक 12 साल और 107 दिन के लिए भारत के राष्ट्रपति रहे।
भारत में तीसरा राष्ट्रपति चुनाव 7 मई 1962 में हुआ था जब डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के बाद भारत में राष्ट्रपति का चुनाव किया जाना था। इस चुनाव में पहली बार एक आज़ाद उमीदवार के रूप में डॉक्टर राधाकृष्णनन को उमीदवार के रूप में चुना गया था। इस राष्ट्रपति चुनाव में उनके सामने दो उमीदवार थे जो आजाद उमीदवार के रूप में इलेक्शन Fight कर रहे थे। पहले उमीदवार पहले उमीदवार चौधरी हरी थे जो राधाकृष्ण के नजदीकी प्रतिदव्न्दी थे। दूसरे उमीदवार यमुना प्रसाद त्रिसूला थे।
तीसरा राष्ट्रपति चुनाव 7 मई 1962 की सम्पन हुआ और उसके बाद 11 मई 1962 में चुनाव के नतीजों की घोषणा की गई। इस चुनाव में डॉक्टर राधाकृष्नन को 5,62,945 वोटो में से 5,53,067 वोट मिले थे जबकि उनके समक्ष खड़े उमीदवार को चौधरी हरी लाल को केवल 6341 वोट और यमुना प्रसाद त्रिशूला को 3537 ही वोट मिले थे।
इस चुनाव में डॉक्टर राधकृष्णनन को 98.2% वोट मिले थे। इस चुनाव के बाद भारत के राजेंद्र प्रसाद के समय उपराष्ट्रपति राधाकृषणन को राष्ट्रपति बनाया गया था। डॉक्टर राधाकृष्णनन जब भारत के राष्ट्रपति थे तब उनके कार्यकाल में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर नेहरू उनके समकालीन प्रधानमंत्री थे।
भारत में चौथा राष्ट्रपति चुनाव 6 मई 1967 में हुआ था यह भारत का ऐसा राष्ट्रपति चुनाव था जब भारत में किसी मुस्लिम राष्ट्रपति को चुना गया था। ये भारत में राष्ट्रपति चुनाव अन्य पिछले तीन चुनावों से अलग था। इस चुनाव में कुल 14 उम्मीदवारों ने इलेक्शन में Fight किया था पर जाकिर हुसैन के निकटतम प्रतिद्वंदी कोका सूबा राव थे जो भारत में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जज के रूप में भी काम कर चुके थे। डॉक्टर जाकिर हुसैन एक मुस्लिम राष्ट्रपति के रूप में पहली बार आजाद भारत के लिए इलेक्शन लड़ रहे थे। और उनके साथ 13 कैंडिडेट सभी हिन्दू कम्युनिटी से थे। 6 मई 1967 में इलेक्शन के बाद 9 मई 1967 में राष्ट्रपति चुनाव के लिए नतीजे घोषित किये गए।
इस राष्ट्रपति चुनाव में कुल 838,170 कास्ट हुए थे जिसमें डॉक्टर जाकिर हुसैन को 8,38170 मतों में से 471244 वोट मिले थे और उनके निकटतम प्रतिदव्न्दी को 363,971 वोट मिले थे। बाकी के 12 उमीदवार 1500 का आंकड़ा भी पार नहीं क्र पाए थे। इस प्रकार डॉक्टर जाकिर हुसैन ने 13 मई 1967 को भारत के पहले मुश्लिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की थी।
भारत में पाँचवा राष्ट्रपति चुनाव 16 अगस्त 1969 में हुआ था। ये राष्ट्रपति चुनाव दिलचस्प था जब भारत में राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक आजाद उमीदवार के रूप में नीलम वी वी गिरी ने चुनाव जीता था। ये चुनाव दिलचस्प इस लिए था क्योकि इस चुनाव में वी गिरी की कूटनीति के कारण वे भारत में पहली बार चुनाव जीते थे। उनके निकटम प्रतिदव्न्दी नीलम संजीव रेड्डी थे। वी वी गिरी इस चुनाव से पहले भारत के उपराष्ट्रपति थे उन्होंने उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था और वे भारत के राष्ट्रपति पद के लिए दावा पेश का रहे थे।
इस चुनाव में उस वक्त की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी दो भागों में बंट गई थी। दरअसल इस चुनाव में मतभेद इंदिरा गाँधी के राष्ट्रपति कैंडिडेट के उमीदवार को लेकर कोंग्रेस में मतभेद पैदा हुआ था। इंदिरा गाँधी चाहती थी की इस चुनाव में बाबू जगजीवन राम का नाम नामांकित किया जाये। वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस के और बड़े नेता ये चाहते थे कि राष्ट्रपति के उमीदवार के रूप में नीलम संजीव रेड्डी का नाम नामांकित किया जाये। कांग्रेस पार्टी दो भागों में स चुनाव में विभाजित हुई और इंदिरा गाँधी का एक ग्रुप था जो वी वी गिरी की हमायत करता था दूसरी तरफ मोरार जी देसाई वाले ग्रुप ने नीलम संजीव रेड्डी की हमायत की।
इस राष्ट्रपति चुनाव का दिलचस्प पहलु ये था कि कांग्रेस उस वक्त एक सत्त्ता रूढ़ पार्टी थी उसके वावजूद भी इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रपति उमीदवार की हार हुई थी जिनका नाम संजीव रेड्डी थे। और दूसरी तरफ वी वी गिरी ये अक आज़ाद उमीदवार के रूप में इलेक्शन जीत गए थे इस चुनाव में 836,337 वोट कास्ट हुए थे जिसमें जितने वाले उमीदवार वी वी गिरी को 401,515 और रेड्डी को 313,548 वोट पड़े थे।
भारत में छठा राष्ट्रपति चुनाव 17 अगस्त 1974 में हुए थे। चुनाव में भारत के राष्ट्रपति चुनाव के लिए भारतीय कांग्रेस पार्टी फकरूदीन अहमद को नामांकित किया गया था। भारत में राष्ट्रपति चुनाव के इतिहास में ऐसा दूसरी बार था जब किसी मुस्लिम कैंडिडेट की भारत के राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकित किया गया था। फकरूदीन अहमद भारत के एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने एक वकील के साथ भारत के आंदोलन भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया था। ये ही कारण था कि उस वक्त इंदिरा गाँधी ने उनको राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकित किया था।
इस चुनाव में फकरूदीन अहमद के प्रतिदव्न्दी त्रिदीब चौधरी थे जो एक आजाद उमीदवार के रूप में ये चुनाव लड़ रहे थे। चौधरी वेस्ट बंगाल में राजनीति के लिए जाने जाते थे और वहां से सात बार लोकसभा इलेक्शन जीत चुके थे। वे क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी के एक सीनियर नेता थे। राष्ट्रपति चुनाव में ये पहली बार हुआ था जब किसी गैर कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था।
17 अगस्त 1974 के इस राष्ट्रपति चुनाव के बाद 20 अगस्त को इस चुनाव के में डॉक्टर फकरूदीन अहमद ने क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी के उमीदवार चौधरी को एक बड़े अंतराल से हरा दिया था जब डॉक्टर अहमद को 754,113 मिले थे और चौधरी को 189,196 वोट ही मिले थे। इस प्रकार 24 अगस्त 1974 में अहमद ने राष्ट्रपति पद संभाला था।
भारत में सातवां राष्ट्रपति चुनाव 6 अगस्त 1977 में हुआ था। भारत के राष्ट्रपति चुनाव में ये दूसरी बार हुआ था जब जाकिर हुसैन के बाद किसी राष्ट्रपति की मृत्यु उसके कार्यकाल के समय हुई थी। फकरूदीन अहमद की मृत्यु के बाद बी डी जति को देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल सम्भलना पड़ा था। बी जती भारत के आज तक ऐसे राष्ट्रपति हैं जो सबसे लम्बे समय के लिए 164 दिन तक कार्यवाहक राष्ट्रपति रहे हैं।
राष्ट्रपति पद के लिए 6 अगस्त 1977 में राष्ट्रपति चुनाव हुए चुनाव में वी डी जति से हारे राष्ट्रपति चुनाव नीलम संजीव रेड्डी भारत के राष्ट्रपति बने थे। इस चुनाव में ये इतिहास में पहली बार हुआ था और 37 कैंडिडेट राष्ट्रपति उमीदवार के लिए नाम नामंकित किया था।
जिसमें 36 प्रतिनिधियों को स्क्रूटनी में रेज्क्ट क्र दिया गया था और भारत के राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी बने थे। इक किस्म से वे निर्वरोध राष्ट्रपति चुने गए थे। वे जनता पार्टी से चुने गए पहले राष्ट्रपति थे। नीलम संजीव रेड्डी 25 अगस्त 1977 को भारत के राष्ट्रपति बने थे।
भारत में आठवां राष्ट्रपति चुनाव 12 जुलाई 1982 में हुआ था। इस चुनाव में पहली बार एक सिख राष्ट्रपति चुनाव में सामने आये थे जिनका नाम ज्ञानी ज़ैल सिंह था। ये इंडियन नेशनल कांग्रेस के एक समझदार और जुझारू नेता थे। दूसरी तरफ उनके सामने राष्ट्रपति पद के लिए आजाद उमीदवार थे जिनका नाम हंस राज खन्ना थे जो भारत में सुप्रीम कोर्ट के जज भी रहे थे। इस राष्ट्रपति चुनाव में दोनों ही का जन्म पंजाब में होता था ,ज्ञानी ज़ैल सिंह जहां पंजाब के फरीदकोट में जन्मे थे वहीँ हंस राज खन्ना का जन्म पंजाब के अमृतसर जिले में हुआ था।
चुनाव इतना नजदीक नहीं रहा था और इस चुनाव में 471448 वोटो के अंतराल से हराया था। इस चुनाव में कुल 1,036,798 पड़े थे, जिसमें जाकिर हुसैन को 754,113 मिले थे और हंस राज खन्ना को 282,685 वोट ही मिले थे। इस प्रकार ज्ञानी ज़ैल सिंह इस चुनाव के बाद भारत 7 वे राष्ट्रपति 25 जुलाई 1982 में बने थे। ज्ञानी ज़ैल सिंह ने भारत के दो प्रधान मंत्रियों के साथ कार्यकाल साँझा किया था जिनका नाम इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी था।
भारत में नौवां राष्ट्रपति चुनाव 13 जुलाई 1987 में हुआ। इस चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए आर वेंकटरमन का नाम नामकित किया था। जो तमिलनाडु के रहने वाले थे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता थे। उनके इस चुनाव में नजदीकी प्रतिदव्न्दी न्यायमूर्ति वैद्यनाथपुरम राम कृष्ण अय्यर थे।
चुनाव में आर वेंकटरमन को 740,148 वोट मिले थे और उनके मुकाबले न्यायमूर्ति वैद्यनाथपुरम राम कृष्ण अय्यर को केवल 281,550 मिले थे जो एक आज़ाद उमीदवार थे। तीसरे कैंडिडेट भी आज़ाद उमीदवार थे जिनका नाम मिथिलेश कुमार था जो 2500 वोटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए थे।
भारत में दसवां राष्ट्रपति चुनाव 16 जुलाई 1992 में हुआ था। इस चुनाब में डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा इंडियन नेशनल कांग्रेस की तरफ से राष्ट्रपति के उमीदवार के लिए नामांकित किये गए थे। डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा कांग्रेस के एक ऐसे नेता थे जिन्होंने भारत में भारत छोडो आंदोलन में भी भाग लिया था। इसके बाद उन्होंने राजनीति में आगे बढ़ते हुए आजादी के बाद वे 1960 के बाद इंदिरा गाँधी के कहने पर भारत की राजनीति में Active हुए। इस राष्ट्रपति चुनाव में उनके सामने राष्ट्रपति पद के लिए तीन उमीदवार थे जिनका नाम जॉर्ज गिल्बर्ट स्वेल, राम जेठमलानी, काका जोगिंदर सिंह थे जो आजाद उमीदवार के रूप में इलेक्शन लड़ रहे थे।
पर इस चुनाव में नजदीकी मुकाबला डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा और जॉर्ज गिल्बर्ट स्वेल का हुआ था। डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उनके सहयोगियां का समर्थन था जबकि उनके प्रतिद्वंदी जॉर्ज गिल्बर्ट स्वेल को भारतीय जनता पार्टी और नेशनल फ्रंट का समर्थन था। इस चुनाव में डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा को कुल 675,864 मिले थे और उनके नजदीकी प्रतिद्वंदी जॉर्ज गिल्बर्ट स्वेल को 346,485 मिले थे। दूसरी तरफ राम जेठमलानी को 2,704 वोट मिले थे और काका जोगिंदर सिंह को केवल 1,135 ही वोट मिले थे।
इस प्रकार शंकर दयाल शर्मा शर्मा इस चुनाव में जीत कर भारत के राष्ट्रपति बने थे और उन्होंने 25 जुलाई 1992 में भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला था। डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा के राष्ट्रपति कार्यकाल में एक दिलचस्प बात ये है की उन्होंने अपने पांच साल के कार्यकाल में भारत के चार प्रधानमंत्रियों को शपथ दिलाई थी जिनमे पी. वी नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी, एच डी देवगौड़ा और इंद्र कुमार का नाम शामिल है।
ग्यारवां भारतीय राष्ट्रपति चुनाव 17 जुलाई 1997 था। इस राष्ट्रपति चुनाव की ये विशेषता थी कि इस चुनाव में दो कैंडिडेट उमीदवार के रूप में सामने आये थे और दोनों ही उत्तर भारत के रहने वाले थे अर्थात उनका राजनितिक घटनाक्रम केरला से जुड़ा हुआ था। इस चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस और उनकी सहयोगी पार्टियों ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए के आर नारायणन का नाम आगे लाया था जो दलित नेता थे। दूसरी तरफ टी एन शेषन राष्ट्रपति पद के उमीदवार थे।
चुनाव में टी एन शेषन को कुछ ज्यादा सहयोग नहीं मिला और वे 50,631 वोट ही हासिल कर पाए थे। दूसरी तरफ के आर नारायणन ने इस चुनाव में 9,56,290 हासिल करके एक बड़ी जीत हासिल की थी। इस के आर नारायणन शर्मा 11 वे राष्ट्रपति चुनाव में भारत के दसवें राष्ट्रपति बने थे जो देश के पहले दलित राष्ट्रपति थे।
भारत में 12th राष्ट्रपति चुनाव 15 जुलाई 2002 में हुआ था। ये राष्ट्रपति चुनाव दो प्रमुख नेताओं के बीच हुआ था। इस चुनाव में U. P. A (यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलाइंस) द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम का नाम प्रोपोज़ किया गया था। इस चुनाव में एपीजे अब्दुल कलाम को सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस का समर्थन ही नहीं था पर भारतीय जनता पार्टी ने भी इस चुनाव में एपीजे अब्दुल कलाम के समर्थन में सामने आई थी।
दूसरी तरफ लक्ष्मी सहगल राष्ट्रपति पद के लिए उमीदवार थी जिन्हे उत्तर भारत की राजनैतिक पार्टियों तेलुगु देशम पार्टी, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और उत्तर प्रदेश की मायावती अर्थात बहुजन समाज पार्टी का समर्थन था। इस चुनाव में एपीजे अब्दुल कलाम को कुल 922,884 वोट मिले थे और लक्ष्मी सहगल को मात्र 107,366 वोट मिले थे इस प्रकार एपीजे अब्दुल कलाम ने लक्ष्मी सहगल को 815518 मतों से हराया था। इस प्रकार एपीजे अब्दुल कलाम ने 25 जुलाई 2002 में राष्ट्रपति का पद ग्रहण किया था जो जाकिर हुसैन और फकरूदीन अहमद के बाद तीसरे मुश्लिम राष्ट्रपति बने थे।
भारत में 13th राष्ट्रपति चुनाव 19 जुलाई 2007 में हुआ था। इस चुनाव भारतीय राष्ट्रपति चुनावी इतिहास में पहली बार हुआ था कि किसी महिला कैंडिडेट को राष्ट्रपति पद के लिए उमीदवार के रूप में नामांकित किया गया था जिनका नाम प्रतिभा पाटिल था। उस वक्त केंद्र में सोनिया गाँधी की अध्यक्षता में डॉक्टर मनमोहन सिंह भारत के प्रधानमंत्री थे। U. P. A ने इस राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रतिभा पाटिल का नाम आगे किया।
दूसरी तरफ NDA गठबंधन ने भैरो सिंह शेखावत का नाम नामांकित किया था। जून के लास्ट तक NDA ने अपने कैंडिडेट का नाम घोषित नहीं किया था पर 25 जून 2007 में NDA ने भैरो सिंह शेखावत का नाम प्रोपोज़ कर दिया। ये राष्ट्रपति चुनाव भी कोई इतना नजदीकी नहीं हुआ था और प्रतिभा पाटिल को 638,116 और भैरो सिंह शेखावत को 331,306 वोट ही मिले थे। इस चुनाव में प्रतिभा पाटिल को 23 राज्यों के MLA का समर्थन और भैरो सिंह शेखावत को केवल सात राज्यों का समर्थन प्राप्त था। इस तरह 25 जुलाई 2007 में भारत की पहली राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पद ग्रहण किया था।
भारत में 14 वां राष्ट्रपति चुनाव 19 जुलाई 2012 में आयोजित किया गया जब भारत में 13 वे राष्ट्रपति के लिए चुनाव होने थे। इस चुनाव में दो ही कैंडिडेट ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना नाम नामांकित किया था। प्रणब मुखर्जी जो कांग्रेस पार्टी की तरफ से उमीदवार थे और उनकी सहयोगी पार्टियों का भी उनके साथ सहयोग था। दूसरी तरफ पी ए संगमा जो नेशनल पीपुल्स पार्टी के नेता थे और मेघालय की राजनीति से सबंध रखते थे N. D. A की तरफ से नामांकित किये गए थे। एक बात इस चुनाव में दिलचस्प ये थी कि इस चुनाव में दोनों ही उमीदवार ऐसे थे जो उत्तर प्रदेश की राजनीति से आगे नहीं आये थे और उनका सबंध पूर्व भारत की राजनीति से था।
प्रणब मुखर्जी वेस्ट बंगाल और पी ए संगमा मेघालय की राजनीति से उठे नेता थे। इस चुनाव में प्रणब मुखर्जी को 713763 वोट और पी ए संगमा को 315987 वोट मिले थे। प्रणब मुखर्जी ने पी ए संगमा को 397776 वोट के अंतराल से हराया था। प्रणब मुखर्जी 25 जुलाई 2012 में राष्ट्रपति पद के लिए शपथ ग्रहण की थी।
भारत में 15 वां राष्ट्रपति चुनाव 17 जुलाई 2017 में हुआ था। अगर भारत के राष्ट्रपति चुनाव के इतिहास को देखें तो पांचवां राष्ट्रपति चुनाव ऐसा था जिसमें सत्तारूढ़ पार्टी की पसंद का राष्ट्रपति नहीं चुना गया था और वी वी गिरी एक आजाद उमीदवार के रूप में इलेक्शन जीते थे। इस चुनाव में अब केंद्र में सत्ता रूढ़ पार्टी N.D.A थी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने थे। इसलिए इस राष्ट्रपति चुनाव में N. D. A की तरफ से राम नाथ कोविंद का नाम नामांकित किया गया था।
गौरतलब है की अब केंद्र में भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल क्र लिया था और राज्यों में भी भारतीय जनता पार्टी का काफी सहयोग था। दूसरी तरफ U. P. A गठबंधन ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रतिभा पाटिल का नाम नामांकित किया था जो भारत की पूर्व राष्ट्रपति रह चुकी थी और प्रणब मुखर्जी से पहले कार्यकाल में रही थी। इस चुनाव में रामनाथ कोविंद को 21 राज्यों के MLA का समर्थन प्राप्त था और दूसरी ओर प्रतिभा पाटिल को 10 राज्यों के MLA का समर्थन प्राप्त था। चुनाव के बाद राम नाथ कोविंद ये इलेक्शन जीत गए थे और उन्होंने 702044 वोट और प्रतिभा पाटिल को 367314 मिले थे।
राष्ट्रपति चुनाव 2022 | Indian Presidential Election 2022 in Hindi
भारत के वर्तमान राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद हैं जिन्होंने 25 जुलाई 2017 में भारत के राष्ट्रपति का पद भार संभाला था। अगर सविंधानिक दृष्टि से देखा जाये तो उनका कार्यकाल पांच साल का जुलाई 2022 में खत्म हो जायेगा। अगर परिस्थितियां और देश के हालत ठीक रहते हैं तो फिर से जुलाई में राष्ट्रपति चुनाव होंगे जिसमें केंद्र में बहुमत में भारतीय जनता पार्टी अगले राष्ट्रपति पद के लिए किसी कैंडिडेट की घोषणा क्र सकती है।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि 2022 में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों का असर पड़ सकता था। पर इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने पांच में से चार राज्यों में अपनी सरकार बनाई है।
भारत के राष्ट्रपति से जुडी कुछ और जानकारी