भारत में सातवां राष्ट्रपति चुनाव 1977 | Seventh Indian Presidential Election 1977
भारत में सातवें राष्ट्रपति चुनाव की जानकारी :- भारत में छठे राष्ट्रपति चुनाव के लिए फकरूदीन अली एहमद का चुनाव किया गया था। उन्होंने 24 अगस्त 1974 में राष्ट्रपति की शपथ ली। ये भारत के राष्ट्रपति इतिहास में पहली बार हुआ जब किसी राष्ट्रपति का देहांत दुर्भाग्य वश अचानक हो गया था। भारत के छठे राष्ट्रपति का देहांत 11 फरवरी 1977 में होने के कारण भारत का राष्ट्रीय पद दूसरी बार खाली हुआ था।
जब फकरूदीन अहमद ने केवल 2 साल 171 दिन के लिए देश का राष्ट्रपति पद संभाला था। देश की परम्परा और रश्मों के हिसाब से भारत के उप -राष्ट्रपति को भारत का राष्ट्रपति पद एक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में दिया जाता है हुआ भी ऐसा ही।
उस वक्त भारत के राष्ट्रपति बी डी जति थे और बी डी जति को देश का कर्यवाहक राष्ट्रपति चुना गया। बी डी जति को एक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में 11 फरवरी 1977 में नियुक्त किया गया था और उन्होंने भारत के एक्टिंग प्रेजिडेंट के रूप में 25 फरवरी 1977 तक 164 दिनों के लिए काम किया था। एक्टिंग राष्ट्रपति के बाद 1977 में भारत के राष्ट्रपति चुनाव हुए थे जो सातवें भारतीय राष्ट्रपति चुनाव थे।
1977 चुनाव की समीक्षा जब नीलम संजीव रेड्डी चुने गए निर्वरोध राष्ट्रपति | 1977 election when Neelam Sanjiva Reddy was elected President unopposed
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ने सातवें राष्ट्रपति चुनाव 1977 के लिए तारीख 6 अगस्त 1977 निश्चित की थी। इस राष्ट्रपति चुनाव में प्रयाशियों के लिए नाम नामांकित करने के लिए तारीख चुनाव आयुक्त द्वारा 18 जुलाई 1977 निश्चित की गई थी। 1977 में राष्ट्रपति चुनाव के लिए 36 उम्मीदवारों ने नाम नामांकित किया था एक दिन में सभी राष्ट्रपति उम्मीदवारों की छंटनी की गई और 19 जुलाई 1977 में 35 कैंडिडेट के नामों को Reject कर दिया गया था।
19 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव के लिए नाम निश्चित हो गया जब नीलम संजीव रेड्डी को भारत का राष्ट्रपति बिना किसी Dispute के मुकककर कर दिया गया। ऐसा भारत के राष्ट्रपति चुनाव में दूसरी बार था जब जब किसी भारतीय राष्ट्रपति को निर्वरोध चुना गया था। पहली बार भारत के पहले राष्ट्रपति थे जिन्हे भारत का पहला राष्ट्रपति 1950 में बिना किसी चुनाव के नियुक्त किया गया था।
| भारत के छठे राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी |
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