भारत में जम्मू कश्मीर में धारा 370 ख़तम होने के बाद अब भारत के 28 राज्य और आठ केंद्र शासित प्रदेश हैं। जब भी भारत में विधानसभा चुनाव होते हैं रो हर किसी के मन में ये सवाल आता है कि अगर 28 राज्यों के साथ दो केंद्र शासित दिल्ली और पुडुचेरी में मुख्यमंत्री हो सकते हैं तो अन्य 6 केंद्र शासित प्रदेशों में मुक्यमंत्री (सीएम) क्यों नहीं बनता है। आइये इस पहलु को एक नजर से जाने की कोशिश करते हैं कि "Unlike Union Territories of Delhi and Puducherry, why don't other Union Territories have a Chief Minister?
भारत में केंद्र शासित प्रदेश क्यों और कैसे वजूद में आये :-
लंबी राजनीतिक और आजादी की लड़ाई के बाद जब भारत ने आजादी हासिल की तो भारत के सामने मुख्य चुनौती भारत के विखरे हुए प्रांतों को अलग संगठित करना था ताकी एक अखंड भारत का निर्माण हो सके। 22 दिसम्बर 1953 में पहले राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया था। जब 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग ने राज्यों के पुनर्गठन ने भारतीय संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की और इस रिपोर्ट के अनुसार भारत को 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया था। इस विधेयक ने संसद में एक सुझाव दिया था कि कुछ राज्यों को भाग "D" में रखा जाये और उन्हें केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया जाये। केंद्र शासित प्रदेश के नाम से ही पता चलता है कि ऐसा राज्य जिसका शासन केंद्र द्वारा चले।
दिल्ली और पुडुचेरी में विधानसभा है, मुख्यमंत्री बनता है अन्य यूटी में क्यों नहीं ?
अगर हम किसी भी राज्य को विधासभा क्षेत्र में बाँटने की कोशिश करेंगे तो निश्चय ही इलेक्शन कमीशन जनसँख्या को नजर अंदाज नहीं करेगा ,भारत के दिल्ली और पुडुचेरी में मुख्यमंत्री बनने का या विधानसभा बनने का पहला कारण ये भी हो सकता है कि दिल्ली और पुडुचेरी की जनसँख्या अन्य यूटी के मुकाबले अधिक है। अब सवाल ये है कि दिल्ली की जनसंख्या ज्यादा है तो चंडीगढ़ में विधानसभा या मुख्यमंत्री क्यों नहीं इसके पीछे ये तर्क दिया जा सकता है कि चंडीगढ़ दो राज्यों हरियाणा और पंजाब की राजधानी है और केंद्र सरकार इस शहर में प्रसाशन को अपने हाथ में नहीं लेना चाहती है।
दिल्ली और पुडुचैरी में सीएम पद और विधानसभा तो अन्य यूटी में क्यों नहीं ?
लंबी राजनीतिक और आजादी की लड़ाई के बाद जब भारत ने आजादी हासिल की तो भारत के सामने मुख्य चुनौती भारत के विखरे हुए प्रांतों को अलग संगठित करना था ताकी एक अखंड भारत का निर्माण हो सके। 22 दिसम्बर 1953 में पहले राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया था। जब 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग ने राज्यों के पुनर्गठन ने भारतीय संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की और इस रिपोर्ट के अनुसार भारत को 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया था। इस विधेयक ने संसद में एक सुझाव दिया था कि कुछ राज्यों को भाग "D" में रखा जाये और उन्हें केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया जाये। केंद्र शासित प्रदेश के नाम से ही पता चलता है कि ऐसा राज्य जिसका शासन केंद्र द्वारा चले।
दिल्ली और पुडुचेरी में विधानसभा है, मुख्यमंत्री बनता है अन्य यूटी में क्यों नहीं ?
अगर हम किसी भी राज्य को विधासभा क्षेत्र में बाँटने की कोशिश करेंगे तो निश्चय ही इलेक्शन कमीशन जनसँख्या को नजर अंदाज नहीं करेगा ,भारत के दिल्ली और पुडुचेरी में मुख्यमंत्री बनने का या विधानसभा बनने का पहला कारण ये भी हो सकता है कि दिल्ली और पुडुचेरी की जनसँख्या अन्य यूटी के मुकाबले अधिक है। अब सवाल ये है कि दिल्ली की जनसंख्या ज्यादा है तो चंडीगढ़ में विधानसभा या मुख्यमंत्री क्यों नहीं इसके पीछे ये तर्क दिया जा सकता है कि चंडीगढ़ दो राज्यों हरियाणा और पंजाब की राजधानी है और केंद्र सरकार इस शहर में प्रसाशन को अपने हाथ में नहीं लेना चाहती है।
दिल्ली और पुडुचैरी में प्रशासन का पूरा बोझ केंद्र के पास है। सरलता से ये ही कहा जा सकता है दिल्ली और पुडुचेरी में सीएम पद या विधानसभा इसलिए है कि उसकी जनसंख्या ज्यादा है और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में जनसंख्या कम है इसलिए केंद्र सरकार विधानसभा का निर्माण करके मुख्यमंत्री पद नहीं लाना चाहती है। चंडीगढ़ में अगर दिल्ली और हरियाणा का राजधानी का मामला सुलझ जाता है तो चंडीगढ़ में भी विधानसभा बन सकती है और मुख्यमंत्री का पद अस्तित्व में आ सकता है।