जानिए, आजादी के लिए पंडित नेहरू कितनी बार जेल गए थे ? | Know, how many times Pandit Nehru went to jail for freedom?

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री ही नहीं थे पर इसके साथ देश की आजादी के लिए उनका योगदान कम नहीं था। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि वे एक खानदानी रईस थे। उन्होंने महात्मा गाँधी के साथ लगभग सभी आंदोलनों में भाग लिया और 1922 में जब भारत में असहयोग आंदोलन चलाया गया था तब वे पहली बार जेल गए थे। 1922 में उनके जेल जाने के बाद वे आजादी तक एक बार नहीं 9 बार जेल गए थे आइये जानते है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री पडित जवाहर लाल नेहरू कब-कब और कितनी बार जेल गए थे।

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू कब और कितनी बार जेल गए ?

1. 6 दिसंबर 1921 में पहली बार गए थे पंडित जेल :-

भारत के पहले प्रधानमंत्री 6 दिसंबर, 1921 में जेल गए थे दरअसल अक्टूबर 1921 में ब्रिटिश सम्राट किंग जॉर्ज पंचम के बेटे और प्रिंस ऑफ वेल्स एडवर्ड का भारत दौरा था भारत की राजनीतिक कमेटी कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने इस दौरे के बहिष्कार का फैसला लिया था। उस वक्त भारत में खिलाफत अंदोलन जोरो पर था आंदोलन को कुचलने के लिए ब्रिटिश पूरी तरह से जोर लगा रही थी। गिरफ्दारियाँ जोरो पर थी। ब्रिटिश हुकूमत ने नवंबर में प्रिंस ऑफ़ वेल्स को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में बुलाया। जब 6 दिसंबर को प्रिन्स ऑफ़ वेल्स इलाहाबाद पहंचा तब पुलिस ने उसी दिन अर्थात 6 दिसंबर को पडित नेहरू को गिरफ्तार कर लिया था। 


पुलिस को ऐसा लगता था कि पंडित नेहरू का प्रिंस ऑफ़ वेल्स के बहिष्कार में बहुत बड़ा योगदान है इसलिए उन्होंने गिरफ्तार करके 6 दिसंबर 1921 में पहली बार जेल में डाल दिया गया था। सेक्शन 17 (1) के तहत केस चला उनपर आरोप लगे और लखनऊ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने उन्हें 6 महीने की सजा और 100 रूपये का जुरमाना किया था। आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए उन्होंने जुर्माना देने से साफ इंकार कर दिया था। अगर उन्हें 6 महीने की सजा हुई थी तो उनके 6 महीने 6 जून 1921 में बनते थे पर उन्हें इससे पहले ही रिहा कर दिया गया और वे पहली बार केवल 87 दिन तक 6 दिसंबर से लेकर 3 मार्च तक जेल में रहे। हालाँकि वे जेल से रिहा नहीं होना चाहते थे।


2. 11 मई 1922 में दूसरी बार पंडित नेहरू गए थे जेल :-

पंडित जवाहर लाल नेहरू 3 मार्च 1922 में पहली बार जेल की यात्रा करने के बाद जब वापिस आये तो उन्होंने असहयोग आंदोलन का वहिष्कार जारी रखा और भारत में उन्होंने विदेशी कपड़ों का और विदेशी माल का वहिष्कार फिर से शुरू कर दिया। इस बार पंडित नेहरू ने कोई भी जुर्म नहीं किया था उनका जुर्म इतना था कि वे 11 मई को अपने पिता मोती लाल नेहरू से मिलने के लिए जेल में गए थे पर ब्रिटिश सरकार उन्हें एक आंदोलनकारी समझती थी इसलिए उन्हें वेवजह गिरफ्तार क्र लिए गया और जेल में डाल दिया गया। इस बार उन्होंने 11 मई 1922 से 31 जनवरी 1923 तक जेल में बिताये। हालाँकि उन्हें कुछ दिनों के लिए इलहाबाद जेल में और बाद में लखनऊ जेल में भेजा गया था।



3. पंडित नेहरू तीसरी बार 22 सितंबर, 1923 से लेकर 4 अक्टूबर, 1923 तक अल्पकाल के लिए गए थे जेल :-

आजादी की लड़ाई के लिए लड़ते हुए पंडित नेहरू तीसरी बार सबसे कम समय के लिए जेल में चौथी बार गए थे जब उन्होंने केवल 22 सितंबर, 1923 से लेकर 4 अक्टूबर, 1923 तक केवल 12 दिन की जेल काटी थी। इसके पीछे पंडित जी को जेल में डालने के पीछे ब्रिटिश हुकूमत का मकसद यह था की नेहरू ने नाभा के सिख जथेदारों के साथ भाग लिया था और बिर्टिश सरकार का विरोध किया था। 

दरअसल बात यह थी कि पंजाब की दो रियासतें नाभा और पटियाला आपस में खींचातानी में थी ब्रिटिश हुकूमत ने नाभा के राजा को गद्दी से दरकिनार कर दिया था। ये ही नहीं जब नाभा के सिख जथेदारों ने इसका विरोध किया तो उन्हें बुरी तरह मारा गया। जब पंडित नेहरू को इस बात का पता चला तो उन्होंने नाभा के सिख जथेदारों के साथ विरोध में शामिल होने का फैसला किया और इसी जुर्म में उन्हें 12 दिन के लिए जेल में डाल दिया गया था।


4. पंडित जवाहर लाल नेहरू चौथी बार भारत की आजादी के लिए 14 अप्रैल, 1930 से 11 अक्टूबर, 1930 तक जेल में रहे

पंडित नेहरू देश की आजादी के लिए चौथी बार जेल तब गए थे जब महात्मा गाँधी ने भारत की आजादी के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रचलन किया था और उस वक्त उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। पुरे भारत में सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत गाँधी द्वारा डांडी मार्च का आयोजन किया गया था। डांडी मार्च की शुरुआत 13 मार्च को की जानी थी इससे पहले पंडित ने सभी अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ने के लिए और डांडी मार्च में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। पंडित नेहरू के इस कार्यक्रम से अंग्रेजी सरकार परेशान हो गई और डांडी मार्च के ठीक कुछ दिनों बाद उन्हें 14 अप्रैल 1930 में रायपुर पहुंचने से पहले गिरफ्तार कर लिया गया। इस बार पंडित नेहरू 181 दिनों के लिए जेल में रहे।


5. नेहरू पांचवीं बार 19 अक्टूबर 1930 से लेकर 26 जनवरी 1931 तक जेल में रहे :-

11 अक्टूबर, 1930 तक जेल में रहने के बाद पंडित नेहरू को देश की आजादी के लिए 19 अक्तूबर 1930 में जेल जाना पड़ा। इस बार उन्हें सेंट्रल जेल में बंद किया गया था। दरअसल बात ये थी कि इस बार वे किसानों के हक़ के लिए लड़ रहे थे। उन्होंने भारतीय किसानों को इस बात के लिए एकजुट किया था कि वे ब्रिटिश सरकार को टैक्स न दें और एकजुट रहें। ये अभियान चलाने के जुर्म में उनके ऊपर देश द्रोह का मामला दर्ज हुआ था। इसी दौरान उन्होंने अपनी बेटी इंदिरा गाँधी को जेल से चिठियाँ लिखी थी।



6. छठी बार पंडित नेहरू 1931 से 30 अगस्त, 1933 तक जेल में रहे :-

भारत के किसानों के हक में लड़ने के लिए इस बार पंडित नेहरू को 26 दिसंबर, 1931 से 30 अगस्त, 1933 तक कुल 616 दिनों के लिए जेल में रहना पड़ा। पंडित नेहरू की एक अपील ने कि किसान ब्रिटिश सरकार को टैक्स न दें परेशान किया हुआ था। इसी दौरान उन्हें बार जेल में रखकर कभी एक बार और कभी दूसरी बार जेल में बंद किया जा रहा था। ब्रिटिश सरकार ने पंडित नेहरू को इस बात के आदेश दिए कि वे किसी भी कीमत पर इलाहाबाद से बहार न निकलें पर जवाहर लाल नेहरू ने ब्रिटिश सरकार की एक नहीं मानी और इसका नतीजा यह निकला कि उन्हें जेल में डाल दिया गया।



7. सातवीं बार पंडित नेहरू 12 फरवरी, 1934 से 3 सितंबर, 1935 तक जेल में रहे :-

सातवीं बार पंडित नेहरू को जेल इस बात के लिए हुई थी कि 1934 में पंडित नेहरू ने अल्बर्ट हॉल में भारत की आजादी के लिए जनसभा को सम्बोधित किया था। उनके भाषण में कहे गए शब्दों को ब्रिटिश सरकार ने देशद्रोह करार दिया और उन्हें जेल में बंद कर दिया।


8. आठवीं बार-पंडित नेहरू 31 अक्टूबर, 1940 से 3 दिसंबर, 1941 तक जेल में रहे इस बार उन्हें जेल तब हुई थी जब पूरा विश्व दूसरे विश्व युद्ध के दौर से गुजर रहा था। इस बार पडित नेहरू ने भारत के लोगों बात की अपील की थी कि वे दूसरे विश्व युद्ध में अंग्रेजों का साथ न दें। 1940 में जब वे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में भाषण दे रहे थे तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और वे 399 दिन तक जेल में रहे थे।


9. पंडित नेहरू नौवीं बार 9 अगस्त 1942 से 15 जून 1945 तक आखरी बार जेल में रहे :-

इस जेल काल को पंडित नेहरू का सबसे बड़ा जेल सफर कहा जा सकता है। भारत के क्रांतिकारियों ने अब आजादी के लिए पूरा जोर लगाना शुरू कर दिया था और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया गया आजादी की लड़ाई के लिए ये भारत का बहुत बड़ा कदम था। आंदोलन के शुरू होने से पहले भारत के कई नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया था। पंडित नेहरू को भी अरेस्ट करके अहमदनगर किले में बंद कर दिया गया। और ये उनका सबसे ज्यादा जेल में बिताया गया समय था जब उन्होंने 1041 दिनों के लिए जेल में रहना पड़ा।



Rakesh Kumar

Rakesh Kumar From HP is interested in writing and go to the provision when where and why

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