भारत की आजादी के बाद भारत के पहले राष्ट्रपति के पद के लिए चुनाव 24 जनवरी 1950 को होने थे। सभी राजनितिक करिंदों ने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का नाम पहले राष्ट्रपति के लिए चुना था अर्थात वे एक निर्विरोध उमीदवार थे। 26 जनवरी 1950 को जब भारत का सविंधान लागु हुआ उससे ठीक दो दिन पहले यानि 24 तारीख को भारतीय सविंधान सभा की एक मीटिंग की गई ये मीटिंग भारतीय सविंधान सभा की आखरी मीटिंग थी।
इसी दिन ही भारत का राष्ट्रीय गान जन गण मन भी निश्चित किया गया था। अब भारत के राष्ट्रपति चुनाव के लिए सभी राजनीतिक पार्टी ने सर्वसम्पति से डॉक्टर राजेंदर प्रसाद का नाम प्रोपोज़ किया। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को देश के पहले प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भारत के पहले राष्ट्रपति के लिए प्र्ताव दिया था। जब जवाहर लाल नेहरू ने उनका समर्थन किया तो बल्लभ भाई पटेल ने भी उनका समर्थन किया था।
गौरतलब है कि इससे पहले डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद इसे पहले भारतीय सविंधान सभा के लगातार चार सालों से अर्थात 1946 से अध्यक्ष पद पर विराजमान थे। 1950 में राष्ट्रपति चुनाव के लिए कोई भी नाम नामांकित नहीं था इसलिए विधानसभा के सचिव, एच वी आर आयंगर ने घोषणा की कि राजेंद्र प्रसाद को भारत के राष्ट्रपति के पद के लिए विधिवत निर्वाचित किए जाते हैं।
| भारत के पहले राष्ट्रपति |
इस प्रकार डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बन गए। उन्हें पहले गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी 1950 को, भारत के गवर्नर-जनरल, सी. राजगोपालाचारी द्वारा, भारत के मुख्य न्यायाधीश, हरिलाल जेकिसुंदस कानिया की उपस्थिति में शपथ दिलाई गई थी। गौरतलब है कि डॉक्टर राजेंदर प्रसाद के साथ एक उनके राष्ट्रपति चुने जाने से पहले ठीक एक दिन अर्थात 25 जनवरी को एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घट गई थी जब 25 जनवरी को उनकी बहिन जिनका नाम भगवती देवी था अचानक देहांत हो गया था इसलिए भारत के पहले राष्ट्रपति अपनी बहन के संस्कार के लिए अपने शपथ ग्रहण के बाद गए थे।