शारीरिक शिक्षा शिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थी को विषय में निपुण सामाजिक, शारीरिक, समाजिक रूप से और नैतिक रूप से मजबूत बनाना है। शारीरिक शिक्षा में वह सभी क्रिया होती है जो अन्य विषयों के साथ जुडी हों। शारीरिक शिक्षा शिक्षण का शिक्षा के अलग -अलग स्टार पर अपना लक्ष्य या उद्देश्य होते हैं। आइये जानते हैं शारीरिक शिक्षा शिक्षण के क्या लक्ष्य और उद्देश्य क्या हैं ?
शारीरिक शिक्षा के लक्ष्य और उद्देश्य :-
- शिक्षक योग्य, उत्साही होना चाहिए ।
- गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करते हैं, और प्रांतीय पाठ्यक्रम सीखने के परिणामों को पूरा करते हैं।
- शिक्षक विभिन्न मूल्यांकन और मूल्यांकन रणनीतियों का उपयोग करता है।
- छात्र सीखने, व्यक्तिगत सफलता, निष्पक्ष खेल और व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर जोर दिया जाता है।
- गतिविधियां प्रत्येक छात्र के लिए उम्र और विकास के चरण के लिए उपयुक्त तरीके से लागु की जाती हैं।
- शिक्षण ऐसा हो की सभी छात्र शारीरिक शिक्षा लिए तत्पर हो।
- स्कूल आपके प्रांत द्वारा शारीरिक शिक्षा के लिए अनिवार्य न्यूनतम समय को पूरा कर रहा है।
- शारीरिक शिक्षा के समय से परे शारीरिक रूप से सक्रिय होने के अवसर हैं।
- छात्र नेतृत्व के विकास के अवसर हैं।
- एक गुणवत्ता कार्यक्रम प्रदान करने के लिए स्कूल में सुविधाएं, उपकरण और शिक्षण सहायता है।
B. अनुकूलित शारीरिक शिक्षा के उद्देश्य और उद्देश्य
- खेल के नियमों और रणनीतियों को जानने के लिए प्रयास करना।
- मांसपेशियों की ताकत, संतुलन, लचीलेपन का स्वस्थ स्तर विकसित करने का प्रयास करना।
- शारीरिक गतिविधि सेटिंग में उपयुक्त सामाजिक कौशल को प्रदर्शित करना।
- शरीर की संरचना और कार्डियो-श्वसन सहनशक्ति को मजबूत करने के लिए प्रयास करना।विकासात्मक रूप से आयु-उपयुक्त आंदोलन और मोटर कौशल में नियमित रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना।
- आंदोलन और मोटर कौशल में योग्यता विकसित करना।
- नियमित शारीरिक गतिविधि के लाभों को समझाने का प्रयास करना।
- गेम सेटिंग्स में उनके उपयोग में खेल के नियमों और रणनीतियों को प्रदर्शित करने के लिए।
C. शारीरिक शिक्षा के सामान्य उद्देश्य और लक्ष्य | General aims objectives of Physical Education
1. मानसिक विकास या मानसिक कसरत :-
बात चाहे प्राइमरी शिक्षण की हो या फिर उच्च स्तर के शिक्षण की सबसे पहले शारीरिक शिक्षा शिक्षण का यह लक्ष्य होना चाहिए कि एक विद्यार्थी का मानसिक विकास कैसे किया जाये और शारीरिक शिक्षा शिक्षण में मानसिक विकास हेतु पाठ्यक्रम में दिया भी होता है। शारीरिक शिक्षा के शिक्षण में जितने भी मानसिक विकास के लिए तरीके दिए है उन्हें बच्चों को सिखाना चाहिए।
2. शारीरिक विकास हेतु प्रयास करना :--
शारीरिक विकास या शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किए जाने वाले प्रयास शारीरिक शिक्षा का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। जब तक एक विद्यार्धी शारीरिक रूप से कमजोर है तो वह अन्य किसी भी काम में निपुण नहीं ही सकता है इसलिए अगर आप अगर शारीरिक शिक्षा का विकास करते हो तो विद्यार्थी का मानसिक विकास भी होगा।
एक शारीरिक शिक्षा का मुख्य उद्देश्य यह भी है कि क्या उसे शरीर के तीनों तंत्र , पाचन तंत्र, सांस तंत्र, और Circulatory तंत्र का ज्ञान है या नहीं। जब भी कोई शारीरिक शिक्षा का शिक्षक कोई भी क्रिया करवाता है है तो ये तीनों तंत्र काम करते है इसलिए एक शारीरिक शिक्षा के अध्यापक होने के लिए आपको शिक्षण में इन बातों के बारे में विद्यार्थी को Brief में समझाना जरूर चाहिए।
हर व्यक्ति में कुछ भावना होती हैं और इन भावनाओं पर काबू पाए बिना इंसान सही Track पर नहीं आ सकता है भावना के रूप में क्रोध, प्यार, ईर्ष्या या फिर कोई और सवेग भी हो सकता है। और इन सवेगों के कारण कभी बचा गलत फैसला भी कर लेता है इसलिए एक शारीरिक शिक्षा के शिक्षण में इस बात का होना बहुत जरूरी है कि एक बच्चे का भावना को कैसे Control किया जाये और इसके लिए प्रयास करना एक शारीरिक शिक्षा के शिक्षक का कर्तव्य है।
अक्सर देखने में आया है कि बच्चे स्कूल में और अन्य संस्थाओं में खेल भावना से प्रेरित नहीं होने हैं जब भी कोई किसी खेल में भाग लेता है तो उसके अंदर जितने की ललक होती है और इसी भावना के साथ वह किसी भी तरीके से जितना चाहता है जीत ही उसका मकसद होता है। और इसी भावना के चलते वह कभी - कभी By hook and crook जैंता चाहता है। इससे खेल पर लगत असर पड़ता है इसलिए शारीरक शिक्षा के शिक्षण का ये भी एक लक्ष्य और उद्देश्य होना चाहिए कि एक शिक्षक शिक्षण में बच्चो को खेल भावना का विकास करे।
10. टीम वर्क का विकास :-
शारीरिक शिक्षा में खेल में टीम के साथ जीत हासिल की जाती है कब्बड्डी और फुटबाल जैसे खेल में या अन्य किसी भी खेल में टीम के वगेर अकेला कप्तान जीत हासिल नहीं कर सकता है। इसलिए सामाजिक शिक्षा शिक्षण का एक उदेश्य होना चाहिए की टीम वर्क की भावना को विकास विद्यार्थियों के अंदर किया जाये।
